'ईश्वर-अल्लाह तेरो नाम' सदा गाया है वतन के रखवालों ने
हम पूछते हैं कि इस साझा मंच पे क्यों झूठ और कुफ़्र बका जा रहा है ?
कुफ़्र अर्थात नास्तिकता ।
क्या देश के लिए केवल वही नास्तिक बलिदान कर सकता है जिसकी ज़बान पर ईश्वर-अल्लाह का नाम न हो ?
टीपू सुल्तान से लेकर कर्नल शाहनवाज़ और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद तक सभी मुसलमानों की ज़बान पर अल्लाह का नाम था और ऐसे ही मंगल पांडे से लेकर गांधी और रामप्रसाद बिस्मिल तक सभी हिंदू सरफ़रोशों की ज़बान पर ईश्वर का नाम था।
@ डा. श्याम गुप्ता जी ! ईशनिंदा से बाज़ आ जाईये।
देशभक्तों के बारे में भ्रम फैलाने से बाज़ आ जाईये।
आस्था का मख़ौल उड़ाने से बाज़ आ जाईये।
नास्तिकता के प्रचार से तौबा कीजिए और लौट आईये ईमान की ओर जो कि आपको मेरे ज़रिये से मिल सकता है ।
आपकी सेवा हेतु सदा तत्पर
आपका छोटा भाई अनवर
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aaj gantantra divas hai .swatant divas nahi
क्या बात है अनवर जी--... आप जान बूझकर अपने अलावा हर पोस्ट को ईश निन्दा की पोस्ट घोषित करके क्या हासिल करना चाहते हैं....
क्या अनवर भाई क्यों इतना नाराज़ हो गए है सबसे. श्याम भाई की कविता में इश निंदा नहीं है. बल्कि उसका भाव है की आज लोग राजनीती में धर्म को जोड़कर, ईश्वर अल्लाह का नाम लेकर धर्म को भी बदनाम करते है जो कही से भी उचित नहीं है. यह सच है की ईश्वर, खुदा का नाम लेकर आज़ादी के रणबाकुरे अपनी अपनी मातृभूमि पर कुर्बान हो गए, किन्तु आज क्या हो रहा है. इन घटिया राजनीतिज्ञों ने ईश्वर अल्लाह को बदनाम करके रख दिया. हर महापुरुषों को राजनितिक पार्टी का सिम्बल बना दिया है. शायद यही भाव है श्याम भाई का. किन्तु आपने ही कहा था की मैं अल्पबुद्धि हू. हो सकता है मेरे जैसे मूढ़ के समझ में न आया हो. आप बड़े भाई है आपको तो मैं समझा नहीं सकता.