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शुक्रवार, दिसंबर 24, 2010

शुक्रवार, दिसंबर 24, 2010 24
‘अपने महबूब की हर शै प्यारी होती है।‘
Anwer Jamal
यह एक सिद्धांत है। हर ज़बान में बहुत सी कहावतें इस सिद्धांत को बयान करती हुई आपको मिल जाएंगी। हिंदी में भी ऐसी कहावतें और नीति वचन पाए जाते हैं लेकिन मुझे ताज्जुब होता है यह देखकर कि लोग देश की अखंडता की बात करते हैं और बिहारियों की पिटाई भी कर देते हैं। मुंबई की तो जाने दीजिए, दिल्ली में भी दूसरे प्रदेशों से आए ग़रीबों को जुर्म का मूल बता दिया जाता है और विरोध होते देखकर फिर उस बयान से पल्ला भी झाड़ लिया जाता है। मंत्रियों की जाने दीजिए, आम लोग भी आपको ‘बिहारी‘ शब्द को नीच और गंवार के अर्थों में या गाली के अर्थ में इस्तेमाल करते हुए मिल जाएंगे जबकि यही शब्द वे देवता और अवतार के लिए भी बोलते हैं।

क्या बिहार का होना कोई जुर्म है ?
सीता जी भी तो बिहार की ही थीं और महात्मा बुद्ध की प्रचार भूमि भी बिहार ही थी।
महावीर जैन से संबंध रखने वाली पावापुरी भी बिहार में ही है।
जिस ज़मीन पर ऐसी हस्तियों ने क़दम रखा हो, अगर आज उस ज़मीन के बाशिंदों के सामने कोई समस्या है तो उसे दूर करने में हमें उनकी मदद करनी चाहिए। यह क्या कि बिहार की सीता जी को तो भगवान मान रहे हैं और उनके सामने तो हाथ जोड़े प्रार्थना कर रहे हैं और उनके इलाक़े से आए अपने ही भाईयों को अपने बराबर भी मानने के लिए तैयार नहीं हैं।

जब सेम संस्कृति वाले अपने ही भाईयों के लिए संवेदनहीनता है तो फिर अपने से थोड़ा भिन्न मुसलमानों के लिए यह संवेदनहीनता और भी ज़्यादा हो तो क्या ताज्जुब है ?

हिंदू भाईयों के मंदिरों में आजकल एक मुसलमान की मूर्ति भी देखी जा सकती है, जिसे शिरडी के साईं बाबा के नाम से जाना जाता है। बहुत से दूसरे मुसलमान पीरों के मज़ारों पर भी उन्हें मत्था टेकते देखा जा सकता है। वे कहते हैं कि हम इनका सम्मान करते हैं। सम्मान करना अच्छी बात है, लेकिन उनका भी तो किया जाना चाहिए जो कि इन पीरों का सम्मान करते हैं और इनके मिशन को लेकर चल रहे हैं। लेकिन नहीं, उनका विरोध किया जाता है, कोई उनकी जड़ें डायरेक्ट काटता है और कोई उनमें मठ्ठा डालता है। उनमें कोई खुलकर विरोध करता है और कोइ छिपकर और जो ज़्यादा चतुर होते हैं वे साथ मिले होते हैं और मिलकर वार करते हैं।
जो काम विश्व के और खुद भारत के भी महापुरूषों ने किया है। वही काम इस नाचीज़ बंदे ने शुरू किया तो लोगों ने भी वही किया जो कि उन महापुरूषों के साथ ज़ालिमों ने किया था। लोग उन महापुरूषों की पूजा करते रहे, उन्हें सम्मान देते रहे और उनके काम को आगे बढ़ाने वालों का अपमान करते रहे, विरोध करते रहे केवल इसलिए कि झूठ के आदी लोग सच को सुनना नहीं चाहते थे।
मुझे सलाह दी गई कि आप दूसरे धर्मों का विरोध न किया करें, उनमें कमियां न निकाला करें। अव्वल तो मैं धर्म को न तो दो मानता हूं और न ही दूसरा और इसीलिए कमी भी नहीं मानता लेकिन अगर शिकायत करने वालों के नज़रिए से ही देखा जाए तो भाई शाहनवाज़ और ज़ीशान ज़ैदी तो मेरी तरह नहीं लिखते। उनका विरोध क्यों किया जाता है ?
बेचारे महफ़ूज़ भाई भी एक जगह मुझे अपने साथ बदसुलूकी की शिकायत करते हुए मिले। एक ब्लॉगर उन पर लड़कियों को फांसने का इल्ज़ाम लगाते हुए मिला।

भाई आखि़र आप किस वैरायटी के मुसलमान से मुतमईन होओगे ?
वेद कुरआन की पोस्ट्स से लोगों को शिकायतें थीं तो मैंने कहा कि भाई इस्लाम के विरोध में लिखी हुई पोस्ट्स मिटाकर आ जाईये और फिर मुझसे जितनी पोस्ट्स कहेंगे, मैं उन्हें मिटा दूंगा।

