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जीवन को दिशा तभी मिलेगी जबकि कुरआन समझकर पढ़ा जाये।

Saturday, June 12, 2010

मौलाना से प्रश्न पूछा गया कि कुरआन की आयतों को समझें कि उसे हिफ़्ज़ यानि कंठस्थ करें।
जवाब- कुरआन को विचार करके पढ़ो। जिसे रमज़ान में तरावीह पढ़ानी हो वह हिफ़्ज़ करे।
मौलाना के कहने का तात्पर्य यह था कि जीवन को दिशा तभी मिलेगी जबकि उसे समझकर पढ़ा जाये। कुरआन एक उपदेश और नसीहत है और उपदेश और नसीहत पर अमल तभी मुम्किन है जबकि उसे समझकर पढ़ा जाये।

13 पाठकों ने अपनी राय दी है, कृपया आप भी दें!:

बेनामी,  Sunday, June 13, 2010 12:34:00 AM  

maulana khud uljhan me ho to dusro ko kya rah dikhayega bhai ji.....?

PARAM ARYA Sunday, June 13, 2010 2:55:00 AM  

बेनामी से आधा सहमत ।

आचार्य जी Sunday, June 13, 2010 6:31:00 AM  

आईये जानें .... क्या हम मन के गुलाम हैं!

शेखचिल्ली का बाप Sunday, June 13, 2010 9:33:00 AM  

आचार्य बेटे ! तू मेरी बीवी का गुलाम है ।

imran Sunday, June 13, 2010 9:37:00 AM  

अच्छी पोस्ट

शेखचिल्ली का बाप Sunday, June 13, 2010 9:38:00 AM  

देखो इस आचार्य से को । दूसरो के कोठे पे अपने लिये कबूतर पकड़ता फिर रहा है । हुशियार कही का ।

nitin tyagi Sunday, June 13, 2010 9:41:00 AM  

तुम हर समय एक ही रट क्यो लगाए रहते हो क्या तुम्हे और कोई काम नही है

बेनामी,  Sunday, June 13, 2010 9:45:00 AM  

@नितिन त्यागी जी जिस दिन आप जीवन का मकसद समझ लोगे तुम भी यही रट लगाओगे

Voice Of The People Friday, June 18, 2010 4:48:00 AM  

मौलाना ने सही फ़रमाया है. समझ के पढो कुरान जिस से उसपे अमल कर सको.

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