WELCOME

TO LBS

#

मंगलवार, मई 04, 2010

मंगलवार, मई 04, 2010 2

संस्‍कृति की रक्षा संस्‍कृत भाषा का प्रचार- यहां चटका लगायें।। 

प्रिय महक जी
अच्‍छा लगा कि ये सारे तथ्‍य आपकी जिज्ञासा के अंग मात्र हैं।
मैं आपके सारे शंकाओं का समाधान करना चाहूंगा किन्‍तु मेरी लिखने की गति थोडा कम है अत: ये समाधान मैं आपको टुकडो में दूंगा।

सब से पहले मनुस्‍मृति जनित शंकाओं का समाधान प्रस्‍तुत कर रहा हूं।
किन्‍तु यहां किसी भी शंका को समाधित करने से पहले मैं एक बात अवश्‍य चाहूंगा कि आप इन्‍हे समसामयिक युग के दृष्टि कोण से देखें क्‍यूकि कोई भी ग्रन्‍थ अपने प्रणयन के काल की समसामयिक समस्‍याओं के निदान हेतु ही लिखा जाता है जो कि जरूरी नहीं कि हर काल में चरितार्थ हो और दूसरी बात यह कि कोई भी परम्‍परा समाज को सुधारने या सही मार्ग पर ले जाने के लिये आती है, हां ये अलग बात है कि उस परम्‍परा को लोग धीरे -2 रूढि कर देते हैं जो समाज के अहित का कारण भी बनने लग जाती है पर इसमें उस परम्‍परा या उस परम्‍परा का विधान करने वाले लोगों का कोई दोष नहीं निकाला जाना चाहिये।

मै आपको एक छोटा सा उदाहरण देना चाहूंगा।
सती प्रथा हमारे समाज का अभिषाप मानी जाती है जिसका उन्‍मूलन बडे विवादों के वाद किया जा सका।
इस प्रथा को आज के समय में कोई भी संभ्रान्‍त व्‍यक्ति उचित नहीं ठहरायेगा पर थोडा सा सोंचकर बताइये कि क्‍या ये उस समय भी इतना ही बुरा था जब लोगों की पत्नियों को आक्रमणकारी सेनायें बुरी तरह से यौनाचार हेतु प्रयोग करती थीं।
जबतक पति जीवित रहता था तबतक तो कदाचित वो पत्‍नी के सम्‍मान की रक्षा कर लेता था पर मरने के बाद तो नहीं कर सकता था तो उस समय अगर ये व्‍यवस्‍था लागू थी तो इसका क्रियान्‍वयन करने वाला व्‍यक्ति प्रमत्‍त तो नहीं कहा जा सकता।
यहां ये भी प्रश्‍न उठ सकता है कि बहुत से लोग इस परिस्थिति से समझौता कर लेते रहे होंगे तो उनकी पत्नियों के लिये जबरदस्‍ती क्‍यूं की जा‍ती थी तो इसका उत्‍तर सिर्फ इतना है कि अगर एक स्‍त्री को इस तरह की छूट दे दी जाती तो कदाचित और भी औरतें मृत्‍यु के डर से आक्रान्‍ताओं की रखैल बनने के लिये तैयार हो जातीं और फिर आप कल्‍पना कर सकते हैं कि आज का भारत कैसा होता या आज की स्थिति क्‍या होती। शायद भारतीय संस्‍कृति का नाम भी मिट गया होता।
अब उस समय की पुस्‍‍तकों में सती प्रथा या बाल विवाह की बहुत ही बडाई होती रही होगी तो अगर आज के परिवेश में हम उन पुस्‍तकों को देखें तो हमे खासा अनुचित लगेगा पर क्‍या हम उन पुस्‍तकों को बिल्‍कुल ही गलत ठहरा सकते हैं | नहीं ,,, हमें उन्‍हें गलत कहने का अधिकार नहीं है। पर हां हम आज उन पुस्‍तकों की मान कर सतीप्रथा या बाल विवाह भी नहीं ला सकते अत: हमें उनसे केवल समसामयिक विषयों पर चरितार्थ हो रहे विषयों का चयन ही करना चाहिये।