लोग नहीं माने, कोई नहीं आया।
मैंने कहा कि आप ब्लागर्स के लिए एक आदर्श आचार संहिता तैयार कर लीजिए। दूसरों से पहले मैं उसका पालन करूंगा।
लोग इसके लिए भी नहीं माने।
फिर मैंने यह तक कह दिया कि अगर कोई भी भाई मेरे ब्लाग पर ऐसी कोई बात देखता है जो मैंने किसी भारतीय महापुरूष से हटकर पहली बार कही हो और उससे वे इत्तेफ़ाक़ न रखते हों तो मैं उसे भी डिलीट कर दूंगा लेकिन...
कोई आज तक नहीं आया बताने के लिए।
मैं ज़्यादातर अपने ही ब्लाग पर मसरूफ़ रहता था और दूसरी जगहों पर जाना कम ही होता था। इसी दरम्यान एक ब्लाग आया ‘अमन का पैग़ाम‘। एक लंबे अर्से तक इस पर मैं जा ही नहीं पाया और कभी गया भी तो इसका हक़ अदा न कर पाया, यानि साथ न दे पाया। कुछ वक्त से इस ब्लाग को देखना शुरू किया तो ‘अजब ब्लागजगत की ग़ज़ब कहानी‘ सामने आई। इसे हमारे बीच लेकर आए जनाब मासूम साहब, जो कि इंग्लिश की दुनिया के एक तजुर्बेकार ब्लागर हैं और हिन्दी और हिंदुस्तानियों की सेवा के मक़सद से अच्छे विचार लेकर हिंदी दुनिया में तशरीफ़ लाए। उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया जो मैंने किया लेकिन उन्हें भी निशाने पर ले लिया गया। उनके भोजन को निशाना बनाकर कह दिया गया कि वे अमन का पैग़ाम दे ही नहीं सकते। जिन्होंने उन पर आरोप लगाया, उनके साथ सुनार से लेकर लुहार तक सब इकठ्ठा हो गए और बेचारे मासूम भाई लोगों से यही कहते रहे कि भाई किसी को ‘अमन के पैग़ाम‘ से कोई शिकायत हो तो कृप्या यहां दर्ज कराएं।‘

मेरे पास कोई नहीं आया तो उनके पास भला कौन जाता ?
उन्होंने अपने लेख कम कर दिए और दूसरे ब्लागर्स के लेख छापने शुरू कर दिए। उनका मक़सद अमन था लेकिन अमन के दुश्मनों का मक़सद तो उनका दमन था।
उनकी अपील के बावजूद उनके ब्लाग पर लिखने के लिए बड़े नाम भी कम ही आए और जो लेख छपे उन पर टिप्पणी करने तो और भी कम आए।
जिन लेखकों ने अब तक लिखा है, उनके नामों पर एक नज़र डालकर आप यह बात आसानी से जान सकते हैं।
समीर लाल (उड़नतश्तरी, पूजा शर्माशाहनवाज़ ,.  राजेन्द्र स्वर्णकार बीकानेर , .अमित शर्मा,  इस्मत जैदी,  देवेन्द्र पाण्डेय,  तारकेश्वर गिरि,  अंजना . स.म.मासूम,  विवेक रस्तोगी, -अलबेला खत्री,  अजय कुमार झा,  संजय भास्कर,. निर्मला कपिला. केवल राम, . सतीश सक्सेना, 
हो सकता है कि कोई बड़ा नाम मुझसे रह गया हो।
आख़िर मासूम साहब को ‘अमन के पैग़ाम‘ पर भी देश की हितचिंता में घुलने वालों का सपोर्ट कम क्यों मिला ?
क्या सिर्फ़ इसलिए कि वे एक मुसलमान हैं ?
मुसलमान होने की क़ीमत सिर्फ़ उन्हें ही नहीं चुकानी पड़ी बल्कि उन ब्लागर्स को भी चुकानी पड़ी, जिन्होंने उनका साथ दिया। जनाब सतीश सक्सेना साहब का नाम भी उनमें से एक है।
जनाब सतीश साहब जब अपने ब्लाग पर पोस्ट रिलीज़ करते हैं तो एग्रीगेटर के ठप्प होने के बावजूद टिप्पणियां 100 से ऊपर कूद जाती हैं। जब यही हरदिल अज़ीज़ हस्ती ‘अमन के पैग़ाम‘ पर एक बेहतरीन संदेश देती है तो 10-12 टिप्पणियां मिलना भी मुश्किल हो जाता है।

यह सब देखकर मैं वाक़ई आहत हुआ। सतीश जी मेरे विरोधियों में से एक हैं लेकिन मैं उनका विरोधी नहीं हूं। मैं किसी का भी विरोधी नहीं हूं। बस, जिस बात को ग़लत समझता हूं उस पर चुप नहीं रहता। मैं यह नहीं देखता कि यह तो स्टार ब्लागर है, या यह तो महिला है या यह तो मुसलमान ही है।

अल्फ़ा मेल प्रिय प्रवीण जी गवाह हैं कि सलीम ख़ान साहब की एक पोस्ट पर उन्होंन प्रतिवाद किया और मैं पहला आदमी था जिसने कहा कि प्रवीण जी की शिकायत दुरूस्त है और सलीम भाई की ग़लती है और सलीम भाई ने अपनी ग़लती मानी और उस पोस्ट को डिलीट भी किया।

लेकिन मैंने यह नहीं सोचा कि अब प्रवीण जी से सैटिंग बढ़िया हो गई है अब इनका विरोध नहीं करूंगा। जब कभी उन्होंने ईश्वर के अस्तित्व पर या उसके न्याय पर प्रश्नचिन्ह लगाया मैंने उन्हें खरी भी सुनाई और खोटी भी। लेकिन यह उनकी तारीफ़ है कि न उन्होंने बुरा माना और न संवाद बंद किया , नास्तिक होने के बावजूद मैं उन्हें पसंद करता हूं और प्यार करता हूं।

प्यार तो मैं जनाब सतीश जी से भी करता हूं। उनसे मेरे संबंध बहुत मधुर थे लेकिन एक दिन मैंने अपने लिए नहीं बल्कि किसी और के लिए उनके विचार-कलश पर गुलेल चला दी। बस, उस दिन से वे हमसे ख़फ़ा हो गए। इस मामले में उन्हें प्रिय प्रवीण जी से कुछ बेहतर सीखने को मिल सकता है। लेकिन वे जज़्बाती आदमी हैं, मेरे वालिद भी एक जज़्बाती आदमी हैं। मैं जानता हूं कि जज़्बाती आदमी ज़्यादा देर तक अपनों से रूठकर नहीं रह सकता।

