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शनिवार, मई 29, 2010

शनिवार, मई 29, 2010 3
प्रिय सुनील दत्त जी आप के सवालों के जवाब दिए जा रहे हैं। एक गाँधी की हत्या आप की मानसिकता के लोगो ने कर दी थी। दूसरे गांधी की हत्या कब करोगे :-


• जिस तरह का लेख हिन्दूओं को अपमानित करने के लिए लख़नऊ ब्लॉजगर्स असोसिएशन पर लिखा गया अगरहिन्दू भी उस पर उसी तरह की प्रतिक्रिया करें जैसी मुसलमानों ने सिमोगा में की कई दिनों तक हिंसा फैलाकर वसमाचार पत्रों के कार्यालयों को जलाकर की तो फिर परिणाम स्वारूप मारे गए हिन्दूओं और मुसलामानों के कत्लके लिए क्या लख़नऊ ब्लॉगर्स असोसिएशन जिम्मेवारी लेने को तैयार है?
भगवान न करे ऐसी कोई हिंसा हो लेकिन अगर होती है तो फिर इस वात की क्या गारंटी है कि लोकसंघर्ष, विस्फोटकाम उस दंगे के लिए हिन्दूओं व सुरक्षावलों को जिम्मेवार ठहराकर मुसलमानों को अगले दंगे के लिए भड़कानाशुरू कर देंगे?

उत्तर : यह आपका मानसिक दिवालियापन है लखनऊ ब्लॉगर अस्सोकोअतिओन में क्या लिखा गया मेरी जानकारी में नहीं है। कम्युनिटी ब्लॉग पर काफी लोग सदस्य होते हैं जिनका इदेन्तिफ़िकतिओन भी नहीं किया जाता है यही हाल आपका भी है। मेरी समझ से आप प्रखर राष्ट्रवाद के प्रणेता सुनील दत्त जी हैं। लेकिन इसका इदेन्तिफ़िकतिओन मेरे पास नहीं है । विर्तुअल दुनिया में बहुत सारी चीजें यथार्त नहीं होती हैं यहाँ पर कोई किसी का जमानतदार नहीं है। रहा द्रष्टिकोण का सवाल आपका द्रष्टिकोण गलत है। आप की बात तय है की हर चीज हिन्दू मुसलमान के नजरिये से देखेंगे । इंसानी भाव आपमें नहीं है। अभी तक जहाँ जहाँ दंगे हुए हैं उसका प्रेरणा स्रोत्र नागपुर मुख्यालय रहा है।


• जिस तरह आप लोग गुजरात दंगो के लिए हिन्दूओं को शूली पर टांगने की बात कर रहे हैं अगर उसी तरह हिन्दूभी हिन्दूओं को जिन्दा जलाने वाले 2000 मुसलिम आतंकवादियों ( जो वास्तविक रूप से दंगों के असली गुनाहकारहैं ठीक उसी तरह जिस तरह अनवर जमाल और सलीमखान लगातार हिन्दूओं के आस्थ केन्द्रों पर हमला कर नए दंगे की भूमिका तैयार कर रहे हैं)को सूली पर टांगने के लिए अभियान शुरू कर दें जिन्होंने ट्रेन रोककर आग लगाईथी तो ?

उत्तर : गुजरात में नर पिशाचों ने इंसानों की हत्या की। यह आपका हिन्दू मुसलमान का द्रष्टिकोण उचित नहीं है गुजरात में राज सत्ता ने धर्म आधारित स्वरूप धारण कर स्वयं दंगो में भाग लिया था इसीलिए उसके कई अधिकारी कारागार में हैं। किसी भी घटना के अपराधियों का अंतिम निष्कर्ष न्यायपालिका द्वारा सजा देना ही संभव है। जो होता रहता है। अगर किसी ब्लॉग के ऊपर कोई किसी की आस्था को धक्का पहुंचा रहा है तो पोर्न साईट मान कर उसे मत देखने जाइये। एक दुसरे की आस्था और विश्वास को डगमगाने का काम आप लोग करते रहते हैं तो कभी एक सिद्धक होता है तो दूसरा साधक ।