ठीक इसी क्रम में मै अब आपके मनुस्‍मृति जनित शंकाओं का समाधान करता हूं।
वस्‍तुत: आज जो मनुस्‍मृति ग्रन्‍थ प्राप्‍त होता है वह प्राचीन मनुस्‍मृति का प्रतिनिधि मात्र करता है। इस ग्रन्‍थ्‍ा के साथ बहुतों ने बहुत ही खिलवाड किया ।
फिर भी अगर यही इसका मूल रूप रहा हो तो भी इसके विषय में कुप्रचार इसकी प्राय: गलत ब्‍याख्‍या के कारण हुई।
आपको इस बात की आपत्ति है कि ब्राह्मण ईश्‍वर के मुख से क्‍यूं उत्‍पन्‍न हुआ और शूद्र पैरों से तो इससे क्‍या शूद्र की समाज में महत्‍ता समाप्‍त हो जाती है।
कतई नहीं।
जरा आपके शरीर में ही ये व्‍यवस्‍थाएं लागू करके देखते हैं।
अगर ब्राह्मण सर्वश्रेष्‍ठ है और शूद्र सर्वथा महत्‍व हीन तो आपके शरीर से शूद्र हटा दिये जाएं और उसके बदले आपको एक ब्राह्मण और दे दिया जाए।
अर्थात् अब आपको दो मुख हो गये और आपके पैर हटा दिये गये । कल्‍पना कीजिये क्‍या आप बहुत सहज महसूस कर रहे हैं।
आपके पहले प्रश्‍न का यही उत्‍तर बन पडता है ।
दूसरी बात आपने इस ब्‍यवस्‍था को जाति व्‍यवस्‍था कहीं नहीं सुना होगा क्‍यूकि ये वर्ण व्‍यवस्‍था थी जो ब्‍यक्तियों के कार्य के अनुसार निर्धारित होती थी।  अर्थात् जिसके जो कर्म होते थे उनको उसी तरह के कार्य दे दिये जाते थे और उसको उसी वर्ग का मान लिया जाता था। अगर किसी ब्राह्मण का पुत्र भी किसी शूद्र की भांति प्रवित्‍त होता था तो उसे शूद्र की ही संज्ञा दे दी जाती थी पर बाद में इस वर्ण व्‍यवस्‍था को जाति व्‍यवस्‍था मान लिया गया तो इसमें महाराज मनु या उनके सिद्धान्‍त गलत क्‍यूं कहे जाएं। 
वर्ण व्‍यवस्‍था का एक अद्भुत उदाहरण दे रहा हूं
कारूरहं ततो भिषगुपलप्रक्षिणी नना।
नानाधियो वसूयवोनु गा इव तस्थिमेन्‍द्रायेन्‍दो परि स्रव।। ऋग्वेद 9,112,3
उपरोक्‍त मन्‍त्र में एक ही परिवार के लोगों को भिन्‍न -2 कर्म का सम्‍पादन करते हुए दिखाया गया है।
मन्‍त्रार्थ- मैं मन्‍त्रों का सम्‍पादन करता हूं1। हमारे  पुत्र वैद्य हैं2, मेरी कन्‍या बालू से जौ आदि सेंकती है3 इस तरह भिन्‍न-2 कार्यो का सम्‍पादन करते हुए भी जिस तरह गोपालक गौ की सेवा करते है उसी तरह हे सोमदेव हम आपकी सेवा करते हैं। आप इन्‍द्रदेव के निमित्‍त प्रवाहित हों।
इस मन्‍त्र में एक ही परिवार में तीन कर्म दिये हैं और किसी को भी किसी से श्रेष्‍ठ या निम्‍न नहीं माना गया है।