... और दूसरों की जाने दीजिए मैं तो ख़ुद अपने को ही नहीं बख्शता और न ही खुद पर चोट करने से बाज़ आता हूं। मैंने अपने ब्लाग ‘मन की दुनिया‘ पर एक कहानी लिखी थी ‘सदा सहिष्णु भारत‘। कहानी अपनी हदें लांघकर जनाब अरविंद मिश्रा जी के सम्मान पर चोट करने लगी। यह एक खुली हुई चूक थी। मेरे करमफ़रमाओं ने ऐतराज़ भी जताया । मैंने तुरंत मिश्रा जी से माफ़ी मांगी, उस कहानी को डिलीट किया और अपनी सज़ा के तौर पर उस पोस्ट पर मिली हुई टिप्पणियों को आज तक बाक़ी रखा हुआ है।

ग़लती ग़लती है। चाहे वह मेरी हो या मेरे किसी भाई की या मेरे किसी बुजुर्ग की। ग़लतियों को हमारे अंदर बाक़ी नहीं रहना चाहिए। यह लेख भी इसी उद्देश्य से लिखा जा रहा है।
सोचने वालों को सोचना चाहिए कि जनाब सतीश सक्सेना जी तो ज्यों के त्यों वही हैं जो कि वे अपने ब्लाग पर हैं, बदला है तो केवल उनका ब्लाग। उनकी पोस्ट ‘मेरे गीत‘ पर आती है तो टिप्पणियां 100 और उनकी पोस्ट ‘अमन के पैग़ाम‘ पर आती है तो बमुश्किल 10 , आख़िर क्यों ?
क्या इसे ‘वर्चुअल कम्युनलिज़्म‘ का नाम दिया जा सकता है ?
यह क्या बात है कि ‘अमन का पैग़ाम‘ भी ब्लागजगत के स्वयंभू मठाधीशों को गवारा नहीं है, अगर वह किसी मुसलमान द्वारा दिया जा रहा है तो ...
न उसे टिप्पणियां दी जाएंगी और न ही उसका चर्चा ब्लागजगत के लोकप्रिय ब्लाग्स में ही किया जाएगा। अगर आप सराहना के दो शब्द भी नहीं दे सकते तो फिर आप और कुछ क्या दे पाएंगे।
वर्ष 2010 जा रहा है और नया साल आ रहा है।
क्या नये साल में भी आप मुसलमानों के साथ अपने तास्सुब का यही बर्ताव जारी रखेंगे या फिर अपने मन को विकार से मुक्त करेंगे ?

आप क्या करेंगे ? , यह फ़ैसला आपको ही करना होगा।

इसी के साथ मैं अपने व्यक्तित्व और विचारों की आलोचना और समीक्षा भी सादर आमंत्रित करता हूं।
कोई खुद को किसी भी हाल में रखे लेकिन मुझे अपने अंदर कोई कमी गवारा नहीं है क्योंकि मुझे मरना है और दूसरे लोक में जैसा व्यक्तित्व लेकर मैं जाऊंगा, उसे लेकर मुझे अनंत काल तक जीना है। अपूर्ण व्यक्तित्व लेकर मैं इस जग से जाना नहीं चाहता। जो भी मेरी आलोचना करेगा, मुझ पर उपकार ही करेगा।

संवाद का उद्देश्य आत्म विकास ही होना चाहिए।
आत्मावलोकन का उद्देश्य भी यही होता है।
आईये कुछ सार्थक करें, कम से कम वर्षांत में ही सही।

24 पाठकों ने अपनी राय दी है, कृपया आप भी दें!

  1. @ हरीश जी आपका शुक्रिया !
    कृप्या ऊपर दिए गए लिंक को भी देखिएगा ।

  2. हमारे साथ मुश्किल यह है कि हम हिन्दू मुसलमान ,ईमान और कुरआन ,अल्लाह और भगवान् के ऊपर जा ही नहीं पा रहे हैं -दिन रात यही सब...मैं तो तंग और क्लांत हो चला हूँ ,जैसे दुनिया में और कोई मुद्दे,मसायल नहीं हैं ! कुएं से बाहर निकलिए मित्र -ज़रा खिडकियों को खोलिए ,ताजे हवा के झोके और नयी रश्मियों का भी नजारा तो कीजिये -खुदा कसम बड़ा मजा आयेगा!ये दिन रात के स्वच्छ संदेशों और पैगामों की चिल्ल पों बंद कीजिये दोस्त -

  3. सही बात तो यह है कि अभी ब्लोग पर उच्चकोटि के विग्यानी, प्रोफ़ेशनल्स,साहित्यकार , विद्वान नहीं आये हैं---अत: गम्भीर, देश व समाज़ केप्रति उद्देश्यपूर्ण आलेखों पर टिप्पणियां नहीं आतीं--जबकि हल्के-फ़ुल्के, अतिवादी,समाचार-दैनिक क्रियाकलाप, राजनीति पर व्यन्ग्य या व्यर्थ की टिप्पणियों वाले पोस्टों पर १००-१०० टिप्पणियां आती हैं क्योन्कि वे विना सोचे समझे लिख जाती हैं...

