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सोमवार, जुलाई 20, 2020
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            उत्तर प्रदेश में आठ पुलिस वालों की नृशंस हत्या करने वाला दुर्दांत अपराधी विकास दुबे आखिर मध्य प्रदेश के उज्जैन में पकड़ा गया और उसका उत्तर प्रदेश ले जाते समय कानपुर पहुँचने से पहले ही पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया. कहा गया कि उसने पुलिस की गाड़ी पलटने के बाद पुलिस वालों के हथियार छीन कर भागने की कोशिश की थी .  जिस ढंग से उसे मारा गया इसकी संभावना मीडिया पर पहले से व्यक्त की जा रही थी.
           कुछ समय पूर्व हैदराबाद में युवा महिला डाक्टर   से रेप व उसके हत्यारों का जब इसी प्रकार एनकाउंटर हुआ, उस समय जनता में बलात्कारियों और हत्यारों के विरुद्ध और हैदराबाद पुलिस के पक्ष में जो समर्थन और प्रशंसा का वातावरण बना  था, शायद उसी से प्रेरित होकर  उत्तर प्रदेश एसटीएफ द्वारा इस दुर्दांत अपराधी विकास दुबे और उसके कुछ साथियों का एनकाउंटर किया गया.
             समाज के एक वर्ग द्वारा इस ' जंगल के न्याय' के प्रति समर्थन दिया गया है जो कानून और न्याय की दृष्टि से काफी खतरनाक है. हमारे देश में प्रजातांत्रिक व्यवस्था को लागू हुए सात दशक से अधिक समय हो गया हो, पर लोकतांत्रिक मूल्यों को हम अभी तक पूरी तरह अंगीकार नहीं कर पाये हैं. तात्कालिक रूप में भावुकता में कभी-  कभी  आम जन   का इस 'जंगल के न्याय' को भी समर्थन दिखाई देने लगता है, पर इस प्रवृत्ति के दूरगामी घातक परिणाम होने की संभावना है.
वैसे ही समाज में अपराधीकरण बढ़ता जा रहा है ऐसे में ऐसी घटनाएं निश्चित रूप से हमें बर्बरता की ओर ही अग्रसर करेंगी.
             दुर्दांत अपराधी को  तुरंत सजा का निर्णय ( एनकाउंटर) और पुलिस व राज्य सरकार द्वारा अपनी पीठ थपथपाने का यह कार्य तात्कालिक रूप में समाज के एक वर्ग  द्वारा  भले ही उचित माना जा रहा हो , पर यह घोर अपरिपक्वता की ओर संकेत करता है।
             यह भी कहा जा रहा है कि कई बड़ी मछलियों (नेता व अधिकारी) के नाम सामने न आ जायें, इसीलिए यह एनकाउंटर कर दिया गया. हमारे देश में राजनीतिक नेताओं व अपराधियों का गठजोड़ नई बात नहीं रह गयी है. लोग यह मानने लगे हैं कि  राजनेता अपने हित में कुछ भी कर सकते हैं। इस तरह की बढ़ती प्रवृत्ति हमारे लोकतंत्र व संवैधानिक व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है.
              एक दुर्भाग्यपूर्ण सत्य यह भी है कि हमारी न्याय की प्रक्रिया इतनी दोषपूर्ण व असहाय हो गयी है कि पुलिस थाने में राज्यमंत्री दर्जे के व्यक्ति की हत्या कर भी विकास दुबे जैसे दुर्दांत अपराधी के विरुद्ध कोई गवाही (  पुलिस कर्मी भी) नही देता और वह छूट जाता है. पर न्याय व्यवस्था की इस खामी को दूर करने की जगह एनकाउंटर जैसे उपायों  को सामाजिक स्वीकृत देना 'जंगल के न्याय' को ही स्वीकृति देना है, जो सभ्य शासन के लिये न केवल शर्मनाक है बल्कि अभिशाप भी है.
             हमेँ विचार करना होगा कि समाज की इस विकृति को कैसे दूर करें? वाहवाही के चक्कर में 'अपराधियों को ठोक दो' की नीति हमें बर्बरता की ओर ले जायेगी और कब इसके शिकार निर्दोष नागरिक व राजनीतिक विरोधी होनें लगें, कोई नहीं जानता.
             भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में कहा गया है: 
     “कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अलावा कोई भी व्यक्ति को उसके जीवित रहने के अधिकार और निजी स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता.”
 इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि किसी व्यक्ति को अपने जीवन से वंचित करने से पहले, राज्य को ' आपराधिक प्रक्रिया संहिता' के प्रावधानों के अनुसार उचित न्यायिक प्रक्रिया को अपनाना जरूरी है.
