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सोमवार, अक्तूबर 02, 2017
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      आज राष्ट्रपिता महात्मा गॉधी की जयंती है.स्वाधीनता आंदोलन में गॉधी जी का एक युग रहा है.उन्होंने अंग्रेजों की दमनकारी नीति का मुकाबला सत्य,अहिंसा, नैतिकता व आत्मबल पर आधारित 'सत्याग्रह आंदोलन' के माध्यम से किया और ब्रिटिश सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर किया.
          उन्होंने भारतीय जनता के मनोविग्यान को समझा था,जो किसी भी प्रकार की हिंसा व उग्रता को नापसंद करती थी,सामंजस्य ,भाईचारे व वसुधैव कुटुंबकम् में आस्था रखती थी और जिसे न समझ पाने के कारण भारत के क्रांतिकारी आंदोलन आम लोगों का समर्थन न पा पाने के कारण असफल हो गये और स्वाधीनता के अनेक नायकों को फॉसी पर चढ़ना पड़ा.
            गॉंधी जी ने राजनीति में नैतिकता के मानदंडों का समावेश किया यथा- सत्य,अहिंसा,साधनों की पवित्रता,कथनी-करनी में अभेद,सर्व-धर्म-समभाव. उन्होने 'Example is better than precept'की उक्ति का अनुसरण कर इन सिद्धांतों को जीवन में उतारा था जिसके कारण वे आम जनता को आकर्षित करने में एवं उसे सत्याग्रह आंदोलन से जोड़ने में सफल हुये.गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर ने उन्हें 'महात्मा' कहा और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने उन्हें 'राष्ट्रपिता' कह कर संबोधित किया. पश्चिमी देशों के लिये गॉधी जी की शैली एक करिश्मे से कम न थी. उनकी सत्याग्रह की पद्धति का बाद में अनेक देशों के स्वाधीनता आंदोलन में प्रयोग हुआ.
            गॉधीजी भारत के विभाजन के विरोधी थे.मौलाना आजाद भी इसी मत के थे. पर नेहरू व पटेल जैसे नेताओं ने विभाजन को स्वीकार कर लिया जिसका परिणाम आज भी भारत भोग रहा है. जब सारा देश स्वतंत्रता प्राप्ति का जश्न मना रहा था,गॉधी जी नोआखाली में सांप्रदायिक सदभाव स्थापित करने में जुटे थे.उन्होने आमरण अनशन भी शुरू किया जिसका व्यापक प्रभाव पड़ा.
            30 जून 1948 को नाथूराम गोडसे ने गॉधी जी की हत्या कर दी और एक युग का अंत हुआ.उस समय पाकिस्तान रेडियो ने यह मर्सिया पढ़ा-
  "ऐ कौम! न छूटेगा ,दामन से तेरे यह दाग ,
      गुल तूने अपने हाथ से, अपना किया चिराग,
         गॉधी को मार कर ,तूने तो तोड़ा है वह फूल,
            तरसेगा. लहलहाने को एशिया  का बाग."
        
             देश के आज के राजनीतिक परिवेश में गॉधी जी केवल उपयोग की वस्तु रह गये हैं. उनके सिद्धांतों को तिलांजलि देकर उनके नाम को भुनाया जा रहा है. कांग्रेस ने भी यही किया और वर्तमान सरकार भी यही कर रही है.सरकार उनका नाम जप रही है और उसके समर्थकों का एक वर्ग उनकी निंदा व चरित्र हनन में लगा है.यह स्थिति निंदनीय है.  गॉंधी देश का गौरव हैं और रहेंगे.

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शनिवार, सितंबर 30, 2017
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    आज बुन्देलखंड ( हमीरपुर निवासी  ) के  सुमधुर गीतकार  श्री ग़णेश प्रसाद खरे ' मंजुल मयंक' का जन्मदिवस एवम पुण्यतिथि दोनों है.मयंक जी  एक सीधे,सरल इंसान व हिंदी साहित्य के उदभट विद्वान व राष्ट्रीय स्तर के कवि रहे हैं.वे सुप्रसिद्ध कवि श्री गोपाल दास 'नीरज' के साथी रहे हैं बुंदेलखंड की इस महान विभूति को शत शत नमन.
     मेरे अग्रज स्व. आदर्श 'प्रहरी ' ने मयंक जी को निम्नांकित पंक्तियों में श्रद्धांजलि दी थी-
   "गीत में जो दर्द गाते हैं,
                                 उन्हें मेरा नमन है,
     दर्द नें जो मुस्कुराते है,
                                  उन्हें मेरा नमन है,
     जो व्यथाओं में कथाओं की ,
                                नई नित सृष्टि करते,
      मान्यताओं को बनाते हैं,
                                  उन्हें. मेरा नमन है."
   