• अगर विस्फोट काम वास्तब में मानबता की पक्षधर हैं तो 23 बर्ष पहले हुए मेरठ दंगों जिसके लिए भी मुसलिमआतंकवादी जिम्मेवार थे का दोष हिन्दूओं व सुरक्षावलों पर डालकर मुसलिम आतंकवादियों को फिर से दंगाभड़काने के लिए भूमिका तैयार करने का क्या मतलब ?
सच्चाई पढ़ो जरा।


"The Beginning of the Tragedy


Large scale rioting began in the early hours of May 19, 1987 and the maximum damage was done just in course of a few hours. On that fateful morning, thousands of people, already incited by inflammatory speeches and slogans broadcast over public address system in mosques, barricaded the national highway, burnt 14 factories, hundreds of shops and houses, vehicles, and petrol pump, and cast scores of people into flames. The sporadic Hindu reaction was revengeful. Meerut continued in flames between May 19 and May 22, with murder, loot, explosions, and wild rumours further fuelling violence. "


उत्तर : वैसे तो यह प्रश्न विस्फोट डॉट कॉम से आप ने पुछा है लेकिन मेरठ दंगो की वास्तविकता से परचित होने के कारण आपके सेवार्थ लिख रहा हूँ मैं अपने छात्र जीवन में मेरठ शहर के इस्लामाबाद मोहल्ले में रहा हूँ। पूरे मोहल्ले में अकेला मैं गैर मुस्लिम था शाम को अक्सर वहां की चाय की दुकानों पर तमाम सारे लोगों से बात चीत होती रहती थी और कभी कभी तीखी और उग्र बातचीत हो जाती थी लेकिन कभी भी मारपीट की नौबत नहीं आई बगल में गैर मुस्लिम व्यापारियों का मोहल्ला है एकी दुसरे से जम कर कारोबार भी करते हैं लेकिन जब हिंदुत्व वाले तबके और प्रसाशन का साथ एक साथ हो जाता है तब मुस्लिम व्यापारियों को दबाने के लिए दंगे हो जाते हैं इन दंगो में व्यापक जान माल की हानि होती है लूट होती है मैं मुस्लिम्स को कोई प्रमाण पात्र नहीं जारी कर रहा हूँ जैसे हमारे धर्म में हिन्दुवात्व वादी लोग हैं जो विदेशों से संचालित होते हैं उनके बीच में भी गैर जिम्मेदाराना लोग व विदेशों से संचालित होने वाले लोग हैं। स्थानीय स्तर पर वोटों के व्यापारी इन सब कामो में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। सुरक्षा बालों विशेष कर पी.एस.सी के जवानो ने मलियाना मेरठ दंगो के बाद अपने घ रों को जो मनी आर्डर भेजे थे वह उनकी आय से अधिक थे। भैया सुनील दत्त सी.आइ.ए का प्रचार तंत्र मत बनो ।

• जिस तरह आप लोग हत्याओं की सालगिराह मनाने का चलन चला रहे हैं ठीक उसी चलन का पालन करते हुएअगर हिन्दू आज तक मुसलिम आतंकवादियों द्वारा की गई हिन्दूओं की हत्याओं की सालगिराह मनाना सुरू करदें तो ? उसके परिमामस्वारूप पैदा हुए बातबरण की बजह से होने वाली हत्याओं के लिए क्या विस्फोट कामजिम्मेवारी लेने को तैयार है अगर नहीं तो फिर ऐसी उकसाने वाली कार्यवाही क्यों ?