            अभियुक्त को पहले उसके खिलाफ आरोपों के बारे में सूचित करना चाहिए, फिर उसे स्वयं का बचाव करने का अवसर दिया जायेगा, वह अपना वकील कर सकता है. इस प्रक्रिया के बाद यदि वह दोषी पाया जाता है, तभी उसे अदालत मृत्युदंड दे सकती है। 
              यह पाया गया है कि  ‘एनकाउंटर’ अधिकतर  सही नहीं होते.   इनमें सभी कानूनी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर  तथाकथित  अपराधी  माार दिया जाता है। दुर्दांत अपराधियों के   विरुद्ध  कोई सबूत या गवाही नहीं  मिलती इसलिए  वे  छूट जाते हैं  और 
 आतंक फैलाते हैं अतः  उनसे निपटने का एकमात्र तरीका 'एनकाउंटर' ही है, एक खतरनाक व् असंवैधानिक सोच है और इसका घोर दुरुपयोग हो सकता है।
               सुप्रीम कोर्ट ने 'प्रकाश कदम बनाम रामप्रसाद विश्वनाथ गुप्ता (2011)'  मामले में  कहा कि पुलिस द्वारा किए गए फर्जी ‘एनकाउंटर’ सोची समझी हत्याओं के अलावा कुछ नहीं हैं और उन्हें करने वालों को ‘दुर्लभतम मामलों के दुर्लभतम’ ( rarest of rare) की श्रेणी में रख कर मौत की सजा दी जानी चाहिए। 
               जरूरत न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी बनाने की है जिसमें लोगों को त्वरित व निष्पक्ष न्याय मिल सके. ऐसे सामाजिक व राजनीतिक पर्यावरण के निर्माण की आवश्यकता है जिसमें सत्ता (पुलिस) - अपराधी गठजोड़ का पर्दाफ़ास हो. सत्ता से जुड़े एवं अन्य राजनीतिक नेता सार्वजनिक जीवन में उच्च व  साफ - सुथरी  छवि निर्मित करें.  यद्यपि वर्तमान सामाजिक व राजनीतिक परिवेश में यह दिवास्वप्न लगता है, फिर भी आशावादी रहना ही उचित होगा.
                 
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रविवार, जुलाई 19, 2020
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       हिन्दी के लोकप्रिय कवि,  सुमधुर गीतों के राजकुमार, फिल्म जगत में अपने गीतों से विशिष्ठ स्थान बनाने व धूम मचाने वाले ,कालजयी रचनाओं के सृजनकर्ता , कवि सम्मेलन के मंचो के अप्रतिम नायक श्री गोपाल दास 'नीरज' आज द्वितीय पुण्यतिथि है.

     प्रस्तुत हैं उनकी कुछ कालजयी रचनाओं के कुछ अंश जो जीवन के विविध रंगो का चित्रण करते हैं और एक दिशा देते हैं.

 "कफ़न बढ़ा तो किसलिये,
                            नजर तू डबडबा गयी,
  सिंगार क्यों सहम गया,
                             बहार क्यों लजा गयी,
  न जन्म कुछ,न मृत्यु कुछ,
                             बस बात सिर्फ इतनी है,
  किसी की आँख खुल गयी,
                              किसी को नींद आ गयी."
                      -------------
"फूल पर हँसकर अटक, तो शूल को रोकर झटक मत, 
ओ पथिक तुझ पर यहाँ, अधिकार सब का है  बराबर.''
                      ----------------
''आदमी को आदमी बनाने के लिए, 
                         जिन्दगी में प्यार की कहानी चाहिए,
 और कहने के लिए कहानी प्यार की, 
                         स्याही नहीं आँखों का  पानी चाहिए।''
                      ------------------
"जब  हृदय का एक आँसू, 
 नयन   सीपी में उतर  कर,
 वेदना   का   अश्रु   बनता, 
 एक   क्षण     पाषाण  भी 
 भगवान     बनता        है, 
 तब मधुरतम गान बनता है। "
                      -------------------
 ''जीवन जहाँ खत्म हो जाता !
  उठते-गिरते,
  जीवन-पथ पर
  चलते-चलते,
  पथिक पहुँच कर,
  इस जीवन के चौराहे पर,
  क्षणभर रुक कर,
  सूनी दृष्टि डाल सम्मुख 
  जब पीछे अपने नयन घुमाता !
  जीवन   वहाँ   ख़त्म हो जाता! "
                      --------------------
 ''कोई नहीं पराया, 
  मेरा तो आराध्य आदमी,
  देवालय हर द्वार है.
                मेरा दर्द नहीं है मेरा, 
                सबका हाहाकार है, 
                कोई नहीं पराया, 
                मेरा घर सारा संसार है।''
                        -------------

" चल रहा हूं मैं, इसी से  चल रहीं निर्जीव राहें, 
  राह पर चलती हमारे साथ ही मंजिल हमारी."  
                       ---------------
       "स्वप्न झरे  फूल से, मीत   चुभे शूल से, 
        लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से, 
        और हम  खड़े-खड़े   बहार   देखते रहे.