  4. Dr. गुप्ता Ji ! @ आप किस दुनिया में हैं ?
    एक विद्वान और वैज्ञानिक तो मिश्रा जी की शक्ल में आपके सर पर ही बैठे हैं और बंदा भी एक हैसियत रखता है । यक़ीन न आए तो हमारे ब्लाग की ताज़ा पोस्ट पढ़ लीजिएगा ।
    कुछ हिस्सा तो यहीं पेशे ख़िदमत है -
    हमारे क़ारईन हज़रात उर्फ़ प्यारे पाठको , हम उर्दू लिखते हैं और वह भी गाढ़ी । हम ऐसा क्यों करते हैं ?
    हम बताएंगे बाद में पहले आप क़यास लगा लीजिए ख़ूब अच्छी तरह और तब तक आप हमारा यह कलाम देखिए जो हमने छोड़ा है "अमन के पैग़ाम" पर ।

    @ MAsoom साहेब ! हम आज सलाम करने भी आए हैं और कलाम करने भी ।
    हुआ यूं कि आपके ब्लाग से धुआं उठता देखकर मेरे गधे ने अपने अंदाज़ मेँ चैट की और यहां ला छोड़ा । मैंने शेख़चिल्ली को दौड़ा दिया कि पानी और कंबल लेकर आ जाए पीछे पीछे और यहां आकर देखा तो धुआं निकला यज्ञ की आग का । सारे अंदेशे ढेर निकले औल्लो जी , केक भी काटे जा रहे हैं ।
    ऐसे फ़ोटू माSUम साहेब पहले ही दिखा दिए होते तो गिरी बाबू पहले ही दोस्त बन गए होते और गिरी बाबू सैट तो समझो सब सैट । अब तो ब्लाग संसार में अमन आ ही गया समझो ।
    चलता हूं फ़ायर ब्रिगेड वालों को रोक दूं वर्ना सारा केक वो ही चट कर जाएंगे और हां , हमने लिखना ज़रूर बाद में शुरू किया है ब्लागर बड़े हैं लिहाज़ा अभी मत छापिएगा हमारा पैग़ाम , हमें बाद वालों में रखना । हमारे पैग़ाम का साईज़ भी हमारी इज़्ज़त जितना ही बड़ा है। ईमानदारी से बताईये कै दिन लगे हमारे पैग़ाम को जोड़ने में ?

    मिश्रा जी !@ आपने सच कहा है हम भी पक गए हैं इसीलिए हम तो इन सब बातों को अपने ब्लाग पर जगह ही नहीं देते ।
    आप आईयेगा और नज़्ज़ारा कीजिएगा ।

  5. Dr. गुप्ता Ji ! @ अगर उच्च कोटि के लोग अभी आए ही नहीं हैं तो आप किस कोटि से आ गए हैं ?

    वैसे कोट और कोटि की तो आजकल सर्दी में बहुत ज़रूरत है । कोटि नीचे तक हो तो अच्छा ही है । ऊंची कोटि से बेहतर है नीची कोटि । निकाह के वक़्त एक कोटि हमने सिलवाई थी , आजकल शेख़चिल्ली के काम आ रही है । ऊंची से अच्छी निकली हमारी निचली कोटि ।

  6. एसे ही ऊल जुलूल पोस्टों व टिप्पणियां से मिश्रा जी तन्ग और क्लान्त हैं...

  7. @ जनाब मिश्र जी !
    हरीश जी और डा. गुप्ता जी!
    आप सभी का शुक्रिया
    कृपया
    मेरी नई पोस्ट देखेंऔर बताएं कि जनाब अरविन्द मिश्र की राय से आप कितना सहमत हैं और इस पोस्ट में आप मुझे जिस रूप रंग में देख रहे हैं , क्या यह बंद ज़हन की अलामत है ?

    http://ahsaskiparten.blogspot.com/2010/12/shades-of-sun.html

  8. क्या हुआ मस्जिद गिरा के,
    जब न मंदिर बन सका |
    तेरे आपसी षडयंत्र से ,
    बिन छत के मौला रह गया |

    मेरे लिए जो राम है,
    तेरे लिए रहमान है |
    अंतर था केवल नाम का,
    जिससे खुदा तक बँट गया |

    सोचा न था उसने कभी,
    जिसने दिया था जन्म फिर,
    क्यूँ हाँथ में तलवार ले ,
    भाई से भाई कट गया |

    तू मांगता कर खोलकर ,
    मैं हाँथ जोड़े मांगता हूँ |
    फिर अहम् किस बात का,
    जाती धरम और पात का |

    बीतेगा क्या दिल पर तेरे,
    कैसे करेगा तू सामना ,
    जब तेरे दश नाम पर,
    बच्चे तेरे लड़ने लगे |

    आओ यहाँ मिल कर सभी,
    पूजा करें कलमा पढ़े |
    है चार दिन की ज़िन्दगी,
    जाना है सबको फिर वहाँ |

  9. अनवर भाई,अमन का पैगाम पर सतीश भाई की पोस्‍ट पर टिप्‍पणी नहीं आने को लेकर सवाल करने का कोई औचित्‍य नजर नहीं आता।
    *
    मासूम साहब ने सबसे पोस्‍ट के लिए आग्रह किया है और मैं भी उनमें से एक हूं। मैंने उन्‍हें सूचित किया था और कहा था कि मुझे यह प्रयास नारेबाजी से ऊपर उठता दिखाई नहीं देता। यहां पोस्‍ट भी वही लोग लिख रहे हैं जो अमन में यकीन करते हैं और पढ़ भी वही लोग रहे हैं।ण्‍ेसे सब लोग तो मुठ्ठी भर ही हैं न। असल काम तो उनके बीच करने का है जो इसमें यकीन नहीं करते। इस बारे में सोचना चाहिए। मैं आज भी यही कहता हूं।
    *
    एक-दूसरे के धर्म की कमजोरियां गिनाकर कभी किसी का फायदा नहीं हुआ है और न होने वाला है,यह आप बेहतर जानते हैं।

  10. प्रांत प्रांत से अमीरी गरीबी से अपने पराए से समाज में उँच नीच सदीयो से चली आ रही है, दूर करने के प्रयास भी हुए है। और हो भी रहे है।