उत्तर: यह प्रश्न आपका विस्फोट डॉट कॉम से है जहाँ तक मेरी जानकारी है की भारतीय समाज में हत्याओं की सालगिराह मानाने का अभी तक कोई संचार प्राप्त नहीं हुआ हाँ यह जरूर है की हत्यारों के मरने पर लोग गम जरूर मना लेते हैं।

• जिस तरह आप गुजरात दंगो में हुई कुल 1500 हत्याओं के लिए सीधे हिन्दूओं व सुरक्षावलों को जिम्मेवारठहराते हैं क्या उसी तरह आपने कभी कशमीरघाटी में हुई 100000 मौतों व उजाड़े गए 500000 लोगों के लिएमुसलमानों व उनके सेकुलर नेताओं को कभी जिम्मेवार ठहराया क्या ?

उत्तर: गुजरात के दंगो में सीधे-सीधे वहां के मुख्यमंत्री और राज्य नियोजित दंगे थे। राज्य ने नियोजित तरीके से

अपने नागरिकों की हत्या की थी और आज भी उनके तमाम अधिकारी जेलों में हैं। कश्मीर के सम्बन्ध में आप के आंकड़े गलत हैं। कश्मीर घाटी में राज्य द्वारा कभी नागरिको का नियोजित हत्या नहीं किया गया है। लेकिन आप की आँखों का चस्मा हिन्दू और मुसलमान के रूप में देखने का आदि है इसलिए आप हर हत्या में हिन्दू मुसलमान ढूंढते रहते हैं जबकि मरता एक इंसान है।


• क्या आपने कभी सोचा कि क्यों वहीं पर दंगे होते हैं जहां पर हिन्दूओं की जनशंख्या कम होती है ?


उत्तर: बहुत सीधा सा उत्तर है जहाँ पर गैर हिन्दू आबादी हिन्दू ज्यादा है वहीँ पर हिंदुत्व वादी शक्तियां उनकी हत्या, लूटपाट करने की साजिशें रचती हैं और जैसे ही प्रसाशन के किसी अफसर का साथ मिलता है हत्याएं और लूट पात हो जाती हैं अगर प्रसाशन का सहयोग न मिले तो कहीं दंगा हो ही नहीं सकता है। मारना मुसलमान को होता है तो हिन्दू आबादी में षड्यंत्र क्यों रचा जायेगा।


• क्या आपने की सोचा कि अगर हिंसा हिन्दूओं ने फैलानी हो तो वो अपने बहुमत वाले क्षेत्रों में फैलायेंगे या फिरजहां वो कम हैं वहां पर ?


उत्तर : इससे पूर्व उत्तर दिया जा चुका है।

• आपको समझना चाहिए कि आज देश के कई ऐसे राज्य हैं जहां हिन्दूओं की जनशंख्या 90% से अधिक होने केवावजूद गैर हिन्दू मुख्यामन्त्री हुए हैं क्या ऐसी ही कल्पना लगभग 50% हिन्दू अबादी वाले जम्मू कसमीर में हिन्दूमुख्यमन्त्री होने की कर सकते हैं?

उत्तर: जम्मू एंड कश्मीर का राजा हरी सिंह था । जो ब्रिटिश साम्राज्यवाद के इशारों पर कार्य करता था लेकिन जंगे आजादी का योद्धा शेख अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर को ब्रिटिश साम्राज्यवाद से आजाद कराने की लड़ाई लड़ रहा था। इस विषय में और अधिक जानना चाहते हैं तो कर्ण सिंह की आत्मकथा पढ़ लीजिये। जो हरी सिंह के लड़के हैं।


• अगर हिन्दू और मुसलमान एक जैसे हिंसक होते तो क्या 80% हिन्दू अबादी वाले सारे भारत से मुसलामनों कासफाया उसी तरह न कर दिया जाता जिस तरह कशमीर घाटी व उतर पूर्व के कई राज्यों से हिन्दूओं का सफायाकर दिया गया ?