           ऐसे युग कवि को मेरा शत शत नमन
                   
प्रस्तुत है 'मयंक 'जी का एक बेहद लोकप्रिय गीत-

       "रात ढलने लगी चॉद बुझने लगा"
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  "रात ढलने लगी, चाँद बुझने लगा,
   तुम न आए, सितारों को नींद आ गई ।

धूप की पालकी पर, किरण की दुल्हन,
आ के उतरी, खिला हर सुमन, हर चमन,
देखो बजती हैं भौरों की शहनाइयाँ,
हर गली, दौड़ कर, न्योत आया पवन,

     बस तड़पते रहे, सेज के ही सुमन,
     तुम न आए बहारों को नीद आ गई ।

व्यर्थ बहती रही, आँसुओं की नदी,
प्राण आए न तुम, नेह की नाव में,
खोजते-खोजते तुमको लहरें थकीं,
अब तो छाले पड़े, लहर के पाँव में,

      करवटें ही बदलती, नदी रह गई,
      तुम न आए किनारों को नींद आ गई ।

रात आई, महावर रचे साँझ की,
भर रहा माँग, सिन्दूर सूरज लिए,
दिन हँसा, चूडियाँ लेती अँगडाइयाँ,
छू के आँचल, बुझे आँगनों के दिये,

        बिन तुम्हारे बुझा, आस का हर दिया,
        तुम न आए सहारों को नीद आ गई ।"

👣🙌🏻🙏

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मंगलवार, सितंबर 26, 2017
आईआईटी कानपुर का वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव 26 अक्तूबर से

