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भारतीय स्त्री की दशा

Tuesday, June 08, 2010




ख़ुद धर्मराज के हाथ यहाँ द्रोपदी लुटाई जाती है,
मर्यादा पति कि रखने सीता वन भिजवाई जाती है
जो इस संसार कि जननी है उसका ही जीना मुश्किल है,
जो बेटी बन कर आती है वो बहु जलाई जाती है

5 पाठकों ने अपनी राय दी है, कृपया आप भी दें!:

pragya pandey Tuesday, June 08, 2010 6:45:00 PM  

aapki baat sahi hai .. bhartiya stree ki dasha aisi hi hai lekin ab pratirodh ke swar mukhrait hone lage hain .

अनामिका की सदाये...... Tuesday, June 08, 2010 7:19:00 PM  

khud hi dekh lijiye purush pradhan samaj jisme purush khud ko pradhan kahte nahi thakta aur ahenkar se sir uncha kiye chalta hai.

संजय कुमार चौरसिया Tuesday, June 08, 2010 7:19:00 PM  

yahi to naari ki vipda hai
is bhartiya samaj main

http://sanjaykuamr.blogspot.com/

L.R.Gandhi Tuesday, June 08, 2010 10:15:00 PM  

मर्द के हाथों औरत की दुर्दशा इससे बढ़ कर क्या होगी। मर्द जब चाहे तीन तलाक़ कह कर घर से निकाल दे ,और अगर अपनी गलती सुधारना भी चाहे तो औरत को 'हलाला' की ज़िल्लत के बाद।
'किसी आदमी से यह नहीं पूछा जायेगा की उसने अपनी बीवी को क्यों पीटा.(पैगम्बर)

Dr. shyam gupta Wednesday, June 09, 2010 1:21:00 PM  

यह्न सिर्फ़ भारतीय समाज में नहीं,दुनिया भर में है, पाश्चात्य समाज़ में भी नारी का यही हाल है, योरोप में विकटोरियन युग में तो नारी को मानव भी नहीं माना जाता था और आज भी वह नये-नये तरह के अत्याचारों से पीडित-प्रताडित है.

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