उत्तर: हिंसा के लिए किसी एक धर्म को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है । धर्म के नाम पर महाभारत रावण वध कलिंग विजय क्या आप भूल गए हैं । भारतीय सामंत राजा रजवाड़े छोटी छोटी बातों में एक दुसरे को नीचा दिखाने के लिए हमेशा युद्धरत ही रहते थे। आज भी प्यार करुना दया का सन्देश देने वाले हजरत ईशा का अनुयायी पूरी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी नीतियों के लिए सम्पूर्ण मानवता को नष्ट कर देने पर उतारू हैं। इतिहास के पन्नो को जरा ध्यान से देखिये मैं कुछ नहीं लिख रहा हूँ यह सब दर्ज है।

• क्या आपने आज तक कभी इस वात का विरोध किया कि बच्चों की छात्रवृतियों का आधार सांप्रदाए नहीं होनाचाहिए जो कि इस सेकुलर सरकार द्वारा वना दिया गया?


उत्तर: इस भ्रष्ट व्यवस्था में ना जाति के आधार पर कुछ होता हैं न धर्म के आधार पर कुछ होता है सब कुछ भ्रष्टाचार के साथ होता है हमारे छात्र जीवन में अनसुचित जाति की छात्र वृत्तियाँ सबसे जयादा सवर्ण जाति के छात्र फर्जी सरिफिकाते लगा के लेते थे। आरक्षण का खेल आपस में लड़ने का खेल है। इमानदारी से अगर दस सालों के लिए आरक्षण लागू किया गया होता तो उसको आगे बढ़ने की कटाई आवश्यकता नहीं थी। लेकिन हमारी नियत में खोट रही है इसलिए ये दिक्कतें पैदा होती हैं। विश्व स्तर पर जब हमारे देश का नाम आता है तो एक तबका अथाह सम्पदा का मालिक नजर आता है तो द्सुसरी तरफ गोबर से गेंहू निकाल कर खाने वाले लोग मिलते हैं। अगर आप चाहते हैं गोबर से गेंहू निकाल कर खाने वाले लोगों को उसी दशा में रहने दिया जाए तो आप की बार उचित है अन्यथा इमानदारी से अपने दिल पर हट रखकर उनके बारे में सोचिये फिर कोई सवाल नहीं उठेगा और उनके लिए कुछ करने की तमन्ना जागेगी।

• जिन बच्चों को आप सांप्रदाए के आधार पर बंचित करेंगे क्या वो कभी सर्वघर्मसम्भाव के रास्ते पर चल सकेंगे?


उत्तर: बच्चे बच्चे हैं हर बच्चे को उचित परवरिश पाने का अधिकार है आप ऐसी व्यवस्था के पोषक हैं जिसमें धीरू भाई अम्बानी, सुब्रत राय सहारा, जैसे लोग देखते ही देखते हजारो-हजार करों के स्वामी हो जाते हैं मेरा आपसे अनुरोध है की उनके जीवन परिचय को और अर्थशास्त्र को पुश्तकों में शामिल करवाइए ताकि उसको पढ़कर हर बच्चा धीरू भाई अम्बानी, सुब्रत राय सहर जैसे विशाल आर्थिक साम्राज्यों का मालिक बन सके।


• देखो मेरे भाई आज फूट डालो और राज करो की निती अपने चर्म पर है तो क्या आपकी कलम इस फूट डालो औरराज करो की निती के विरूद्ध नहीं चलनी चाहिए?


उत्तर: आप का लेखन उसी का हिस्सा है। आप साम्राज्यवादियो की इन्ही नीतियों का अनुसरण कर रहे हैं।


• अगर आप बास्तब में समझते हैं कि आतंकवादी सही हैं और सुरक्षाबल गलत तो फिर खुल के कहो न कि तुम आतंकवादियों के समर्थक हो फिर देखो जरा परिणाम क्या होता है?