    लेकिन अनवर तुम चाहते क्या हो? सीधे सीधे कहो……

    मुसलमानों को आदर भी उनकी योग्यता और सच्चाई पर ही मिलेगा। मात्र मुसलमान होने मात्र से कुछ भी हासील न होगा।

  11. लोग पीर फक़ीर,ओलिया,सूफ़ी,साई की पूजा करते है, मत्था टेकते है तो उनके सत्कर्मो के कारण। अनवर,तुम जैसे तुछ लोगो में उनका अंश भी नहिं और न सच्चाई है, और ईमान का वास्ता भी नहिं। फ़िर कैसे चाहते हो तुम्हारी उस तरह पूजा हो पामर जीव्।

  12. -
    -
    -
    "जो काम विश्व के और खुद भारत के भी महापुरूषों ने किया है। वही काम इस नाचीज़ बंदे ने शुरू किया तो लोगों ने भी वही किया जो कि उन महापुरूषों के साथ ज़ालिमों ने किया था।"

    अबे गधे,

    तुम अपने आप को समझते क्या हो? कोइ महापुरुश!! जो तू छ्दम बात उनके समान करे और तूं महापुरुशो जैसा पूजा जाय।
    किस बात का रोना रोता है तूं हैसियत क्या है तेरी।


















    '

  13. जाक़िर शाहबाज़ और मह्फ़ूज़ को तुम लोग बदनाम कर छोडोगे अपनी तरह्।

    बाक़ी तुम सब केरवाणी के चेले हो, और यह सच तुम कबूल करते आये हो। मक़्सद खूल्ला हो चुका है। सभी को रोकर इमोसनल ब्लेकमेल मत करो, सभी जानते है।

    मासूम तुम्हारा ही मुरगा है, बडे ब्लोगेर में पहूंच बनाने के लिये। जब मामला फेल होता लगा तो रो रहे हो? हमे सब पता है कहां कहां टिप्प्डीओ से एक दूसरे का पिछवाडा सहलाते हो?

  14. राजेश उत्साही जी,यहाँ जो बहस हो रही; है उसका कोई मतलब मुझे समझ मैं नहीं आता?आप ज़रा उनलोगों को देखें जिन्होंने लेख़ या कविता; भेजी; है "अमन का पैग़ाम" पे; वोह बड़े और समझदार ब्लोगेर्स हैं. और हकीकत मैं काबिल ए इज्ज़त और काबिल ए फख्र हैं और आप बहुत ध्यान दे देखें उसको पढने वाले और तारीफ करने वाले वोह भी हैं , जिन्होंने कुछ दिन पहले ही ब्लॉगजगत के धर्म युद्ध मैं बड़े बड़े किरदार अदा किये हैं. आज जब वही लोग; अमन और शांति का सन्देश देते हैं, तो किसी को; यह अमन के पैग़ाम की कामयाबी; नहीं लगती . क्यों?कोई तो कारण होगा की आज कुछ लोग अलग अलग बहाने से "अमन का पैग़ाम" के खिलाफ बोल रहे हैं. क्यों? शायद इसका जवाब मैं खुद तलाश रहा हूँ?क्यों की यह तो सत्य है की शांती सन्देश देना कम से कम किसी धर्म के खिलाफ बोलने से तो अच्छा ही है.जबकि यहाँ की बहस; यह बता रही है की दूसरे के धर्म पे व्यंग करना अमन के पैग़ाम देने बेहतर काम है.. मेरे नाम से संबोधित करके बात कही जा रही थी; इसी कारण मेरे लिए कुछ कहना आवश्यक हो गया... ज़रा यह पोस्ट पढ़ लें; शायद आप समझ जाएं..ग़लत कहा हो रहा है..

  15. Dr. गुप्ता Ji !@ वैज्ञानिक मिश्रा जी तो हमारे ब्लाग पर आकर पोस्ट को सराह रहे हैं और आप यहां बैठे बैठे अफ़वाह फैला रहे हैं कि वे हम जैसे लोगो की पोस्ट से दुखी हैं ।
    आपने बताया है कि बकवास पोस्ट को 100 टिप्पणियां मिलती हैं और अच्छी को दो चार तो देखिये कि हमें दो चार टिप्पणियां ही मिलती हैं ।
    हमारा गधा आपकी नाइंसाफ़ी के ख़िलाफ़ आज आपके ब्लाग पर रेंकेगा और शेख़चिल्ली आज अपने टॉयलेट में आपके दौलतख़ाने की तरफ़ मुंह करके बैठेगा।
    आपने हमारी भी तौहीन की है और मिश्रा साहब की भी । फ़ौरन से पेशतर माफ़ी मांगिये वर्ना डागदर से वार्ड ब्वाय बना दिये जाओगे ।

    * गुप्ता साहेब , इसे हल्के मूड में लीजियेगा , सिर्फ़ आपकी मुस्कुराहट के लिये लिखा है हमने ।

  16. अच्छी पोस्ट !

    चिपलूनकर से भी ज़्यादा ख़तरनाक धर्मान्ध ब्लॉगर हैं ये मिश्रा जी, इनका तो मुसलमान के m से ही राष्ट्रवादी खून (?) उबाल मारने लगता है.

  17. Unknown says:

    @ सलीम - हा हा हा हा हा हा हा हा हा…।
    अब तो काफ़ी दिनों के गैप में भी मैं तुम्हारे, जमालगोटे के, कैरानवी के ब्लॉग पर आता नहीं…

    फ़िर भी मेरे नाम का भूत तुम्हारे दिमाग पर सवार है… कुछ झाड़-फ़ूंक करवाओ भाई…

  18. एक साहित्यकार का फ़र्ज़ क्या होता है ?