कहना सिर्फ इतना है मित्र कि थोडा सा वैशम्‍य देखकर किसी बात का गलत अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिये और सम्‍भव है अब आपकी इस समस्‍या का निराकरण हो गया हो कि किसी जाति परम्‍परा को उंच या नीच नहीं कहा गया, मतलब अगर कोई शूद्र है तो जरूरी नहीं उसका सत्‍कर्म करने वाला पुत्र भी शूद्र श्रेणी ही ग्रहण करे।

आपकी दूसरी समस्‍या
श्रीराम ने शम्‍बूक नामक शूद्र का वध क्‍यूं किया , जबकि वो तप कर रहा था।
आप के इस प्रश्‍न का उत्‍तर इस प्रकार है-
श्री राम के राज्‍य में सर्वत्र कार्यप्रणाली का श्रेष्‍ठतम प्रतिपादन था अर्थात जिस के हिस्‍से में जो कार्य था वो अपने कार्य के प्रति पूर्ण समर्पित था अत: राज्‍य में अकाल मृत्‍यु नहीं होती थी।
शम्‍बूक एक ब्राह्मण द्रोही शूद्र था और तब के ब्राह्मण आज के ब्राह्मणों की तरह नहीं थे जो कर्म से तो शूद हों और ब्राह्मण होने का आडम्‍बर करें।
शम्‍बूक सामाजिक व्‍यवस्‍था के निर्माण के लिये नहीं अपितु ब्राह्मण वर्ग को नीचा दिखलाने के लिये तप कर रहा था।
और तो और उसके तप का माध्‍यम हठयोग था तथा वह मांसाहार तथा अभक्ष्‍यादिकों से तप का पोषण कर रहा था। इस तरह किया गया तप रामराज्‍य के लिये घातक सिद्ध हुआ और एक ब्राह्मण पुत्र की अकाल मृत्‍यु हो गई । इस कारण श्री राम ने उसका वध कर दिया। किसी को नीचा दिखाने के लिये किया गया कोई महान कार्य भी निरा तुच्‍छ माना जाता है।
आपने दक्ष प्रजापति के यज्ञ के विषय में जरूर सुना होगा, दक्ष तो ब्रह्मा का पुत्र था फिर भी शिव की दुर्भावना वश किया हुआ उसका यज्ञ नष्‍ट कर दिया गया और उसकी दुर्गति हुई।

शम्‍बूक की तरह ही रावण का प्रसंग ले सकते हैं।
रावण तो महर्षि पुलत्‍स्‍य (सप्‍तर्षियों मे से एक ऋषि) का नाती था, पर उसके आचार विचार निरा राक्षसों के थे अब अगर कोई ये कहे कि राम क्षत्रिय थे अत: ब्राह्मण का उत्‍थान देख नहीं सके और उसका वध कर दिया तो इसे आप क्‍या कहेंगे।
ये तो एकांगी विचार का ही परिपोषण है।
फिर आप ये क्‍यूं नहीं देखते कि राम ने शस्‍त्र विद्या महर्षि विश्‍वामित्र से ली थी जो एक क्षत्रिय थे ।फिर भी स्‍वयं महर्षि वशिष्‍ठ ने उन्‍हें ब्रह्मर्षि कहा था और श्री राम उन्‍हें नत होते थे। क्‍या इस प्रसंग से जाति व्‍यवस्‍था का लेश भी दिखाई देता है।
तो जिन श्रीराम ने एक क्षत्रिय को गुरू माना , एक ब्राह्मण को मृत्‍युदण्‍ड दिया अगर उन्‍होंने शम्‍बूक को मारा तो क्‍या उनकी व्‍यवस्‍था में खोट आ गयी। आप स्‍वयं विचार कीजियेगा , उत्‍तर आपका अपना मन ही दे देगा।