उत्तर: कोई भी आतंकवादी लोकतान्त्रिक नहीं हो सकता है उसकी जितनी भी निंदा की जाए वह कम है लेकिन आतंकवादियों के नाम पर किसी समुदाय विशेष का मान मर्दन करना उचित नहीं होता है।

• जब देश सेकुलर है तो फिर देश में धर्म आधारित पाठशालाओं व उनको सरकारी सहयता का क्या मतलब?


उत्तर: यह आप राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा संचालित सरस्वती शिशु मंदिर के प्रबंधको से पूछिए।

• जब देश सेकुलर है तो देश के मदरसों को आतंकवाद व अलगाववाद की जड़ साऊदी अरब से आर्थिक सहायताक्यों ?


उत्तर: ये सी.आइ.ए का प्रचार है विदेशी दान और चंदे सबसे ज्यादा विश्व हिन्दू परिषद्, राष्ट्री स्वयं सेवक संघ ले रहा है और जिसका समाज के हित में कोई उपयोग नहीं हो रहा है। देश की भावनात्मक एकता और अखंडता को तोड़ने के कार्य में खर्च हो रहा है।

• जब देश के मन्दिरों पर सरकार का कब्जा है तो फिर मसजिदें और चर्च सरकार के कब्जे में क्यों नहीं ?


उत्तर: मेरी जानकारी में कोई भी मंदिर सरकार नहीं संचालित कर रही है। हाँ , ट्रस्ट अगर है तो उसके विवाद में रिसीवर बैठाने का काम कर सकती है और करती है। सरकार तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा के लिए काफी खर्च करती है चाहे तीर्थ यात्री किसी भी धर्म या समुदाय का हो। वैसे तो आपके तमाम सारे गुरुवों की चर्चाएं ब्लॉगजगत में हुई हैं लगता है उससे आपकी भी नाक ऊँची हुई होगी।

• .. जिन लोगों को भारत की सभ्यता संस्कृति, सुरक्षावलों, नयाय प्रक्रिया व संविधान पर कोई भरोशा नहीं तो क्याउनको आतंकवादियों की पनागाह पाकिस्तान या चीन जाकर नहीं बस जाना चाहिए?

उत्तर: श्रीमान जी, सभ्यता और संस्कृति को आप परिभाषित नहीं कर पा रहे हैं जब भारत की सभ्यताएं अनेकता में एकता पैदा करती हैं लेकिन आप चाहते हैं कबीर को, रसखान को, मालिक मोहम्मद जायसी को, अमीर खुसरो को, नजीर अकबराबादी की एक विशाल जमात को स्वर्ग से आप नीचे लाकर किस देश में भेजना चाहते हैं उनको नीचे लाने के लिए कोई उपाय सोचो तभी आप दूसरे देश में उनको भेज पायेंगे। वैसे यह लोग आपकी संकुचित विचारधारा से बहुत ऊपर हैं। आपकी विचारधारा का भारतीय सभ्यता और संस्कृति में कोई भी आधार रहा है न आज है अगर आप में थोड़ी क्षमता हो तो मुझे पकिस्तान या चीन भेजवा दें तो मैं आपका व्यक्तिगत रूप से आभारी रहूँगा।



सादर

सिर्फ आपका


सुमन

loksangharsha.blogspot.com

3 पाठकों ने अपनी राय दी है, कृपया आप भी दें!

  1. "The Beginning of the Tragedy


    Large scale rioting began in the early hours of May 19, 1987 and the maximum damage was done just in course of a few hours. On that fateful morning, thousands of people, already incited by inflammatory speeches and slogans broadcast over public address system in mosques, barricaded the national highway, burnt 14 factories, hundreds of shops and houses, vehicles, and petrol pump, and cast scores of people into flames. The sporadic Hindu reaction was revengeful. Meerut continued in flames between May 19 and May 22, with murder, loot, explosions, and wild rumours further fuelling violence. "

    श्रीमान सुमन जी , ब्लॉग पर लगा आपका उम्रदराज फोटो देखकर आपकी इज्जत करता था ! वैसे बामपंथियों ( क्षमा करना मगर अपशब्द में इन्हें xxxपंथियों भी कहा जाता रहा है ) से मैं शुरू से ही घृणा करता हूँ इनकी घटिया मानसिकता की वजह से ! खैर इस बात को छोडिये, लिखने की जहां तक बात है तो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि मैं आप जैसे वामपंथियों पर आपसे बेहतर एक लंबा लेख लिख सकता हूँ लेकिन मैं दोगले बेशर्म प्राणियों को ज्यादा अहमियत नहीं देता !