         कारवाँ   गुज़र   गया   गुबार देखते रहे."
                      -----------------
      " शोखियों में घोला जाये फूलों का शबाब, 
           उसमें फिर मिलाई जाये थोड़ी सी शराब, 
              होगा   जो   नशा   तैयार,  वह   प्यार  है."
                      ----------------
 " एक दिन   मैंने   कहा  यूँ  दीपv से, 
   तू   धरा   पर   सूर्य   का अवतार है, 
   किसलिए  फिर स्नेह  बिन  मेरे बता, 
    तू न कुछ, बस धूल-कण निस्सार है?
               लौ रही चुप, दीप ही बोला मगर
               बात  करना तक तुझे आता नहीं, 
               सत्य है सिर पर चढ़ा जब दर्प हो
               आँख   का परदा उधर पाता नहीं.
  मूढ़ ! खिलता फूल यदि निज गंध से
  मालियों  का  नाम फिर चलता कहाँ?
  मैं  स्वयं  ही  आग  से  जलता  अगर 
  ज्योति  का गौरव  तुझे  मिलता कहाँ ?"
                        ---------------
       ''सृजन  शान्ति  के  वास्ते  है ज़रूरी, 
        कि हर द्वार  पर  रोशनी  गीत  गाये, 
        तभी  मुक्ति  का vयज्ञ यह पूर्ण होगा, 
        कि जब  प्यार तलवार से जीत जाये।''

और अंत में एक कालजयी गीत की लाइनें

      "अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाये,
                  जिसमें इंसान  को  इंसान बनाया जाये."
       
               ऐसे महान साहित्यसेवी को शत् शत् नमन. 
                            🙏🙏🙏
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सोमवार, जून 29, 2020
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            भारत के दसवें प्रधान मंत्री एवं भारत में आर्थिक सुधारों के जनक श्री पी.वी. नरसिंह राव  की तक 99वीं  जयंती है. उनका जन्म 28 जून 1921 को आंध्र प्रदेश के करीमनगर में हुआ था. हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय, मुंबई विश्वविद्यालय एवं नागपुर विश्वविद्यालय में उन्होंने शिक्षा प्राप्त की. वे एक उदभट् विद्वान एवं कई  भाषाओं के ज्ञाता थे. भारतीय  दर्शन एवं संस्कृति, कथा साहित्य एवं राजनीतिक टिप्पणी लिखने, भाषाएँ सीखने, तेलुगू एवं हिंदी में कविताएं लिखने एवं साहित्य में उनकी विशेष रुचि थी। 
             श्री नरसिंहराव का राजनीति का सफर बड़ा ही महत्वपूर्ण रहा. वे आंध्र प्रदेश सरकार में 1962 से 64 तक कानून एवं सूचना मंत्री, 1964 से 67 तक कानून एवं विधि मंत्री, 1967 में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्री एवं 1968 से 1971 तक शिक्षा मंत्री रहे तथा 1971 से 73 तक आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे.
            1977 से 84 तक वे लोकसभा के सदस्य रहे और दिसंबर 1984 में रामटेक से आठवीं लोकसभा के लिए चुने गए।  उन्होंने  देश के विदेश मंत्री,   गृह मंत्री, रक्षा मंत्री एवं मानव संसाधन विकास मंत्री के रूप में कुशलतापूर्वक कार्य किया.
            विदेश मंत्री के अपने कार्यकाल में श्री राव ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के क्षेत्र में अपनी शैक्षिक पृष्ठभूमि एवं राजनीतिक तथा प्रशासनिक अनुभव का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया। उन्होंने जनवरी 1980 में नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन के तृतीय सम्मेलन की अध्यक्षता ,मार्च 1980 में न्यूयॉर्क में जी-77 की बैठक की भी अध्यक्षता की. फरवरी 1981 में गुट निरपेक्ष देशों के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में उनकी भूमिका अत्यंत प्रशंसनीय  थी। 
              वर्ष 1982 और 1983 भारत और इसकी विदेश नीति के लिए अति महत्त्वपूर्ण था। खाड़ी युद्ध के दौरान गुट निरपेक्ष आंदोलन का सातवाँ सम्मेलन भारत में हुआ जिसकी अध्यक्षता श्रीमती इंदिरा गांधी ने की। इसकी सफलता के मूल में श्री राव के अथक प्रयास थे. वे 'विशेष गुट निरपेक्ष मिशन' के भी नेता रहे जिसने फिलीस्तीनी मुक्ति आन्दोलन को सुलझाने के लिए नवंबर 1983 में पश्चिम एशियाई देशों का दौरा किया। विदेश मंत्री के रूप में उन्होंने यू.एस .ए., यू.एस.एस.आर, पाकिस्तान, बांग्लादेश, ईरान, वियतनाम, तंजानिया एवं गुयाना जैसे देशों के साथ हुए विभिन्न संयुक्त आयोगों की भारत की ओर से अध्यक्षता की
           जून, 1991 की बात है. कांग्रेस ने श्री राव के कांग्रेस अध्यक्ष रहते आम चुनाव में सबसे ज्यादा 244 सीटें जीती थीं.  श्री नरसिम्हा राव को कांग्रेस संसदीय दल के नेता चुना और उन्होंने कुशलता पूर्वक अगले पाँच वर्ष तक अल्पमतीय सरकार का नेतृत्व किया. उन्होंने दौ.मनमोहन सिंह वित्तमंत्री  बनाया जिनकी आर्थिक नीति से भारत में आर्थिक सुधारों एवं उदारीकरण का दौर शुरू हुआ.
           वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी जी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए अपने एक ट्वीट में नरसिम्हा राव को एक असाधारण विद्वान बताया और लिखा कि उन्होंने इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर देश को अपना नेतृत्व दिया."  पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने अपनी पुस्तक "1991- The year that changed India' में लिखा है, " श्री राव का भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अमूल्य योगदान रहा है और वे भारत रत्न के हकदार हैं."
              पूर्व प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी से श्री राव के गहरे संबंध रहे. कई अवसरों पर विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने दल के संसद की कार्यवाही से बहिष्कार कर श्री राव की अल्पमतीय सरकार को बचाया था.  श्री राव ने भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर देश के  कई प्रतिनिधिमंडलों को श्री बाजपेयी के नेतृत्व में भेजा था. जब श्री बाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते परमाणु विस्फोट किया गया तो उसमें श्री राव के योगदान को भी  अटल जी ने स्वीकार किया था.
              आज भी श्री राव को सम्मान के साथ याद किया जा रहा है.  यहाँ तक कि उनकी पार्टी काग्रेस, जिसने एक समय ( निधन पर भी)  उनकी घोर उपेक्षा की थी, आज उनके योगदान की चर्चा कर रही है. अक्टूबर, 2014 में  उस समय एन. डी.  ए. की सरकार में शामिल दल तेलुगू देशम पार्टी (TDP) ने एक प्रस्ताव पारित कर सरकार से मांग की थी कि नई दिल्ली में पीवी नरसिम्हा राव का समाधि स्थल बनाया जाए. इसके बाद  राष्ट्रीय राजधानी में श्री राव के नाम पर भी एक स्मृतिस्थल बन गया है.
               श्री राव के जन्म स्थल वारंगल (तेलंगाना) और आंध्र प्रदेश में राव के प्रति काफी सम्मान और सहानुभूति है. तेलंगाना की टीआरएस सरकार ने तो स्कूली पाठ्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री की जीवनी भी शामिल की थी और  उन्हें भारत रत्न देने की मांग भी कर चुकी है.
               तेलंगाना की वर्तमान टी.आर. एस. ने श्री राव के जन्मशती वर्ष पर अनेक कार्यक्रमों की घोषणा की है.
               ऐसे बहुमुखी प्रतिभासंपन्न राजनेता को जन्मतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि.
                          🙏🙏🙏
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मंगलवार, मई 12, 2020
हाइकु गंगा के तत्वावधान में हाइगा कार्यशाला संपन्न

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भारत ऋतुओं का देश है, जहां प्रकृति का वैविध्यपूर्ण सौंदर्य बिखरा पड़ा है। यही कारण है, कि फूलों का देश जापान को छोड़कर आने की दु: खद स्मृति हाइकु काव्य को कभी अक्रांत नहीं कर पाई। वह इस देश को भी  अपने घर की मानिंद महसूस करती रही। यही कारण है कि हिन्दी साहित्य जगत के समस्त हाइकु प्रेमी और हाइकु सेवी यही शुभेच्छा करते हैं कि हाइकु काव्य को प्रकृति के क्रीड़ांगन में खेलने -  फलने - फूलने का पूरा पूरा अवसर मिलता रहे। डॉ. मिथिलेश दीक्षित जी ने भारत में इस हाइकु काव्य को एक क्रांति की प्रस्तावना के रूप में देखा है और इस काव्य को एक अभियान के माध्यम से गति प्रदान की है। डॉ. मिथिलेश जी ने हाइकु गंगा पटल के माध्यम से नए व पुराने सृजन धर्मियों का एक ऐसा मंच तैयार किया है जो हिन्दी पट्टी में हाइकु काव्य हेतु एक वृहद वातावरण तैयार करने का काम कर रहा है, जो अपने आप में अविस्मरणीय है और स्तुत्य भी।