तीसरी शंका आपके मन्‍त्रार्थ के गलत अध्‍ययन के कारण है

यहां मैं मन्‍त्रार्थ दे रहा हूं।

वैश्‍य:,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, चार्हति ।।374
 जो वैश्‍य परस्‍त्री को एक वर्ष तक घर मे रखे उसे सर्वस्‍व हरण का दण्‍ड देना चाहिये, क्षत्रिय द्वारा एसा करने पर सहस्र पणों का तथा शूद्र द्वारा एसा करने पर मूत्र से सिर मुडाने का दण्‍ड देना चाहिये।

उभावपि,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, कटाग्निना।।375
जो वैश्‍य और क्षत्रिय रक्षित ब्राह्मणी से संभोग करते हैं उन्‍हे वही दण्‍ड देना चाहिये जो इस कृत्‍य के लिये शूद्र को मिलती है या फिर उन्‍हें चटाई में लपेटकर आग में झोंक देना चाहिये।

इसी तरह से अन्‍य के भी मन्‍त्रार्थ वैभिन्‍य के कारण ही आपकी ये शंका उत्‍पन्‍न हुई है अत: इसमें आपकी कोई भी गलती नहीं मानता हूं।।


रही बात इनके शवों को अलग-2 दिशाओं से ले जाने की तो इसमें कोई भी दुर्भावना नहीं दिखती क्‍यूकि आज भी ज्‍यादातर ग्रामों मे शूद्रों की बस्तियां दक्षिण में ही होती है अत: यह केवल इस लिये ही नियमित किया गया कि कदाचित कोई भी वर्गद्वन्‍द्व न होने पाये। वस्‍तुत: ग्रन्‍थ का आशय केवल समाज में शान्ति व्‍यवस्‍था बनाये रखने से ही है अत: कुछ नियम ऐसे भी बने थे जो आज अप्रासंगिक होते दिख रहे हैं।

दण्‍ड विधान वैभिन्‍य इस कारण था कि एक ब्राह्मण जो समाज में उच्‍च पदासीन था, लोगों के मानस पटल पर जिसका सम्‍मानित प्रतिबिम्‍ब था उसको समाज के मध्‍य अपमानित करना ही मृत्‍यु के समान था पर क्रम नीचे जाने पर अगर आप एक शूद्र को उसके किसी जघन्‍य कृत्‍य के लिये केवल अपमानित कर के छोड दिया जाता तो उसकी कोई हानि न होती क्‍यूंकि समाज उससे ब्राह्मण का सा सम्‍मानित व्‍यवहार नहीं करता था , और इस थोडे से दण्‍ड प्राप्‍त होने पर वह वही कृत्‍य दुवारा भी उतने ही सानन्‍द करता इसलिये कठोर दण्‍ड के नियम यथोक्‍त निर्मित हुए।।



प्रिय महक जी
 आशा है आपकी जिज्ञासा का कुछ तो समन कर सका हूंगा।
आपके शेष प्रश्‍नों का उत्‍तर भी इसी क्रम में देता रहूंगा पर अगर मेरे द्वारा दिये गये इन उत्‍तरों में आपकी जरा सी भी श्रद्धा दिखी तो।

एक बात और कहना चाहूंगा ।  आज हमारे देश की जो स्थिति है वो आप स्‍वयं ही देख रहे हैं । इसमें बताने जैसा कुछ भी नहीं है। हमारे देश के नेतागण ही इस देश को नष्‍ट करने पर लगे हैं, और फिर उपर से पाकिस्‍तान , बांग्‍लादेश, चीन , अफगान आदि देशों की सीमाओं से कुछ न कुछ अनिष्‍ट हो ही रहा है तो हमारा आज कर्तब्‍य ये बनता है कि हम भारत को भारत ही रहने दे इसे हिन्‍दू या मुस्लिम कौम में न बांटें और ये कार्य तभी सम्‍भव हो सकेगा जब हम अपने किसी भी धर्मग्रन्‍थ पर कटाक्ष न करें। चाहे वो वेद हों, पुराण हों, कुरान हों या गुरूग्रन्‍थ साहब हो । ये सारे ग्रन्‍थ बडे पवित्र हैं तथा इनमें हमारे प्राण बसते हैं अत: इनपर कुछ भी कटाक्ष करने से हमें तो कुछ नहीं मिलने वाला अपितु आपसी द्वेष ही बढेगा।