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अंतराग्नि आईआईटी कानपुर का वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव है। यह अपने प्रकार के कार्यक्रमों में संपूर्ण एशिया में सबसे उत्कृष्ट महोत्सवों की श्रेणी में आता है। अंतराग्नि ने विगत वर्षों में अपनी एक अलग पहचान कायम की है, और अपने 52 वें संस्करण में, इसकी भव्यता पहले से कहीं अधिक बड़ी और बेहतर होने जा रही है। सर्वाधिक उत्सुकता उत्पन्न करने वाले इस महोत्सव का विशाल स्तर पर आयोजन सभी में जोश और उत्साह के संचार का स्रोत है। हर वर्ष अंतराग्नि में 300 से अधिक महाविद्यालयों से लगभग 20000 प्रतिभागी शामिल होते है, जो अपने आप में इस महोत्सव की भव्यता को दर्शाता है। इस बार अंतराग्नि17 का आयोजन 26 से 29 अक्तूबर तक आई आई टी कानपुर में संपन्न होगा।
यदि आप डांस, सिंगिंग, ड्रामा, मॉडलिंग, फोटोग्राफी, क्विज आदि में रूचि रखते हैं, तो आईआईटी कानपुर में होने वाला "अंतराग्नि 2017" महोत्सव आपके लिए एक सुनहरा अवसर है। 26 से 29 अक्तूबर तक चलाने वाले इस महोत्सव में कुल 14 प्रतियोगिताएं होंगी और कुल 28 लाख के नगद इनाम प्रदान किए जाएँगे। इसमें किसी भी डिग्री कॉलेज के छत्र हिस्सा ले सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू है और इसकी अंतिम तिथि 2 अक्तूबर निर्धारित है, जो अंतराग्नि के आधिकारिक वेबसाईट www.antaragni.in  पर किए जा सकते हैं। 
जैसा कि प्रत्येक वर्ष होने वाले इस महोत्सव में देश दुनिया के हजारों छात्र-छात्राएं हिस्सा लेते हैं। वोलीवूड और अंतर्राष्ट्रीय कलाकार इसमें हिस्सा लेते हैं। यह अपने आप में अत्यंत अनूठा एवेंट्स है। डांस, सिंगिंग, ड्रामा, मॉडलिंग, फोटोग्राफी, क्विज, फाइन आर्ट्स, ड्रामाटिक्स, फिल्म एवं फोटोग्राफी आदि के अलावा इस एवेंट्स में इंगलिश और हिन्दी लिट्रेचर को भी प्रतियोगिता में शामिल किया गया है। इंगलिश लिट्रेचर के अंतर्गत पोएटरी स्लेम, जैम, क्रिएटिव राइटिंग, वर्ल्ड गेम्स और पार्लियामेंट्री डिबेटस होगी जबकि हिन्दी साहित्य के अंतर्गत किरदार, काव्यांजलि, दृष्टिकोण, आमने-सामने और शब्द रंग जैसी प्रतियोगिताएं होंगी। इन प्रतियोगिताओं के अंतर्गत डांस पर कुल पाँच लाख रूपये, म्यूजिकल पर ढाई लाख, क्विज पर एक लाख, फाइन आर्ट्स पर एक लाख, ड्रामाटिक्स पर तीन लाख, फिल्म और फोटोग्राफी पर ढाई लाख तथा इंगलिश लिट्रेचर और हिन्दी साहित्य पर डेढ़-डेढ़ लाख के इनाम वितरित किए जाएँगे।
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सोमवार, सितंबर 25, 2017
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      हम भारतीय 'लोकतंत्र' को अब तक सही अर्थों में आत्मसात नहीं कर सके  हैं. हम सदियों से राजतंत्रीय व्यवस्था के आदी रहे हैं और शासक में देवत्व व उसे नायक के रूप में देखने की हमारी आदत रही है. लोकतन्त्र हमारे मनोविग्यान के अनुकूल नहीं हैं. जिससे हम खुश होते हैं उसके भक्त हो जाते हैं और उसके खिलाफ़ एक शब्द भी नहीं सुनते और जब नाराज हो जाते हैं तो उसी hero को zero बनाने में देर नहीं लगती. इंदिरा गांधी,राजीव गॉधी और विश्वनाथ प्रसाद सिंह ने जनता के इन दोनों रूपो को झेला था.
      लोकतंत्र केवल चुनाव में वोट डालना ,चुनाव लड़ना व चुनाव मे जीत कर सरकार बनाना ही नहीं  है.लोकतंत्र में आलोचना पर ध्यान देकर सरकार को अपनी कमियों को दूर करने का अवसर मिलता है.सतत् जागरूकता ही लोकतंत्र की कुंजी है. इसके लिये विवेकपूर्ण जनमत का निर्माण होना अत्यन्त आवश्यक है.
      आज भारत की विश्व में जो स्वीकार्यता है वह केवल मोदी जी के तीन वर्ष के शासनकाल में नहीं बनी है.कांग्रेस के लंबे शासन का और अटल जी के कार्यकाल का भी इसम महत्वपूर्ण योगदान है.सुषमा स्वराज जी ने हाल ही में UNO में अपने भाषण में बड़ी ईमानदारी से इसे स्वीकार किया भी है.
     लोकतंत्र एक स्वयंसुधारक व्यवस्था है .UK, जिसे लोकतंत्र का घर कहा जाता है, में सरकार भी संप्रभु (crown )की कहलाती है ,और विरोधी दल ( shadow cabinet) भी crown का.