हाइकु का मूलाधार प्रकृति होने के कारण कुछ विद्वानों ने इसे "प्रकृति काव्य" कहा, किन्तु हाइकु में प्रकृति का पर्यवेक्षण उसके गतिमान रूप पर केंद्रित रहता है। हाइकु कवि जीवन की क्षण - भंगुरता को प्रकृति के गतिमान, निरंतर परिवर्तनशील रूप में देखता है।
हाइगा हाइकु का हीं एक अलग रूप है, जिसमें चित्र को केंद्र में रखकर हाइकु काव्य का सृजन किया जाता है। इस काव्य को सबसे ज्यादा प्रश्रय देने का महत्वपूर्ण कार्य किया है सरस्वती की परम साधिका डॉ. मिथिलेश दीक्षित जी ने। प्रकृति के प्रति अपना आंतरिक सहज लगाव प्रमाणित करते हुए उन्होंने हाईकु गंगा पटल पर हाइगा की कई कार्यशालाओं का आयोजन कर इस काव्य शैली को हिन्दी के पटल पर प्रतिष्ठापित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है, जो उनकी इस काव्य शैली के प्रति आकर्षण को दर्शाता है।  इस पटल से कई दिग्गज व नए सृजन धर्मी जुड़े हैं जो हाइकु जगत के परिदृश्य को बदल कर रखने की पूरी क्षमता रखते हैं। यही इस पटल की बड़ी विशेषता है।
दिनांक 10. 05. 2020 को सुबह आठ बजे हाइकु गंगा पटल पर धरती के सौंदर्य के विविध रूप और प्रकृति के अनुपम सौंदर्य की ऑन लाइन कव्यमय प्रस्तुति से पूरा वातावरण प्रकंपित हो गया। अर्थवान, गुण समृद्ध हाइगा कार्यशाला तृतीय की शुरुआत आकाशवाणी बरेली की निर्देशिका सुश्री मीनू खरे जी के उद्बोधन, सरस्वती वंदना और खूबसूरत हाइगा की बेहतरीन प्रस्तुति से हुई। सबसे सारगर्भित बात तो यह रही कि उनकी सरस्वती बंदना भी कतिपय हाइकु श्रृखंला की मोतियों से सुसज्जित थीं।
भारत एक ऐसा देश है, जहां प्रकृति के विविध रूपों की पूजा होती है। उगते हुए सूर्य के साथ डूबते हुए सूर्य की भी पूजा होती है। इसे छठ पूजा कहा जाता है यह भारत का सबसे बड़ा लोक पर्व भी है, जिसे रुपायित करते हुए मीनू खरे जी ने बहुत ही सारगर्भित हाइगा प्रस्तुत किया है, जैसे "सूर्य को अर्घ्य/आस्था के कलश की/अटूट धार"
डॉ. मधु चतुर्वेदी जी की पंक्तियां "ऊर्जा के तार/प्रकृति समन्वित/शक्ति संचार"  प्रकृति की उपयोगिता और शक्ति समन्वय का एक अनोखा अनुभव है। वहीं प्रकृति के अनिवर्चनीय सौंदर्य को रेखांकित करते हुए लवलेश दत्त जी*कहते हैं कि " यादों के गांव/खेत, नहर, बाग/ठंडी सी छांव।"
यह मेरी भी खुशकिस्मती थी कि इस  हाइगा कार्यशाला में प्रकृति पर आधारित कुछ हाइगा मुझे भी प्रस्तुत करने का सुअवसर प्राप्त हुआ, जिसके लिए मैं मंच की अध्यक्षा के प्रति अपनी कृतज्ञता अर्पित करता हूं।
निवेदिता श्री जी की पंक्तियां "बहती नदी/कल कल करती/बदली सदी" और पुष्पा सिंघी जी की पंक्तियां "बिखरी पांखे/सूखती महानदी/ भीगती आंखें" हाईगा के सुखद भविष्य के प्रति आश्वस्त करती है।
विष्णुकांता के ताजे फूलों की तरह, कुंद सी सुगंधित कुछ बेहतरीन पंक्तियां प्रस्तुत करने में सफल रहीं डॉ. सुरांगमा यादव जी की "विज्ञप्ति लेके/आया है पतझड़/ नई भर्ती की।" , सरस दरवारी जी की पंक्तियां "नन्हा दीपक/डूबते सूरज का/ संवल बने।", अंजु निगम जी की पंक्तियां " उगला धुआं/प्रदूषित है हवा/ मौत का कुआं।" और डॉ सुभाषिनी शर्मा जी की पंक्तियां  "धूप ने खोली/ कोहरे की गिरह/फैला उजाला ।" आदि।
ऐसी बात नहीं है, कि हाइकु या हाइगा की निंदा नहीं हो रही है या इसका विरोध नहीं हो रहा है। खूब हो रहा है। मेरे पास विरोध तथा भर्त्सना के बहुत सारे लिखित परिपत्र है। किन्तु विरोध से कोई सत्य कभी रुक नहीं जाता, बल्कि दुगुने वेग से आगे बढ़ता है। हाइकु या हाइगा का सत्य वैसे हीं एक ओजस्वी, तेजस्वी दुर्निवार वाग्धारा है। इसी वाग्धारा की एक कड़ी है सत्या सिंह जी  कीपंक्तियां "फूलों के झूले/मस्त पवन संग/आसमां छूले।"