और जरा ये बताइये कि
क्‍या समाज इन ग्रन्‍थों के हिसाब से आज या कभी  भी चला है, अर्थात् क्‍या वो सारी व्‍यवस्‍थाएं लोगों द्वारा पालित हैं, और अगर नहीं तो क्‍यूं बिना वजह इन ग्रन्‍थों की टांग खींची जाए कि इनमें ये लिखा है , उनमें वो लिखा है। इसका क्‍या मतलब बनता है।
आज का जो कानून बना है क्‍या लोग उसका शत् प्रतिशत् पालन करते हैं या कि आज के कानून में जो लिखा है वो सब सही ही लिखा है, और अगर एसा नहीं है  फिर भी तो लोग उसे मानते तो हैं ही न। क्‍यूं नहीं कोई इस पूरी कानून ब्‍यवस्‍था की कमियों के खिलाफ बगावत करता है।
कई बार हमें हमारे मां पिता तक से कुछ अप्रत्‍याशित् या अनुचित दण्‍ड प्राप्‍त हो जाता है या कुछ ऐसा व्‍यवहार होता है जिसकी हम आशा भी नहीं करते होते हैं तो क्‍या यह उचित है कि हम उनका समाज के बीच में अपमान करें या प्रतिरोध करें।।

अगर आप इन बातों से सहमत हैं तो शायद फिर आपको उन प्रश्‍नों के उत्‍तर की आशा न रहेगी।
शेष आपकी इच्‍छा।

आखिर में एक निवेदन सभी ब्‍लागर मित्रों से है कि कृपया अपनी तर्कशक्ति तथा लेखन शक्ति का प्रयोग व अपनी उर्जा को समाज के निर्माण में तथा भारत की उन्‍नति हेतु लगायें इससे हमारे व्‍यक्तित्‍व का विकास तो होगा ही , साथ ही साथ हमारा भारत, अखण्‍ड भारत बनेगा ।

कभी भी किसी भी धर्म या धार्मिक ग्रन्‍थों पर कटाक्ष करने से पहले ये जरूर विचार करियेगा कि जब भी देश पर संकट पडा है तो सारे भारतीय केवल भारतीय होते हैं न कि हिन्‍दू, मुसलमान ।  आजादी की लडाई भी हमने साथ ही लडी है।
धर्मवाद और जातिवाद तो कमीने नेताओं का शगल है। हमें तो जो भी वाद चलाना है वो हमारे भारत के लिये ही चलाना है अत: हांथ जोडकर निवेदन करता हूं कि संयुक्‍त भारत परिवार को विघटित न होने दें अन्‍यथा परिणाम किसी भी व्‍यक्ति के लिये हितकर नहीं होगा।।

आप लोगों का सहयोग एक सुरक्षित भारत का निर्माण करेगा।।

जय हिन्‍द




2 पाठकों ने अपनी राय दी है, कृपया आप भी दें!

  1. anand ji, jab tak ham sab ekjut hokar desh v samaj ke baare me nahi sochenge tab tak desh ka bhala nahi hoga. apko bahut-bahut dhanywad.

  2. आनन्द जी, आपने जो बहुमूल्य जानकारी दी उसके लिये आप बधाई के पात्र है.

footer

भईया-जन को ये सलाह है की वह LUCKNOW BLOGGERS' ASSOCIATION को Google Chrome ब्राउज़र पर ही खोले जिससे उन्हें ब्लॉग पढने में और अधिक आनंद आएगा !