    आलोचना व विरोध सरकार को अपनी कमियों में सुधार का अवसर प्रदान करता है और कभी- कभी जनमत की इच्छा को भी अभिव्यक्त करता है जिसके सामने सरकार को नतमस्तक होना पड़ता है.प्रसिद्ध राजनीतिक विचारक गिलक्राइस्ट( Gilchrist) का कथन याद आ रहा है ,
     "प्रत्येक वैधानिक संप्रभु के पीछे एक राजनैतिक संप्रभु होता है, जिसके सम्मुख वैधानिक संप्रभु को नतमस्तक होना पड़ता है ."
     इस राजनैतिक संप्रभु में विरोधी दल, दबाव समूह, हित समूह, trade unions, व्यापारिक समूह आते हैं.
       विपक्ष तो आलोचना करता ही है. मनमोहन सिंह की सरकार के समय आधारकार्ड की अनिवार्यता, GST पर विरोध व संसद की कार्यवाही ठप्प करने का काम विरोधी दल भाजपा ने जिस प्रभावी ढंग से किया, वर्तमान विरोधी पक्ष तो उसका दशांश भी नहीं कर पाया. इन्हीं मोदी जी ने जी.  एस. टी. व आधार कार्ड का मुखर विरोध किया था जिसके वीडियो भी सोशल मीडिया पर दिखाई दिये हैं.
     सरकार में आने पर जिम्मेदारी बढ़ती है. राष्ट्रीय हित के हिसाब से नीतियॉ बनानी पड़ती है.नीतियों की आलोचना को भी सहन करना पड़ता है.
     आज आम लोग महसूस कर रहे हैं कि शासन की नीतियॉ बडे व्यापारिक घराने के हित में अधिक हैं ,छोटे व्यापारियों,व आम लोगों के हित में कम . यदि लोग कार्टून व व्यंग्य के माध्यम से अपने आक्रोश की अभिव्यक्ति करते हैं,तो उसको खेल भावना से लेना चाहिये. आखिर आर. के.लक्ष्मण व बाल ठाकरे एक कार्टूनिस्ट के तौर पर ही तो लोकप्रिय रहे थे जिन्होने अपने समकालीन सभी राजनेताओं पर कार्टून बनाये थे और कोई भी बुरा नहीं मानता था.
     आज मोदी जी के ऊपर जरा सी भी व्यंग्य उनके समर्थकों को सहन नहीं हो रहा है.एक कार्यक्रम में मेरे एक वरिष्ठ ने कहा कि प्रधानमंत्री सारे देश का होता है अत: उसकी आलोचना नहीं होनी चाहिये. वे यह भूल गये कि पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह को विरोधीदलों ने क्या नहीं कहा, जबकि जिन घोटालों पर कांग्रेस को बदनामी मिली वे मनमोहन सिंह के काल में ही उजागर हुये थे और उनसे संबंधित लोगों पर कार्यवाही भी शुरू हो गयी थी. जब भारत में मोदी जी का राजतिलक हो रहा था उसी के आस-पास जापान में मनमोहन सिंह को विश्व का Best Primeminister of  the  World का सम्मान दिया जा रहा था.
       मेरे  कहने का तात्पर्य यह है कि यह देश के प्रधानमंत्री का कर्तव्य है कि वह देश हित में काम करे. मोदी जी भी वही कर रहे हैं जो देश के पूर्व प्रधान मन्त्रियो ने किया. कई पूर्व प्रधान मन्त्री गठबंधन सरकार चला रहे थे जिसकी अपनी मजबूरियॉ या दबाव थे.पर जब कभी किसी प्रधानमंत्री को पूर्ण बहुमत मिला, उसकी कार्य प्रणाली अलग दिखी.  यह बात इन्दिरा जी, अटल  जी और मोदी जी की कार्य प्रणाली में  दिखाई दी. 
       मोदी जी देश के ऐसे प्रधानमंत्री बने जिन्होने विश्व के अधिकांश देशों का दौरा किया और उन्हें भारत से जोडा. भारत के व्यापारिक हितो का संवर्धन हुआ. भारत की सुरक्षा को सुदृढ़ करने व सामरिक शक्ति बढ़ाने के प्रयास जारी हैं.
      पर यहॉ मै एक बात महसूस कर रहा हूँ कि सबको ,विशेषकर अमेरिका को , साधने की कोशिश में हमने रूस जैसा मित्र खो दिया.
     1971में पाकिस्तान युद्ध के समय अमेरिकी सॉतवें बेड़े की धमकी के जबाब में पूर्व सोवियत संघ ने भारत के समर्थन में युद्ध में कूदने की धमकी देकर अमेरिका को चेतावनी दी थी और अमेरिका को चुप होना पड़ा था .क्या आज चीन के आक्रमण करने की स्थिति में इस हद तक साथ देने वाला कोई विश्वसनीय मित्र आज हमारे पास है?
      मित्रो! आज हमारे सामने आंतरिक व बाह्य  अनेक चुनौतियॉ हैं. हमारा दायित्व यही होना चाहिये कि हम अंध समर्थन व अंध विरोध से मुक्त होकर देशहित में सकारात्मक दृष्टिकोण अपना कर निष्प होकर सही बात कहे , सही बात का समर्थन करें तथा नकारात्मक व गलत बातों का विरोध करें. तभी हम विवेकशील जनमत के निर्माण में अपना योगदान दे सकते हैं. सोशल मीडिया इसके लिये एक महत्वपूर्ण माध्यम सिद्ध हो सकता है.