इस पटल पर तीन ऐसे रचनाकारों का मैं विशेष रूप से उल्लेख करना चाहूंगा जिन्होंने अपने कुछ टटके हाइगा चित्रों से हाइकु जगत को श्री वृद्धि किया है। प्रकृति के प्रति अपना आंतरिक सहज लगाव प्रमाणित करते हुए मनोरम छवि चित्र उकेरे है। पहला नाम है कल्पना दुबे जी का जिनकी पंक्तियां "अमृत रस/झरते झर झर/शान्त निर्झर।", डॉ आनंद प्रकाश शाक्य जी का जिनकी पंक्तियां "वन संपदा/ जीवन मूल स्त्रोत/ हो संरक्षित" और इंदिरा किसलय जी जिनकी पंक्तियां "अहा जिंदगी/ चट्टानों से जूझती/ पहाड़ी नदी ।" मन मुग्ध कर गई।
इस पटल पर कुछ रचनाकार हाइकु काव्य की शालीनता व गरिमा बनाए रखने की दिशा में कृत संकल्प दिखे, जिनमें प्रमुखता के साथ  डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर' जी के  हाइगा को स्थान दिया जा सकता है। जैसे -"जब बचेंगे/जंगल जलाशय/ बचेंगे हम।" वस्तु एवं शिल्प दोनों दृष्टि से उनके हाइगा प्रस्तुत हुए। इस पटल पर पेंडों से छनकर आती धूप का स्पर्शविंब साफ दिखाई देता है, जो इस कार्यशाला की उपादेयता को प्रदर्शित करता है।
वर्षाअग्रवाल जी की पंक्तियां यहां विशेष रूप से उल्लिखित करना चाहूंगा, जिसमें उन्होंने अपनी पंक्तियों "मलिन नित्य/संजीवनी व्यक्ति/ मनुज कृत्य।" गहरे भाव छोड़ने में सफल रही।
इस अवसर पर डॉ. सुषमा सिंह जी और डॉ सुकेश शर्मा जी के हा इगा को भी काफी पसंद किया गया। डॉ सुषमा सिंह जी ने अपनी पंक्तियों में कहा कि  "नव कोंपले/ बुलाती पंछियों को/कलरव को"  तथा  डॉ सुकेश शर्मा जी अपनी पंक्तियों में कहा कि "वसुंधरा मां/देती शष्य संपदा/आशीष सम।" में प्रकृति के कोमल छवि को स्पर्श किया है।"
प्रकृति मानव की चिर सहचरी है जो ऋतुओं के द्वारा उसका पालन, अनुरंजन और प्रसाधन करती है। परस्पर एकनिष्ठ रहते हुए दोनों अपने अपने क्रिया - कलाप से एक - दूसरे को प्रभावित करते हैं। उनका यह भाव इस पटल पर परिलक्षित होना स्वाभाविक ही है, क्योंकि साहित्य समाज से पृथक नहीं। इस कार्यशाला में प्रकृति के अद्भुत रूप को आयामित किया गया है कार्यशाला की अध्यक्षा डॉ मिथिलेश दीक्षित जी के द्वारा, जिन्होंने अपनी पंक्तियों क्रमश: "तुलसी चौरा/जलाती दिया - बाती/ मां याद आती।" और "धूप बीनती/ मृदुल फूल पर/बिखरे मोती।" के माध्यम से प्रकृति के कोमल सौंदर्य को रेखांकित किया है।
कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है, कि यह कार्यशाला अपने आप में अनुपम व अद्वितीय है। कहा गया है, कि प्रकृति के दृश्य हाइगा की पहचान है और ये कुदरत के नजारों को देखने का झरोखा भी माना जाता है। ऐसे लगता है जैसे अम्बर, तारे, चांद, सूर्य, वृक्ष, फूल, टहनियां, घास, ओस की बूंदें, वर्षा तथा हवाओं ने इस पटल पर कोई जादू भरा राग छेड़ रखा हो। 
प्रस्तुति: रवीन्द्र प्रभात
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शुक्रवार, अगस्त 30, 2019
गुरुवार, अगस्त 29, 2019

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ANWER JAMAL ब्लोगोत्सव-2010 contemporaray hindi poetry लेख acharya sanjiv verma 'salil' geet navgeet Dabir News शिव jabalpur संस्‍कृतं- भारतस्‍य जीवनम् india प्रबल प्रताप सिंह hindi gazal कविता chhand muktika दुबे contemporary hindi poetry hindi chhand ईश्वर जीवन विज्ञान doha sharda कविताएँ नारी हिन्दी EJAZ AHMAD IDREESI LBA रूबरू hindi jangal madhya pradesh. muktak swatantrata divas कर्म महफूज़ अली माया राधा व्यंग्य सृष्टि 'Ayaz' 'कामसूत्र' 007 indian bond Dr.Aditya Kumar anugeet bharat chaupade. hindi chaupade. hindi chhnad de. kamal jauharee dogra devki nandan 'shant haiku gazal hindi sattire. nav varsh panee rang sarasvati