    @ जनाब राजेश उत्साही जी !

    http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/01/standard-scale-for-moral-values.html

    यह सही है कि साहित्य समाज का दर्पण है लेकिन इसकी उपादेयता मात्र यही नहीं है। समाज के मार्गदर्शन में साहित्य की एक अहम भूमिका होती है। साहित्य समाज का दर्पण भी होता है और उसे दिशा भी देता है। ऐसा आप भी मानते होंगे।
    इस संवाद की पूरी पृष्ठभूमि जानने के लिए देखें-
    http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/01/standard-scale-for-moral-values.html

  19. @ जनाब राजेष उत्साही जी ! आप कह रहे हैं कि अमन के पैग़ाम के लिए आपने इसलिए नहीं लिखा कि यह सब आपको नारेबाज़ी से आगे बढ़ता हुआ नहीं लगा लेकिन आप अब कुछ ही दिन बाद ‘अमन के पैग़ाम‘ की तारीफ़ फ़रमा रहे हैं। इसका मतलब है कि अब आपको समझ आ गया है कि यह मात्र नारेबाज़ी नहीं है बल्कि सचमुच एक आंदोलन है, जो समय के साथ और भी ज़्यादा बलवान होता जाएगा। अब जब आप इससे सहमत प्रतीत हो रहे हैं तो अपनी भूल सुधार करते हुए अब आप भी इस मंच से ‘अमन का पैग़ाम‘ दें वर्ना बताएं कि अब आपके पास क्या बहाना है ‘अमन का पैग़ाग‘ न देने का ?

    2- सत्य आधार है और कल्पना मजबूरी। सत्य से मुक्ति है और कल्पना से बंधन। कल्पना सत्य भी हो सकती है और मिथ्या भी लेकिन सत्य कभी मिथ्या नहीं हो सकता। ईश्वर सत्य है और उस तक केवल सत्य के माध्यम से ही पहुंचना संभव है।

    सही-ग़लत का ज्ञान कभी षटचक्रों के जागरण और समाधि से नहीं मिला करता। इसे पाने की रीत कुछ और ही है। वह सरल है इसीलिए मनुष्य उसे मूल्यहीन समझता है और आत्मघात के रास्ते पर चलने वालों को श्रेष्ठ समझता है। दुनिया का दस्तूर उल्टा है । मालिक की कृपा हवा पानी और रौशनी के रूप में सब पर बरस रही है और उसके ज्ञान की भी लेकिन आदमी हवा पानी और रौशनी की तरह उसके ज्ञान से लाभ नहीं उठा रहा है मात्र अपने तास्सुब के कारण।

    कोई किसी का क्या बिगाड़ रहा है ?

    अपना ही बिगाड़ रहा है ।

    Place, where you can see the context of this post .

    https://www.blogger.com/comment.g?blogID=554106341036687061&postID=1840318453488599693&isPopup=त्रुए

  20. आपने बड़ी खरी बात कही है|डटे रहिये हम आपके साथ हैं |

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भईया-जन को ये सलाह है की वह LUCKNOW BLOGGERS' ASSOCIATION को Google Chrome ब्राउज़र पर ही खोले जिससे उन्हें ब्लॉग पढने में और अधिक आनंद आएगा !