पाठक आवाजाही

Founder & Convener (संस्थापक व संयोजक)

Founder & Convener (संस्थापक व संयोजक)
SALEEM KHAN

Mr. President

Mr. President
Dr. Mahfooz Ali

Labels

Suman सलीम ख़ान acharya sanjiv 'salil' 'DR. ANWER JAMAL' samyik hindi kavita रवीन्द्र प्रभात DR. ANWER JAMAL ब्लोगोत्सव-2010 contemporaray hindi poetry लेख acharya sanjiv verma 'salil' geet navgeet Dabir News शिव jabalpur संस्‍कृतं- भारतस्‍य जीवनम् india प्रबल प्रताप सिंह hindi gazal कविता chhand muktika दुबे contemporary hindi poetry hindi chhand ईश्वर जीवन विज्ञान doha sharda कविताएँ नारी हिन्दी EJAZ AHMAD IDREESI LBA रूबरू hindi jangal madhya pradesh. muktak swatantrata divas कर्म महफूज़ अली माया राधा व्यंग्य सृष्टि 'Ayaz' 'कामसूत्र' 007 indian bond Dr.Aditya Kumar anugeet bharat chaupade. hindi chaupade. hindi chhnad de. kamal jauharee dogra devki nandan 'shant haiku gazal hindi sattire. nav varsh panee rang sarasvati shabd vandana अगीत अगीत महाकाव्य अरविन्द मिश्रा आतंक-परिवार आलेख एक्य ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ल़ा बोर्ड कवि काकोरी कांड कान्हा कृष्ण खुदा खेल गज़ल ग़ज़ल छंद चेतन जज्वात जहां ज्ञान डा सत्य दक्षिण भारत दिल से दीप धर्म धर्म-संस्कृति पीस पार्टी प्रेम प्लीज़ बेटी ब्लागरमीट भक्ति मन मानव मिथिलेश दुबे यादें लखनऊ ब्लॉगर असोसिएशन का अध्यक्ष पद लारैब: हर बात हक़ बात शुभकामनाएं श्रद्धांजलि संस्कृति सत्य सुमन लोकसंघर्ष ' Association का नया अध्यक्ष ' 'Taj mahal' 'The blessings' 'The nature' 'The purification of human heart ' 'Valentine day' 'charchashalimanch के सदस्य बनें और समाज को बेहतर बनाएँ' 'ibadat puja' 'अनाथ बच्चे-बच्चियों की दिल से सहायता करना' 'इस्लाम एक प्राकृतिक व्यवस्था है' 'एलबीए 'एलबीए और हिन्दी की बेहतरी के लिए विदुषी महिला अध्यक्ष' 'औरत' 'कविता' 'कितने ही दर्शन तो ईश्वर का वजूद ही नहीं मानते' 'कीटनाशक' 'क्या ईश्वर भी कभी अनीश्वरवादी हो सकता है ?' 'गुस्सा एक टॉनिक' 'चर्चित ब्लॉगर' 'चौथी दुनिया' 'ज्ञान पाने कि रीत' 'ज्वलंत समस्याओं का निवारण' 'देवता और अवतार' 'देश की अखंडता की रक्षा करने वाले मुसलमान''देश की अखंडता की रक्षा करने वाले' 'देश के शिक्षण तंत्र' 'धरती पर स्वर्ग का साक्षात्कार' 'धर्म पर पाबंदी 'न्याय के गुण से युक्त राजा ' 'पंडित और शास्त्री' 'पसंदीदा ब्लॉगर-समूह' 'पाकिस्तान के ज्यादातर हिस्सों में पंजाबी भाषा बोली जाती है' 'भाई-बहनों' 'मनोरंजन' 'मुझे सवाल दीजिए मैं आपको जवाब दूंगा' 'मुन्नी बदनाम हुई' 'मुसलमानों का दमन' 'यादगार पोस्ट' 'रामायण की कहानी' 'वर्णवादी' 'विदेशी मुद्रा' 'वेश्यालयों के देश में' 'वफ़ादारी' 'शक है जिन्हें भी दोस्तो हक़ की ज़ात में माँ की नज़ीर ला न सके कायनात में' 'शांति