    सवाल तो बहुत है , आप जैसे वामपंथियों से पूछने के लिए मगर याहां सिर्फ दो सवाल पूछुंगा !
    एक) अभी कुछ दिन पहले सुनील दत जी के कुछ सवाल किये थे तो आपने उसके जबाब में हरिद्वार का उदाहरण दिया , मिंया सुमन जी , आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि मैं भी दिल्ली में रहता हूँ और हर शुक्रवार को जुमे की नमाज के लिए जितनी पोलिसे फ़ोर्स लगाईं जाते है , उसकी वजह से बहुत से निरपराध मारे जाते है, अरबों रूपये का खर्च आता है , घंटो सड़के जाम रहती है ! यह मैं अपने एक इन्स्पेक्टर मित्र के हवाले से कह रहा हूँ क्योंकि हाल ही में उसके इलाके में एक वारदात हुई थी जिसमे एक गृहणी मारी गई ! मैंने जब विरोद स्वरुप उसी यह प्रश्न उठाया तो उसका सीधा सा जबाब था कि थाणे की पूरी फाॅर्स शुक्रवार की नमाज के लिए सड़क पर लगा दी गई थी ! सुनील जी ने आपसे सवाल यात्रा के रियायत का पूछा था हरिद्वार का नही, पर तुन जैसे लोग एक सोच के दायरे से बाहर तो झाँक ही नहीं सकते !

    दो ) २९ दिसंबर २००८ , फिलिस्तीन पर इस्जारिले हमले के विरोध में जब नै दिल्ली के इजराइली दूतावास पर लाल झंडा लिए एक लम्बी फ़ौज देखी ( भले ही वो ५०-५० रूपये देकर झुग्गियों से उठाये गए हों ) तो लगा कि जय चाँद बहले ही ११०० साल पहले मर चुका मगर उसकी पैदावार काफी फलफूल गई है देश में ! क्या आप बता सकते है एक भी ऐसा वाकया ( मैंने हर बात को करीब से नोट किया उस वक्त और मिरे पास पुक्ता सबूत भी है ) जिसमे २६/११ में पाकिस्तान का किल्येर हाथ होने का बावजूद भी इन जयचंद की औलादों ने पाकिस्तान के दूतावास पर वैसा ही प्रदर्शन किया हो ?
    ज्यादा नहीं कहूंगा क्योंकि आप समझदार है!

  2. Suman says:

    sriman godiyaal ji,
    aapko dhanyvaad

    suman

  3. --प्रत्येक कथन के उत्तर में--- १.जहां ह्न्दुओं पर ज्यादादती की बात है वहां -हिन्दू/मुस्लिम नहीं इन्सान/ अपराधी तत्वों ने किया, २. जहां मुस्लिमों पर अत्याचार की बात वहां---राज्य , पुलिस, फ़ोर्स ने हिन्दुओं के साथ मिलकर ्किया, ३.जहां आन्कडों की बात वहां -आन्कडे गलत हैं।

    यही तीन बातें सर्वत्र कही गयी हैं जो रटे रटाए उत्तर हैं एवम तथ्य हीन हैं। किसी प्रश्न का सटीक उत्तर नहीं है इनके पास.

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भईया-जन को ये सलाह है की वह LUCKNOW BLOGGERS' ASSOCIATION को Google Chrome ब्राउज़र पर ही खोले जिससे उन्हें ब्लॉग पढने में और अधिक आनंद आएगा !

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