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मौलाना वहीदुददीन ख़ान साहब ने कहा कि मोमिन सबसे ज़्यादा मुहब्बत अल्लाह से करता है।

Sunday, June 13, 2010


मौलाना वहीदुददीन ख़ान साहब से सवाल किया गया कि मुहब्बत ए इलाही क्या है ?जवाब में उन्होंने कहा कि मोमिन सबसे ज़्यादा मुहब्बत अल्लाह से करता है।



खुद को जांचिये कि क्या आपका सुप्रीम कन्सर्न अल्लाह है ?
मौलाना ने यह भी बताया कि मेरी दरयाफ़्त ‘इज्ज़‘ है। जब तक आप अपने इज्ज़ को दरयाफ़्त न कर लें तब तक आप न तो आला दर्जे की दुआ कर सकते हैं और न ही आला दर्जे की इबादत कर सकते हैं।इज्ज़ एक गुण है जो घमण्ड का विलोम है।हक़ीक़त तो यही है कि आदमी को चाहिये कि वह अपने आपको जांचता परखता रहे ताकि बेहतरी की तरफ़ उसका सफ़र जारी रह सके।

15 पाठकों ने अपनी राय दी है, कृपया आप भी दें!:

DR. ANWER JAMAL Sunday, June 13, 2010 6:22:00 PM  

मोमिन की तो 2 ही हालतें हैं कि मोमिन मुश्किलों और आज़माईशों पर सब्र करता है और नेमत पर शुक्र। फ़ख्र करने की तालीम इस्लाम नहीं देता इसीलिये मैं इस्लाम पर गर्व नहीं करता। अक्सर लोगों ने वे काम तो छोड़ दिये जिन्हें करना था और उन कामों को करने लगे जिन्हें नहीं करना था, गर्व करना भी उन्हीं में से एक है।
http://vedquran.blogspot.com/2010/06/muslim-means.html

DR. ANWER JAMAL Sunday, June 13, 2010 6:22:00 PM  

फ़ख्र करने की तालीम इस्लाम नहीं देता इसीलिये मैं इस्लाम पर गर्व नहीं करता।

DR. ANWER JAMAL Sunday, June 13, 2010 6:23:00 PM  

मैं जब भी अपना जायज़ा लेता हूं तो मुझे अपनी कमियां ही नज़र आती हैं अभी तक समर्पण के उस वांछित स्तर तक मैं नहीं पहुंचा जिसका आदर्श मनु महाराज, हज़रत इबराहीम और पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद स. ने हमारे सामने रखा है और जिसे उनके पवित्र सत्संगियों ने प्रत्यक्ष करके दिखाया है। इस्लाम मेरे लिए गर्व यानि फ़ख्र की नहीं बल्कि फ़िक्र की बात है। फ़िक्र इस बात की कि क्या मैं इस्लाम अर्थात समर्पण के अपने दावे में सच्चा हूं ?

HAKEEM SAUD ANWAR KHAN Sunday, June 13, 2010 6:25:00 PM  

बहुत खूब साहब ।

HAKEEM SAUD ANWAR KHAN Sunday, June 13, 2010 6:27:00 PM  

अक्सर लोगों ने वे काम तो छोड़ दिये जिन्हें करना था और उन कामों को करने लगे जिन्हें नहीं करना था, गर्व करना भी उन्हीं में से एक है।

nitin tyagi Sunday, June 13, 2010 11:45:00 PM  

@kamdarsheeभाई तुम इन लोगो के फसाए मे मत आना ये खतरनाक लोग है

Dr. Ayaz ahmad Sunday, June 13, 2010 11:52:00 PM  

नितिन त्यागी जी आप हर समय गुस्से मे क्यो रहते है गुस्से से मनुष्य का सेहत खराब हो जाती है

Dr. Ayaz ahmad Sunday, June 13, 2010 11:52:00 PM  

नितिन त्यागी जी आप हर समय गुस्से मे क्यो रहते है गुस्से से मनुष्य का सेहत खराब हो जाती है

sahespuriya Monday, June 14, 2010 2:59:00 AM  

इस्लाम मेरे लिए गर्व यानि फ़ख्र की नहीं बल्कि फ़िक्र की बात है। फ़िक्र इस बात की कि क्या मैं इस्लाम अर्थात समर्पण के अपने दावे में सच्चा हूं ?

MANHOOS Monday, June 14, 2010 7:49:00 AM  

मुददे की बात कहने लिये मौलाना जैसा माददा चाहिये ।

ज़ाहिद देवबंदी Monday, June 14, 2010 9:02:00 AM  

सच कहा मनहूस भाई मौलाना जिगर वाले है

MANHOOS Monday, June 14, 2010 9:45:00 AM  

डागदर बाबू ! अपना जिगर भी तो दिखाओ ।

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