के लिए वेद कुरआन' 'शिरडी' 'शीला की जवानी' 'समाज का सबसे बड़ा विनाशक कट्टरता' 'सय्यद मुहम्मद मासूम साहब को ब्लॉग जगत में एस. एम. मासूम के नाम से' 'सरवरे कायनात' 'हठयोगी शठ योगी महायोगी' 'हिंदी ब्लॉगिंग' 'हिजड़े और तवायफ़ें' 'हृदयरोगियों के लिए' 1098 2010 2011 3MUSLIMs 786 : दुबे Article in Print Media DUDHWA Distance Education Dr Zakir Naik ELEPHANT Frauds Ghanshyam Maurya Hazrat Ali (RA) Historical IIT Kanpur Iman Internet Kafir Kisan. bharat LBA की नई समस्यां LBA की नयी अध्यक्षा LBA के मार्ग-दर्शक नीति नियम LBA के हनुमान LBA परिवार Lucknow Lucknow Bloggers' Association Natural way Part Time Instructor Poetess Rishi Sarva Siksha Abhiyan Shorthand Society Stenography TIGER. WILDLIFE. JUNGAL. Tips & Tricks WILDLIFE aag aankh aarati ajadee alankar alvida aman ka paigham amrit anchal anugeet chhand arab india relation arth asmyik hindi kavita atal biharee ayodhya balidan banee basant bhagat azad. bhajan bhasha bhav bimb bhojpuree bhojpuri doha bhoo bhopal book review bundelee chatushpadee chhatisgarhee chunautiyan chunav creation creatior daman dandkala chhand dard dard una ladakon ka desh dharm aur lekhan dhool dhuaan dil doha gazal dohe durmila chhand educational institute in india elegy emaan falak fasal galib ganesh datt sarasvat gantantra divas garal gas treagedy geeta chhand geetika ghalib gulf news haiku hamara dharm harish singh harsh hindee ke haiku hindi laghu katha hindi short story. kargil hindi shortstory hindi smriti geet hinsa aur ham http://sajiduser.blogspot.com/ http://www.sajiduser.blogspot.com/ imarat. india is great india. indian women and arabian shekh indipendence day jabalpur. jannah is man's destination jantantra jhulna chhand kabeer kaikeyee kamand chhand kamlinee kamroop chhand khalish khazana. kiran kriti charcha laghukatha lakhnaoo laloo laxmi lay lokneeti. loktantra lotus love manav mandir manhagaayee marhatha chhand maut meeran krishna megh mekal mirza ghalib narmada neta pakistan pita father's day prakriti prarthna pratibandh pratibha prem pyar quran and gayatri mantra rachna rachnakar radha rajneeti ram janm bhoomi ras sabab sada sakhee salgirah. sanjiv sansadji.com saraswati sat satyagrahee. sanjiv 'salil' shaheed shakeel badyoonee ship shiv shok geet shok samachar sincerity in intention sitasat siya soniya gandhi stuti sundar svasthya aur uchit ilaj svatantrata swaroopanand tadbeer talent. tam taqdeer the world is not enough tomorrow may be or not may be toofan tribhangi