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सोमवार, सितंबर 18, 2017
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      कल 17 सितंबर 2017 का दिन देशवासियों के लिए कई अच्छी खबरें लेकर आया. गुजरात में सरदार सरोवर बॉध को प्रधानमंत्री जी ने देश को समर्पित किया.वहीं खेल जगत में भारतीय क्रिकेट टीम ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ लगभग हारा हुआ पहला वन डे शुरूआती बल्लेबाजों के पू्र्ण धराशायी होने के बाद भी धोनी व पांड्या की सूझबूझ भरी बल्लेबाजी के कारण जीत लिया.
       परंतु सबसे महत्वपूर्ण खबर ,जिसे मीडिया चैनल्स में सबसे कम स्थान मिला, पिछले ओलंपिक की रजत पदक विजेती पी.वी.सिंधू का कोरिया ओपन सुपर सीरीज बैडमिंटन टूर्नामेंट में महिला एकल में विश्व बैडमिंटन चैंपियन जापान की नोजोमी ओकुहारा को हरा कर  इस खिताब को जीतना था. विश्व चैंपियन फायनल में वे इसी खिलाड़ी से हार गयी थीं. सियोल में हुये इस आयोजन में उन्होंने अपना बदला चुका कर इतिहास रचा.
           सिंधू अब तक तीन सुपर सीरीज खिताब जीत चुकीं हैं जिनमें से दो खिताब इसी वर्ष जीते हैं.   प्रत्येक भारतवासी को सिंधू की उपलब्धि पर नाज होना चाहिये. वे देश का गौरव हैं

