(परम पिता परमात्मा या ईश्वर सभी का पिता है अतः पितृ दिवस पर उसे याद करें, याद करें कि क्या उसके द्वारा हमें दिए गए दायित्व हमने निभाये )
दायित्व
यह सच है कि,
ईश्वर ने सृष्टि को आगे बढाने का बोझ ,
नारी पर डाल दिया , पर
पुरुष पर भी तो......|
अंततः कब तक एक पिता ,बच्चों को -
उंगली पकड़ कर चलाता रहेगा ।
बच्चा स्वयं अपना दायित्व निभाये,
उचित, शाश्वत, मानवीय -
मार्ग पर चले-चलाये;
अपने पिता के सच्चे पुत्र होने का-
दायित्व निभाये।
आत्मा से परमात्मा बनने का,
अणु से विभु होने का,
हौसला दिखाए;
मानव से ईश्वर तक की यात्रा पूर्ण करने का,
जीवन लक्ष्य पूर्ण कर पाए ,
मुक्ति राह पाजाये।
पर , नर-नारी दोनों ने ही,
अपने दायित्व नहीं निभाये।
फैशन, वस्त्र उतारने की होड़,
पुरोष बनने की इच्छा रूपी दंभ,
गर्भपात, बधू उत्प्रीडन, कन्या अशिक्षा ;
दहेज़-ह्त्या, बलात्कार,नारी शोषण से-
मानव ने किया है, कलंकित-
अपने पिता को,
ईश्वर को ; और-
करके व्याख्यायित , आधुनिक विज्ञान,
सिर्फ भौतिक प्रगति का ज्ञान ,
कहता है स्वयं को, सर्वशक्तिमान ;
कर रहा पिता ईश्वर को बदनाम ॥
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