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ANWER JAMAL मुक्तक मुक्तिका लेख शिव ब्लोगोत्सव-2010 contemporaray hindi poetry acharya sanjiv verma 'salil' geet navgeet नया साल Dabir News गीत jabalpur दोहा संस्‍कृतं- भारतस्‍य जीवनम् कविता समीक्षा india प्रबल प्रताप सिंह hindi gazal chhand muktika दोहा सलिला दुबे सरस्वती contemporary hindi poetry hindi chhand ईश्वर कुण्डलिया जीवन दिवाली विज्ञान विमर्श doha sharda कविताएँ कृष्ण नारी हिन्दी EJAZ AHMAD IDREESI LBA रूबरू hindi jangal madhya pradesh. muktak swatantrata divas अविनाश ब्योहार आलेख इतिहास कर्म कार्यशाला दोहा यमक नरक चौदस नव वर्ष बसंत भारत मन महफूज़ अली माया यमक दोहा राधा व्यंग्य सूरज सृष्टि 'Ayaz' 'कामसूत्र' 007 indian bond Dr.Aditya Kumar anugeet bharat chaupade. hindi chaupade. hindi chhnad de. kamal jauharee dogra devki nandan 'shant haiku gazal hindi sattire. nav varsh panee rang sarasvati shabd vandana अगीत अगीत महाकाव्य अभियांत्रिकी अरविन्द मिश्रा अष्ट मात्रिक छंद आतंक-परिवार एक्य ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ल़ा बोर्ड ओबामा कलह कथा कवि कविता दिया काकोरी कांड कान्हा खुदा खेल गज़ल गणतंत्र दिवस गणेश गन्ना ग्यारस ग़ज़ल छंद गाँधी गीत नया साल गुरु चित्रगुप्त चेतन जज्वात जनगीत : हाँ बेटा जहां ज्ञान डा सत्य तसलीस दक्षिण भारत दिल से दिवाली दोहा दीप देव उठनी एकादशी देश दोहा दिवाली दोहा शिव दोहे धन तेरस धर्म धर्म-संस्कृति नवगीत नया साल नेताजी पत्र परिकल्पना पीस पार्टी पुरातत्व पूर्णिमा बर्मन प्रेम प्लीज़ बसंत शर्मा बेटी ब्लागरमीट भक्ति भजन भवन दोहा भाई दूज मानव माहिया मिथिलेश दुबे मुक्तक सलिला यादें रात रूप चतुर्दशी लखनऊ ब्लॉगर असोसिएशन का अध्यक्ष पद लारैब: हर बात हक़ बात शिव दोहा शुभकामनाएं श्रद्धांजलि षट्पदी संस्कृति सत्य समय समीक्षा नवगीत सरस्वती वंदना सुमन लोकसंघर्ष सोरठा सड़क पर हाइकु हाइकु गीत हाइकु सलिला हाथी हिंदी आरती होली ग़ज़ल ' Association का नया अध्यक्ष ' 'Taj mahal' 'The blessings' 'The nature' 'The purification of human heart ' 'Valentine day' 'charchashalimanch के सदस्य बनें और समाज को बेहतर बनाएँ' 'ibadat puja' 'अनाथ बच्चे-बच्चियों की दिल से सहायता करना' 'इस्लाम एक प्राकृतिक व्यवस्था है' 'एलबीए 'एलबीए और हिन्दी की बेहतरी के लिए विदुषी महिला अध्यक्ष' 'औरत' 'कविता' 'कितने ही दर्शन तो ईश्वर का वजूद ही नहीं मानते' 'कीटनाशक' 'क्या ईश्वर भी कभी अनीश्वरवादी हो सकता है ?' 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WILDLIFE. JUNGAL. Tips & Tricks WILDLIFE aag aankh aarati ajadee alankar alvida aman ka paigham amrit anchal anugeet chhand arab india relation arth asmyik hindi kavita atal biharee ayodhya balidan banee basant bhagat azad. bhajan bhasha bhav bimb bhojpuree bhojpuri doha bhoo bhopal book review bundelee chatushpadee chhatisgarhee chunautiyan chunav creation creatior daman dandkala chhand dard dard una ladakon ka desh dharm aur lekhan dhool dhuaan dil doha gazal dohe durmila chhand educational institute in india elegy emaan falak fasal galib ganesh datt sarasvat gantantra divas garal gas treagedy geeta chhand geetika ghalib gulf news haiku hamara dharm harish singh harsh hindee ke haiku hindi laghu katha hindi short story. kargil hindi shortstory hindi smriti geet hinsa aur ham http://sajiduser.blogspot.com/ http://www.sajiduser.blogspot.com/ imarat. india is great india. indian women and arabian shekh indipendence day jabalpur. jannah is man's destination jantantra jhulna chhand kabeer kaikeyee kamand chhand kamlinee kamroop chhand khalish khazana. kiran kriti charcha laghukatha lakhnaoo laloo laxmi lay lokneeti. loktantra lotus love manav mandir manhagaayee marhatha chhand maut meeran krishna megh mekal mirza ghalib narmada neta pakistan pita father's day prakriti prarthna pratibandh pratibha prem pyar quran and gayatri mantra rachna rachnakar radha rajneeti ram janm bhoomi ras sabab sada sakhee salgirah. sanjiv sansadji.com saraswati sat satyagrahee. sanjiv 'salil' shaheed shakeel badyoonee ship shiv shok geet shok samachar sincerity in intention sitasat siya soniya gandhi stuti sundar svasthya aur uchit ilaj svatantrata swaroopanand tadbeer talent. tam taqdeer the world is not enough tomorrow may be or not may be toofan tribhangi chhand ujala ummeed ved and quran ved mantra veenapanee vidyarthiji vivadit maamale aur ham vivek ranjan wildlife DUDHWA अ ध्यक्ष अंग्रेज़ी अंचरा अंतराग्नि अंतर्द्वंद्व अंतर्मंथन अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन अंतस अंधविश्वास अंशकालिक अनुदेशक अखंडता अगीतायन अग्ने अग्रवाल अचेतन अठखेली अति सुखा अभिलाषा अतीत अतुकांत कविता अदा अदावत अनमन अनवर जमाल अनाहत नाद. अनाहिता अनुकूला