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सोमवार, सितंबर 04, 2017
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       प्रधानमंत्री जी ने सारे राजनीतिक पूर्वानुमानों को ध्वस्त करते हुये सुश्री निर्मला सीतारमण को देश का रक्षा मंत्री  बना दिया. वे  देश की पहली पूर्णकालिक महिला  रक्षा मंत्री हैं .इससे पहले स्व. इन्दिरा गान्धी कुछ समय रक्षा मंत्री रही थीं.
       निर्मला जी भारत के कई राज्यों का प्रतिनिधित्व करती हैं. इनका जन्म तमिलनाडू में हुआ.  वे केरल से स्नातक हैं. इनकी ससुराल आंध्र में है  और संसद में वे कर्नाटक दे राज्य सभा की सदस्य  हैं .जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय ,नई दिल्ली  में  भी  उन्होने शिक्षा ग्रहण की.
       नितिन गडकरी जब भाजपा के अध्यक्ष थे, तब पहली बार उन्हें भाजपा का प्रवक्ता बनाया गया. जिसका उन्होने बखूबी निर्वाह किया. उसके बाद उन्होने पीछे मुड़ कर नहीं देखा. मोदी जी के मंत्रिमंडल  में वे कैबिनेट मन्त्री बनी. उनकी क्षमता व कुशलता के कारण  मंत्रिमंडल के हाल के फ़ेरबदल में  उन्हें  रक्षा मंत्री जैसा महत्वपूर्ण पद दिया गया. उन्हें ढेरों शुभकामनाये.
       इसे महिला सशक्तीकरण की दिशा में भी  एक बडे कदम के रूप में भी देखा जा सकता है. महिलायें अब पुरुषों के काम करने लगी हैं.भले ही मोदी जी की अपनी पत्नी को साथ न रखने पर आलोचना होती हो पर इस देश की सरकार में विदेशमंत्री व रक्षा मंत्री महिलायें हैं.और गृहमंत्री पुरूष.यह मोदी जी के मंत्रिमंडल की विलक्षण विशेषता दृष्टिगोचर हो रही है.

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शनिवार, अगस्त 26, 2017
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            भारत में तथाकथित बाबाओं की काली करतूतों की श्रृंखला  में बाबा 'रामरहीम' का नाम आज सबसे ऊपर है . वोटों के लालच में राजनेताओं का इन बाबाओं से प्रेम जग जाहिर हो चुका है.  पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी उनके भक्तों को एकत्र होने देना और जैसी कि आशंका थी, कोर्ट के फैसले के बाद हिंसा होना ,सरकार की नाकामी का सूचक है. हाईकोर्ट ने पुन: सरकार को फटकार लगाते हुये कहा कि उसने राजनीतिक लाभ की दृष्टि से हिंसा होने दी.
           अब रामरहीम जेल में हैं. कोर्ट ने सरकार को उनकी संपत्ति जब्त करने व उससे हिंसा में हुये नुकसान की भरपायी करने का आदेश दिया है.
हद तो यह है कि कुछ महाराज टाइप के सांसद इन बाबा के मामले में न्यायपालिका को कोस रहे हैं. उनका कहना है कि न्यायपालिका को निर्णय देते समय जनभावनाओं का ध्यान रखना चाहिये .यह सांसद भाजपा के हैं और विवादास्पद बयान देने में माहिर हैं. बयान देते समय वे यह भी भूल गये कि इस प्रकरण की सी.बी.आई. जॉच का आदेश उनकी पार्टी के इतिहास पुरुष पूर्व प्रधानमंत्री श्रीअटल बिहारी बाजपेयी ने ही दिये थे.
            सच तो यह है कि न्यायपालिका ही इस देश के संविधान को बचाये हुये है,वरना राजनेता तो वोटों के लालच में देश का बंटाधार ही कर दें.   
            लोकप्रिय कवि प्रदीप ने छह दशक पहले  अपने गीत 'कितना बदल गया इंसान ' गीत में निम्नांकित पंक्तियॉ लिखी थीं वे आज उस समय से अधिक प्रासंगिक सिद्ध हो रहीं हैं.

"राम के भक्त रहीम के बंदे,
               रचते आज फ़रेब के फंदे.
कितने ये मक्कार ये अंधे,
                 .देख लिये इनके भी धंधे.
इन्हीं की काली करतूतों से
                        बना ये मुल्क मशान.
                कितना बदल गया इंसान।"

                          --डा.आदित्य कुमार

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मंगलवार, अगस्त 22, 2017
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       आज 22अगस्त 2017 का दिन भारत में मुस्लिम महिलाओ के लिये ऐतिहासिक दिन बन गया, जब सर्वोच्च न्यायालय की 5सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने सायरा बानो जी की याचिका पर बहुमत से निर्णय देते हुए तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया. भारत तीन तलाक पर रोक लगाने वाला २३वॉ देश बना.पडोसी देश पाकिस्तान व बॉगला देश में पहले से इस पर रोक है.
        इस निर्णय में तीन न्यायाधीशों जस्टिस रोहिंगटन ,जस्टिस कुरियन, जस्टिस ललित ने तीन तलाक को असंवैधाानिक बताया और दो न्याया़धीशों चीफ जस्टिस खैहर व जस्टिस नजीर ने इस पर कानून बनाने की बात कही.संवैधानिक पीठ में बहुमत का निर्णय ही अंतिम निर्णय माना जाता है.
         यह निर्णय धर्म के नाम पर मुस्लिम महिलाओं के शोषण को रोकने में मील के पत्थर की तरह है. सारे देश में विशेषकर मुस्लिम महिलाओं के द्वारा इस निर्णय का तहेदिल से स्वागत किया जा रहा है. यह एक मानवीय व ऐतिहासिक निर्णय है.

