श्याम सवैया--छह पंक्तियों वा ला सवैया ----जन्म मिले यदि...

जन्म मिले यदि...(श्याम सवैया छंद )
(१)
जन्म मिले यदि मानव का, तौ भारत भूमि वही अनुरागी।
पुत्र बड़े नेता का बनूँ , निज खातिर देश की चिंता हो त्यागी।
पाहन ऊंचे मौल सजूँ, नित माया के दर्शन पाऊँ सुभागी।
जो पशु हों तौ श्वान वही, मिले कोठी ओ कार रहूँ बडभागी ।
काठ बनूँ तो बनूँ कुरसी,मिलि जाए मुराद मिले मन माँगी ।
श्याम जिसे ठुकराऊं , मिले या फांसी या जेल, सदा को हो दागी।
(२)
वाहन हों तौ हीरो होंडा , चलें बाल-युवा सबही सुखराशी।
वास रहे दिल्ली बेंगलूर , न चाहूँ अयोध्या , मथुरा न काशी।
नौकरी प्रथम क्लास मिले, हो सत्ता के मद में चूर नशा सी।
पत्नी मिले जो संभाले दोऊ ,घर- नौकरी बात न टाले जरासी।
श्याम मिले बंगला-गाडी, ओर दान दहेज़ प्रचुर धनराशी।
जो कवि हों तौ बसों लखनऊ , हर्षाये गीत-अगीत विधा सी॥

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