छंद अनुप्रास अनैतिकता अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस अन्धविश्वास अन्न अन्नकूट अन्ना हज़ारे अन्य कविताएँ अप:तत्व अपरा-शंभु संयोग अपराधीकरण अपशब्द अभिभावक अभियंता अभियान २६-२-२०२१ अभेद बुद्धि अमरकंटक छंद अमरेंद्र अनारायण अमोघ अस्त्र अम्बरीष श्रीवास्तव 'अम्बर' अरमां अर्धनारीश्वर अल्पना अल्लाह अवतार अशांति अशोभनीय - धन अश्वती तिरुनाळ गौरी लक्ष्मीभायी असार असीम आस्था अहं आँख आँवला आंकिक उपमान आंसू आचार्य भगवत दुबे आचार्य संजीव वर्मा "सलिल" आज आजादी आणविक परिवार आतंक की समस्या आतंक हैरान नज़रें आदत आदि-वाणी आदिशक्ति आभा सक्सेना आभूषण आरक्षण आर्टेमिस आलिंगन आलेख- मत करें उपयोग इनका आल्हा गीत भारतवारे बड़े लड़ैया आवश्यक सूचना आशनां आस्था आज़ाद शहीद दिवस इंडियन जिओटेक्नीकल सोसायटी जबलपुर इंडियन ब्लॉगर्स असोसिएशन इच्छा इच्छाएं इन्डली इन्डियन धारावाहिक इन्डिया गेट इमली ईषत इच्छा उ. प्र. राजनीति के ये घोटाले उक्ति उचित मार्ग उत्तर प्रदेश असोसिएसन उत्तर प्रदेश का सच उत्तर प्रदेश ब्लॉगर्स एसोसियेशन उदारीकरण उदासीनता उधार उपन्यासकार और पटकथा उमन्ग उर्दु उल्लाला छंद उषा ऋचाएं ऋतु ऋषि ऋषि अनंग एक तत्व एक रचना आगे मत जा एकाक्षरी श्लोक एतबार एश्वर्य एसिड की शीशी एसे गीत ऐसी तान ओउम ओमप्रकाश तिवारी औरत क्या है कंगना कछारन कथा निराली | कथा-गीत बूढ़ा बरगद कन्घा कन्या भ्रूण-हत्या कब क्या : जनवरी कब्र कर्नाटक कलम कलियुग के मोहन कलुष कल्पना कल्पना रामानी कवि लखनऊ कविता दिया २ कविता दुबे कवित्त कांता रॉय जबलपुर में कागतन्त्र है कागज़-कलम कानून काफिया काम-सृष्टि कामनाएं कामरूप छंद कामिनि कायदे कायस्थ कारण कारण-ब्रह्म कारोबार कार्य कार्यशाला दोहा से कुण्डलिया कार्यशाला : मुक्तक कार्यशाला दोहा से कुण्डलिया कार्यशाला पद कार्यशाला- ​​​​छंद बहर का मूल है- २ कार्यशाला: दोहा - कुण्डलिया कालकांज काव्य और छंद काव्य गोष्ठेी काव्य छंद काव्य शाला काव्यानुवाद किसान किसान माहिया कीर्तिदा कुंभ कुञ्ज गली कुरआन कृष्ण कुमार "बेदिल" कृष्ण कुमार 'बेदिल' कृष्णमोहन छंद कोरोना कौन क्यूं न हुआ क्रमिक विकास क्षणिका खुरचहा पति खुशबू खुशियों की थिरकन खुशी खेल-व्यवसाय खेळ खौफ गंगटोक सवैया गंगा दोहा गंगोदक सवैया गणतंत्र गणतंत्र दोहे गणितीय मुक्तक गरिमा सक्सेना गरीबी ग़ज़ल अंदाज़े-बयाँ गाँव की गोरी गांव की समस्या; लेख;शिव गाय की रोटी गाली गीत चिरैया गीत - सियाहरण गीत : नया साल गीत अम्बर का छोर गीत काम तमाम तमाम का गीत कौन हैं हम? 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नवगीत गोल क्यों? नवगीत घोंसले में नवगीत छोडो हाहाकार मियाँ! नवगीत जगो सूर्य आता है नवगीत त्रिपदिक नवगीत दर्पण का दिल नवगीत दिवाली नवगीत नव वर्ष नवगीत नागफनी उग आयी नवगीत निर्माणों के गीत नवगीत पहले गुना नवगीत भटक न जाए नवगीत भीड़ में नवगीत मिली दिहाडी नवगीत में नए रुझान नवगीत राम बचाए नवगीत रार ठानते नवगीत लोकतंत्र का पंछी नवगीत वह खासों में खास है नवगीत शिव नवगीत संक्रांति काल है नवगीत संग्रह नवगीत सत्याग्रह के नाम पर नवगीत समय वृक्ष नवगीत समीक्षा नवगीत सड़क पर नवगीत सड़क पर... नवगीत: उगना नित नवगीत: उड़ चल हंसा नवगीत: दीन प्रदर्शन नवगीत: नाम बड़े हैं नवगीत: भाग्य कुंडली नवगीत: लोकतंत्र का पंछी बेबस नवगीत: कुण्डी खटकी नवगीत: छोडो हाहाकार मियाँ! नवगीत: बजा बाँसुरी नवगीत: भारत आ रै नवगीत: रब की मर्ज़ी नवभारत टाईम्स नशा नाक की सर्जरी नाग नाभिक ऊर्जा नारि नारी मुक्ति नारी-भाव नाश प्रकृति का निर्निमेष निर्विकार निष्काम कर्म निष्ठुरता नीति व्यवहार नीति-नियम नीति-व्यवहार नीलकंठ नेकियां नेह नर्मदा तीर पर नेह-नाता नैतिकता नैन-डोर नैना नौ कन्या न्यू-ईयर गिफ्ट नज़र नज़ारा पंचौदन अजः पद चिन्ह पद-चिन्ह पद्मिनी परब्रह्म परम-पिता परमाणु परमानंद परमार्थ परलोक परहित पराग पराया-धन पल- छिन पशु पहलू पाँच पर्व पायल पिचकारी पीयूषवर्ष छंद पीर पुरुषार्थ पुरोवाक : यह बगुला मन पुरोवाक ओस की बूँद पुरोवाक केरल एक झाँकी पुरोवाक बुधिया लेता टोह पुरोवाक् पुलिस पूजा पूर्ण-ब्रह्म पूर्णकाम पृथ्वी पैरोडी पोखर ठोके दावा प्यार प्रकृति प्रकृति दोहन प्रकृति बादल प्रजापति प्रणम्य शहीद प्रणय प्रणय -दीप प्रणय के पल प्रतिकण प्रतियोगिता प्रत्रकार प्रदूषण प्रभाव प्रभु प्रभु ज्ञान प्रश्न मन के प्राण शर्मा प्रातस्मरण स्तोत्र प्रिय प्रवास प्रीति के रंग प्रीति-चलन प्रेम के छःलक्षण प्रेम प्याला प्रेम ममता फरवरी कब क्या? 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आप सभी को हर्ष और बधाई के साथ यह सूचना देना चाहता हूँ कि LBA अपनी सफलता के उस मुक़ाम तक आ चुका है कि इसकी सदस्यता संख्या अपने चरण तक पहुँच चुकी है और जो ब्लॉगर्स बन्धु इससे जुड़ने की इच्छा रख रहे हैं और जिनके मेल मुझे मिल रहे हैं उसको मद्देनज़र रखते हुए नयी सदस्यता के इच्छुक ब्लॉगर्स को एक और भी शक्तिशाली और नया मंच का गठन आज किया जा रहा है जिसका नाम है 'ऑल इंडिया ब्लॉगर्स असोसिएशन' अर्थात AIBA ! इस मंच का हिस्सा सभी भारतीय बन सकते है, फ़िर चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में रह रहें हों !!!
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