shabd vandana अगीत अगीत महाकाव्य अरविन्द मिश्रा आतंक-परिवार आलेख एक्य ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ल़ा बोर्ड कवि काकोरी कांड कान्हा कृष्ण खुदा खेल गज़ल ग़ज़ल छंद चेतन जज्वात जहां ज्ञान डा सत्य दक्षिण भारत दिल से दीप धर्म धर्म-संस्कृति परिकल्पना पीस पार्टी प्रेम प्लीज़ बेटी ब्लागरमीट भक्ति मन मानव मिथिलेश दुबे यादें लखनऊ ब्लॉगर असोसिएशन का अध्यक्ष पद लारैब: हर बात हक़ बात शुभकामनाएं श्रद्धांजलि संस्कृति सत्य सुमन लोकसंघर्ष ' Association का नया अध्यक्ष ' 'Taj mahal' 'The blessings' 'The nature' 'The purification of human heart ' 'Valentine day' 'charchashalimanch के सदस्य बनें और समाज को बेहतर बनाएँ' 'ibadat puja' 'अनाथ बच्चे-बच्चियों की दिल से सहायता करना' 'इस्लाम एक प्राकृतिक व्यवस्था है' 'एलबीए 'एलबीए और हिन्दी की बेहतरी के लिए विदुषी महिला अध्यक्ष' 'औरत' 'कविता' 'कितने ही दर्शन तो ईश्वर का वजूद ही नहीं मानते' 'कीटनाशक' 'क्या ईश्वर भी कभी अनीश्वरवादी हो सकता है ?' 'गुस्सा एक टॉनिक' 'चर्चित ब्लॉगर' 'चौथी दुनिया' 'ज्ञान पाने कि रीत' 'ज्वलंत समस्याओं का निवारण' 'देवता और अवतार' 'देश की अखंडता की रक्षा करने वाले मुसलमान''देश की अखंडता की रक्षा करने वाले' 'देश के शिक्षण तंत्र' 'धरती पर स्वर्ग का साक्षात्कार' 'धर्म पर पाबंदी 'न्याय के गुण से युक्त राजा ' 'पंडित और शास्त्री' 'पसंदीदा ब्लॉगर-समूह' 'पाकिस्तान के ज्यादातर हिस्सों में पंजाबी भाषा बोली जाती है' 'भाई-बहनों' 'मनोरंजन' 'मुझे सवाल दीजिए मैं आपको जवाब दूंगा' 'मुन्नी बदनाम हुई' 'मुसलमानों का दमन' 'यादगार पोस्ट' 'रामायण की कहानी' 'वर्णवादी' 'विदेशी मुद्रा' 'वेश्यालयों के देश में' 'वफ़ादारी' 'शक है जिन्हें भी दोस्तो हक़ की ज़ात में माँ की नज़ीर ला न सके कायनात में' 'शांति के लिए वेद कुरआन' 'शिरडी' 'शीला की जवानी' 'समाज का सबसे बड़ा विनाशक कट्टरता' 'सय्यद मुहम्मद मासूम साहब को ब्लॉग जगत में एस. एम. मासूम के नाम से' 'सरवरे कायनात' 'हठयोगी शठ योगी महायोगी' 'हिंदी ब्लॉगिंग' 'हिजड़े और तवायफ़ें' 'हृदयरोगियों के लिए' 1098 2010 2011 3MUSLIMs 786 : दुबे Article in Print Media DUDHWA Distance Education Dr Zakir Naik ELEPHANT Frauds Ghanshyam Maurya Hazrat Ali (RA) Historical IIT Kanpur Iman Internet Kafir Kisan. bharat LBA की नई समस्यां LBA की नयी अध्यक्षा LBA के मार्ग-दर्शक नीति नियम LBA के हनुमान LBA परिवार Lucknow Lucknow Bloggers' Association Natural way Part Time Instructor Poetess Radio Rishi Sarva Siksha Abhiyan Shorthand Society Standup comedy Stenography TIGER. WILDLIFE. JUNGAL. Tips & Tricks WILDLIFE aag aankh aarati ajadee alankar alvida aman ka paigham amrit anchal anugeet chhand arab india relation arth asmyik hindi kavita atal biharee ayodhya balidan banee basant bhagat azad. bhajan bhasha bhav bimb bhojpuree bhojpuri doha bhoo bhopal book review bundelee chatushpadee chhatisgarhee chunautiyan chunav creation creatior daman dandkala chhand dard dard una ladakon ka desh dharm aur lekhan dhool dhuaan dil doha gazal dohe durmila chhand educational institute in india elegy emaan falak fasal galib ganesh datt sarasvat gantantra divas garal gas treagedy geeta chhand geetika ghalib gulf news haiku hamara dharm harish singh harsh hindee ke haiku hindi laghu katha hindi short story. kargil hindi shortstory hindi smriti geet hinsa aur ham http://sajiduser.blogspot.com/ http://www.sajiduser.blogspot.com/ imarat. india is great india. indian women and arabian shekh indipendence day jabalpur. jannah is man's destination jantantra jhulna chhand kabeer kaikeyee kamand chhand kamlinee kamroop chhand khalish khazana. kiran kriti charcha laghukatha lakhnaoo laloo laxmi lay lokneeti. loktantra lotus love manav mandir manhagaayee marhatha chhand maut meeran krishna megh mekal mirza ghalib narmada neta pakistan pita father's day prakriti prarthna pratibandh pratibha prem pyar quran and gayatri mantra rachna rachnakar radha rajneeti ram janm bhoomi ras sabab sada sakhee salgirah. sanjiv sansadji.com saraswati sat satyagrahee. sanjiv 'salil' shaheed shakeel badyoonee ship shiv shok geet shok samachar sincerity in intention sitasat siya soniya gandhi stuti sundar svasthya aur uchit ilaj svatantrata swaroopanand tadbeer talent. tam taqdeer the world is not enough tomorrow may be or not may be toofan tribhangi chhand ujala ummeed ved and quran ved mantra veenapanee vidyarthiji vivadit maamale aur ham vivek ranjan wildlife DUDHWA अ ध्यक्ष अंग्रेज़ी अंचरा अंतराग्नि अंतर्द्वंद्व अंतर्मंथन अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन अंतस अंधविश्वास अंशकालिक अनुदेशक अखंडता अगीतायन अग्ने अचेतन अठखेली अति सुखा अभिलाषा अतुकांत कविता अदा अदावत अनमन अनवर जमाल अनाहत नाद. अनैतिकता अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस अन्धविश्वास अन्न अन्ना हज़ारे अन्य कविताएँ अप:तत्व अपरा-शंभु संयोग अपराधीकरण अपशब्द अभिभावक अभेद बुद्धि अमोघ अस्त्र अरमां अर्धनारीश्वर अल्पना अल्लाह अवतार अशांति अशोभनीय - धन असार अहं आंसू आज आजादी आणविक परिवार आतंक की समस्या आतंक हैरान नज़रें आदत आदि-वाणी आदिशक्ति आभूषण आरक्षण आलिंगन आवश्यक सूचना आशनां आस्था आज़ाद शहीद दिवस इंडियन ब्लॉगर्स असोसिएशन इच्छा इच्छाएं इन्डली इन्डियन धारावाहिक इन्डिया गेट इमली ईषत इच्छा उ. प्र. राजनीति के ये घोटाले उक्ति उचित मार्ग उत्तर प्रदेश असोसिएसन उत्तर प्रदेश का सच उत्तर प्रदेश ब्लॉगर्स एसोसियेशन उदारीकरण उदासीनता उधार उपन्यासकार और पटकथा उमन्ग उर्दु ऋचाएं ऋषि ऋषि अनंग एक तत्व एतबार एश्वर्य एसे गीत ऐसी तान ओउम औरत क्या है कंगना कछारन कथा निराली | कन्घा कन्या भ्रूण-हत्या कब्र कर्नाटक कलम कलियुग के मोहन कलुष कवि लखनऊ कविता दुबे कागज़-कलम काफिया काम-सृष्टि कामनाएं कामिनि कारण कारण-ब्रह्म कारोबार कार्य कार्यशाला कालकांज काव्य गोष्ठेी कीर्तिदा कुंभ कुञ्ज गली कुरआन कौन क्यूं न हुआ क्रमिक विकास खुरचहा पति खुशबू खुशियों की थिरकन खुशी खेल-व्यवसाय खेळ खौफ गणतंत्र दिवस गरीबी ग़ज़ल अंदाज़े-बयाँ गाँव की गोरी गांव की समस्या; 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आप सभी को हर्ष और बधाई के साथ यह सूचना देना चाहता हूँ कि LBA अपनी सफलता के उस मुक़ाम तक आ चुका है कि इसकी सदस्यता संख्या अपने चरण तक पहुँच चुकी है और जो ब्लॉगर्स बन्धु इससे जुड़ने की इच्छा रख रहे हैं और जिनके मेल मुझे मिल रहे हैं उसको मद्देनज़र रखते हुए नयी सदस्यता के इच्छुक ब्लॉगर्स को एक और भी शक्तिशाली और नया मंच का गठन आज किया जा रहा है जिसका नाम है 'ऑल इंडिया ब्लॉगर्स असोसिएशन' अर्थात AIBA ! इस मंच का हिस्सा सभी भारतीय बन सकते है, फ़िर चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में रह रहें हों !!!
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