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शनिवार, अगस्त 19, 2017
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       आज सुबह जैसे ही मैने फ़ेसबुक पर नज़र डाली तो उरई IPTA के सचिव राज पप्पन की पोस्ट पर नज़र गयी जिसमे उन्होंने आज फ़ोटोग्राफ़र दिवस पर सभी फ़ोटोग्राफ़र भाइयों को बधाई दी थी.
        इस पोस्ट को पढ़ कर मेरा मन अपने नगर उरई के अतीत में चला गया.इस वर्ष ही मैने अपनी सेवा से अवकाश प्राप्त किया है. बचपन में आज से लगभग पचपन वर्ष पूर्व उरई के अतीत की स्मृतियॉ मानस-पटल पर आने लगीं , जब  नगर में यहाँ के माहिल तालाब के सामने दो  ही फ़ोटो स्टूडियों ही थे. पहला 'रमेश फ़ोटो स्टूडियो ' जो फ़ोटोग्राफ़र श्री रमेश चन्द्र सक्सेना का  था .वे अपने चाचा श्री गुट्टू सक्सेना व भाई श्री अवधेश चन्द्र सक्सेना के साथ बैठते थे. 
          दूसरा फ़ोटो स्टूडियो 'फ़ोकस फ़ोटो स्टूडियो 'फ़ोटोग्राफ़र श्री गान्धी राम गुप्त का था जो आज भी है.
          गॉधी राम जी हास्य व  व्यंग्य के समर्थ कवि थे. पहले उनका मूल नाम 'नाथू राम गुप्त ' था. पर जब १९४८ में नाथू राम गोडसे ने गॉधी जी की हत्या कर दी तो वे अपना नाम 'गॉधी राम ' लिखने लगे.
           फ़ोकस जी का व्यक्तित्व बडा प्रभावशाली था. गेरुआ वस्त्र व डाढी में वे एक साधु लगते थे.वे स्वयं योगासन में विश्वास करते थे और प्रसार भी.कई लोगों को योगासन सिखा कर उन्होंने उन्हें स्वास्थ्य लाभ कराया था.वे वाकई एक संत थे एवम् अत्यन्त सरल व नेक व्यक्ति  थे.
           वे अत्यन्त विनोदी स्वभाव के थे. वे हास्य एवं व्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर थे. होली के पर्व पर ऐतिहासिक माहिल तालाब के किनारे  'मूर्ख दिवस'  मनाने की शुरुआत उन्होने ही की थी. यह परम्परा आज भी कायम है.
          उनकी दूकान पर जाते ही विनोदी वातावरण महसूस होने लगता था. सरल शब्दों में गंभीर बात कहना उनकी विशेषता थी.अपनी दूकान के सामने उन्होने अपनी चार पंक्तियॉ लिखा रखी थीं -
    "तन,  लडकपन औ जवानी,
                     सब    धरा  रह जायेगा.
      यादगारी के लिये,
                     फोटो .फकत रह जायेगा."
         
            उनकी दूकान पर लिखी चार पंक्तियॉ भी याद आतीं हैं-
        " जैसी    फोटो ,वैसे  दाम,
                       फोटोग्राफर    गॉधीराम."

           मेरे पिता श्री के.डी.सक्सेना एवं अग्रज आदर्श कुमार 'प्रहरी' भी कवि थे.फोकस जी अक्सर उनसे मिलने घर पर आते थे. मैने उनके मुख से उनकी कुछ कवितायें सुनी हैं.
            उनके दो गीत बडे  प्रसिद्ध रहे हैं--

"यदि हम सबने अपना -अपना
                                 धर्म ,न छोडा होता,
'पुष्पक विमान की जगह,
                       आज क्यों तॉगा,घोडा होता"

(उस समय तॉगे व घोडे ही उरई में चलते थे )
                ---------------------
        
          " हे! गुम्मा    तेरा  यश  महान"

             आज फ़ोटोग्राफ़र दिवस  पर  जनपद के  इस  महान  व्यंग्यकार को शत् शत् नमन.

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Suman सलीम ख़ान acharya sanjiv 'salil' 'DR. ANWER JAMAL' samyik hindi kavita रवीन्द्र प्रभात DR. ANWER JAMAL ब्लोगोत्सव-2010 contemporaray hindi poetry लेख acharya sanjiv verma 'salil' geet navgeet Dabir News शिव jabalpur संस्‍कृतं- भारतस्‍य जीवनम् india प्रबल प्रताप सिंह hindi gazal कविता chhand muktika दुबे contemporary hindi poetry hindi chhand ईश्वर जीवन विज्ञान doha sharda कविताएँ नारी हिन्दी EJAZ AHMAD IDREESI LBA रूबरू hindi jangal madhya pradesh. muktak swatantrata divas कर्म महफूज़ अली माया राधा व्यंग्य सृष्टि 'Ayaz' 'कामसूत्र' 007 indian bond Dr.Aditya Kumar anugeet bharat chaupade. hindi chaupade. hindi chhnad de. kamal jauharee dogra devki nandan 'shant haiku gazal hindi sattire. nav varsh panee rang sarasvati shabd vandana अगीत अगीत महाकाव्य अरविन्द मिश्रा आतंक-परिवार आलेख एक्य ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ल़ा बोर्ड कवि काकोरी कांड कान्हा कृष्ण खुदा खेल गज़ल ग़ज़ल छंद चेतन जज्वात जहां ज्ञान डा सत्य दक्षिण भारत दिल से दीप धर्म धर्म-संस्कृति पीस पार्टी प्रेम प्लीज़ बेटी ब्लागरमीट भक्ति मन मानव मिथिलेश दुबे यादें लखनऊ ब्लॉगर असोसिएशन का अध्यक्ष पद लारैब: हर बात हक़ बात शुभकामनाएं श्रद्धांजलि संस्कृति सत्य सुमन लोकसंघर्ष ' Association का नया अध्यक्ष ' 'Taj mahal' 'The blessings' 'The nature' 'The purification of human heart ' 'Valentine day' 'charchashalimanch के सदस्य बनें और समाज को बेहतर बनाएँ' 'ibadat puja' 'अनाथ बच्चे-बच्चियों की दिल से सहायता करना' 'इस्लाम एक प्राकृतिक व्यवस्था है' 'एलबीए 'एलबीए और हिन्दी की बेहतरी के लिए विदुषी महिला अध्यक्ष' 'औरत' 'कविता' 'कितने ही दर्शन तो ईश्वर का वजूद ही नहीं मानते' 'कीटनाशक' 'क्या ईश्वर भी कभी अनीश्वरवादी हो सकता है ?' 'गुस्सा एक टॉनिक' 'चर्चित ब्लॉगर' 'चौथी दुनिया' 'ज्ञान पाने कि रीत' 'ज्वलंत समस्याओं का निवारण' 'देवता और अवतार' 'देश की अखंडता की रक्षा करने वाले मुसलमान''देश की अखंडता की रक्षा करने वाले' 'देश के शिक्षण तंत्र' 'धरती पर स्वर्ग का साक्षात्कार' 'धर्म पर पाबंदी 'न्याय के गुण से युक्त राजा ' 'पंडित और शास्त्री' 'पसंदीदा ब्लॉगर-समूह' 'पाकिस्तान के ज्यादातर हिस्सों में पंजाबी भाषा बोली जाती है' 'भाई-बहनों' 'मनोरंजन' 'मुझे सवाल दीजिए मैं आपको जवाब दूंगा' 'मुन्नी बदनाम हुई' 'मुसलमानों का दमन' 'यादगार पोस्ट' 'रामायण की कहानी' 'वर्णवादी' 'विदेशी मुद्रा' 'वेश्यालयों के देश में' 'वफ़ादारी' 'शक है जिन्हें भी दोस्तो हक़ की ज़ात में माँ की नज़ीर ला न सके कायनात में' 'शांति के लिए वेद कुरआन' 'शिरडी' 'शीला की जवानी' 'समाज का सबसे बड़ा विनाशक कट्टरता' 'सय्यद मुहम्मद मासूम साहब को ब्लॉग जगत में एस. एम. मासूम के नाम से' 'सरवरे कायनात' 'हठयोगी शठ योगी महायोगी' 'हिंदी ब्लॉगिंग' 'हिजड़े और तवायफ़ें' 'हृदयरोगियों के लिए' 1098 2010 2011 3MUSLIMs 786 : दुबे Article in Print Media DUDHWA Distance Education Dr Zakir Naik ELEPHANT Frauds Ghanshyam Maurya Hazrat Ali (RA) Historical IIT Kanpur Iman Internet Kafir Kisan. bharat LBA की नई समस्यां LBA की नयी अध्यक्षा LBA के मार्ग-दर्शक नीति नियम LBA के हनुमान LBA परिवार Lucknow Lucknow Bloggers' Association Natural way Part Time Instructor Poetess Rishi Sarva Siksha Abhiyan Shorthand Society Stenography TIGER. WILDLIFE. JUNGAL. Tips & Tricks WILDLIFE aag aankh aarati ajadee alankar alvida aman ka paigham amrit anchal anugeet chhand arab india relation arth asmyik hindi kavita atal biharee ayodhya balidan banee basant bhagat azad. bhajan bhasha bhav bimb bhojpuree bhojpuri doha bhoo bhopal book review bundelee chatushpadee chhatisgarhee chunautiyan chunav creation creatior daman dandkala chhand dard dard una ladakon ka desh dharm aur lekhan dhool dhuaan dil doha gazal dohe durmila chhand educational institute in india elegy emaan falak fasal galib ganesh datt sarasvat gantantra divas garal gas treagedy geeta chhand geetika ghalib gulf news haiku hamara dharm harish singh harsh hindee ke haiku hindi laghu katha hindi short story. kargil hindi shortstory hindi smriti geet hinsa aur ham http://sajiduser.blogspot.com/ http://www.sajiduser.blogspot.com/ imarat. india is great india. indian women and arabian shekh indipendence day jabalpur. jannah is man's destination jantantra jhulna chhand kabeer kaikeyee kamand chhand kamlinee kamroop chhand khalish khazana. kiran kriti charcha laghukatha lakhnaoo laloo laxmi lay lokneeti. loktantra lotus love manav mandir manhagaayee marhatha chhand maut meeran krishna megh mekal mirza ghalib narmada neta pakistan pita father's day prakriti prarthna pratibandh pratibha prem pyar quran and gayatri mantra rachna rachnakar radha rajneeti ram janm bhoomi ras sabab sada sakhee salgirah. sanjiv sansadji.com saraswati sat satyagrahee. sanjiv 'salil' shaheed shakeel badyoonee ship shiv shok geet shok samachar sincerity in intention sitasat siya soniya gandhi stuti sundar svasthya aur uchit ilaj svatantrata swaroopanand tadbeer talent. tam taqdeer the world is not enough tomorrow may be or not may be toofan tribhangi chhand ujala ummeed ved and quran ved mantra veenapanee vidyarthiji vivadit maamale aur ham vivek ranjan wildlife DUDHWA अ ध्यक्ष अंग्रेज़ी अंचरा अंतराग्नि अंतर्द्वंद्व अंतर्मंथन अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन अंतस अंधविश्वास अंशकालिक अनुदेशक अखंडता अगीतायन अग्ने अचेतन अठखेली अति सुखा अभिलाषा अतुकांत कविता अदा अदावत अनमन अनवर जमाल अनाहत नाद. अनैतिकता अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस अन्धविश्वास अन्न अन्ना हज़ारे अन्य कविताएँ अप:तत्व अपरा-शंभु संयोग अपराधीकरण अपशब्द अभिभावक अभेद बुद्धि अमोघ अस्त्र अरमां अर्धनारीश्वर अल्पना अल्लाह अवतार अशांति अशोभनीय - धन असार अहं आंसू आज आजादी आणविक परिवार आतंक की समस्या आतंक हैरान नज़रें आदत आदि-वाणी आदिशक्ति आभूषण आरक्षण आलिंगन आवश्यक सूचना आशनां आस्था आज़ाद शहीद दिवस इंडियन ब्लॉगर्स असोसिएशन इच्छा इच्छाएं इन्डली इन्डियन धारावाहिक इन्डिया गेट इमली ईषत इच्छा उ. प्र. राजनीति के ये घोटाले उक्ति उचित मार्ग उत्तर प्रदेश असोसिएसन उत्तर प्रदेश का सच उत्तर प्रदेश ब्लॉगर्स एसोसियेशन उदारीकरण उदासीनता उधार उपन्यासकार और पटकथा उमन्ग उर्दु ऋचाएं ऋषि ऋषि अनंग एक तत्व एतबार एश्वर्य एसे गीत ऐसी तान ओउम औरत क्या है कंगना कछारन कथा निराली | कन्घा कन्या भ्रूण-हत्या कब्र कर्नाटक कलम कलियुग के मोहन कलुष कवि लखनऊ कविता दुबे कागज़-कलम काफिया काम-सृष्टि कामनाएं कामिनि कारण कारण-ब्रह्म कारोबार कार्य कालकांज काव्य गोष्ठेी कीर्तिदा कुंभ कुञ्ज गली कुरआन कौन क्यूं न हुआ क्रमिक विकास खुरचहा पति खुशबू खुशियों की थिरकन खुशी खेल-व्यवसाय खेळ खौफ गणतंत्र दिवस गरीबी ग़ज़ल अंदाज़े-बयाँ गाँव की गोरी गांव की समस्या; 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आप सभी को हर्ष और बधाई के साथ यह सूचना देना चाहता हूँ कि LBA अपनी सफलता के उस मुक़ाम तक आ चुका है कि इसकी सदस्यता संख्या अपने चरण तक पहुँच चुकी है और जो ब्लॉगर्स बन्धु इससे जुड़ने की इच्छा रख रहे हैं और जिनके मेल मुझे मिल रहे हैं उसको मद्देनज़र रखते हुए नयी सदस्यता के इच्छुक ब्लॉगर्स को एक और भी शक्तिशाली और नया मंच का गठन आज किया जा रहा है जिसका नाम है 'ऑल इंडिया ब्लॉगर्स असोसिएशन' अर्थात AIBA ! इस मंच का हिस्सा सभी भारतीय बन सकते है, फ़िर चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में रह रहें हों !!!
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