chhand ujala ummeed ved and quran ved mantra veenapanee vidyarthiji vivadit maamale aur ham vivek ranjan wildlife DUDHWA अ ध्यक्ष अंग्रेज़ी अंचरा अंतराग्नि अंतर्द्वंद्व अंतर्मंथन अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन अंतस अंधविश्वास अंशकालिक अनुदेशक अखंडता अगीतायन अग्ने अचेतन अठखेली अति सुखा अभिलाषा अतुकांत कविता अदा अदावत अनमन अनवर जमाल अनाहत नाद. अनैतिकता अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस अन्धविश्वास अन्न अन्ना हज़ारे अन्य कविताएँ अप:तत्व अपरा-शंभु संयोग अपराधीकरण अपशब्द अभिभावक अभेद बुद्धि अमोघ अस्त्र अरमां अर्धनारीश्वर अल्पना अल्लाह अवतार अशांति अशोभनीय - धन असार अहं आंसू आज आजादी आणविक परिवार आतंक की समस्या आतंक हैरान नज़रें आदत आदि-वाणी आदिशक्ति आभूषण आरक्षण आलिंगन आवश्यक सूचना आशनां आस्था आज़ाद शहीद दिवस इंडियन ब्लॉगर्स असोसिएशन इच्छा इच्छाएं इन्डली इन्डियन धारावाहिक इन्डिया गेट इमली ईषत इच्छा उ. प्र. राजनीति के ये घोटाले उक्ति उचित मार्ग उत्तर प्रदेश असोसिएसन उत्तर प्रदेश का सच उत्तर प्रदेश ब्लॉगर्स एसोसियेशन उदारीकरण उदासीनता उधार उपन्यासकार और पटकथा उमन्ग उर्दु ऋचाएं ऋषि ऋषि अनंग एक तत्व एतबार एश्वर्य एसे गीत ऐसी तान ओउम औरत क्या है कंगना कछारन कथा निराली | कन्घा कन्या भ्रूण-हत्या कब्र कर्नाटक कलम कलियुग के मोहन कलुष कवि लखनऊ कविता दुबे कागज़-कलम काफिया काम-सृष्टि कामनाएं कामिनि कारण कारण-ब्रह्म कारोबार कार्य कालकांज काव्य गोष्ठेी कीर्तिदा कुंभ कुञ्ज गली कुरआन कौन क्यूं न हुआ क्रमिक विकास खुरचहा पति खुशबू खुशियों की थिरकन खुशी खेल-व्यवसाय खेळ खौफ गणतंत्र दिवस गरीबी ग़ज़ल अंदाज़े-बयाँ गाँव की गोरी गांव की समस्या; लेख;शिव गाय की रोटी गाली गीत गीत ज़ुल्फ़ गुफ़्तगू गुब्बारे गुमाँ गुमां गुरु गूढ़ प्रश्न गोरस गोष्ठी गौ-रक्षा गौधूली ग्रह ग्लोबलाइजेशन ग्वाल | घण्टा-घर चला जारहा कौन चाँद-चकोरी चाहत चिद-बीज चुनाव और मतदान चूल्हे चौके की खटपट छत जग जनरल जन्म जन्माष्टमी जप जल जल -युद्ध ज़ाकिर अली 'रजनीश' जाति धर्म जीवन-घृत जोक्स joks ज्योति झन्डा रोहण झर-झर टुकड़े टेक्ट टॉप ब्लॉगर टोपी डंके की चोट पर डर डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट में हाथियों की मौत के बाद सरकार को आया होश elephant तनहाई तन्मात्राएँ तार्किक तुम तुलसी चौरा तूलिका तृप्ति तेरा स्वर नर्तन तेरेी त्रिआयामी पदार्थ सृष्टि दक्ष दम दयानंद सरस्वती दरी दर्शन दलाल और खरीददार दलित समाज दहेज़ दायित्व दावानल से गड़बड़ाया दुधवा का पारिस्थितिकीय तंत्र दिल टुकड़े दिल दास्ताँ दीप-पर्व दीपावली दीपित दीया दुनिया दुबे -कविता दुर्योधन दृष्टा देवता देवी भक्त देश देश एकता देशद्रोहियों और आतंकवादियों देह व्यापार दोषों को त्याग दोहे दौलत के पुजारी द्रष्टा -दृष्टि द्रोपदी द्रौपदी द्वंद्व द्विविधा धंधा धनार्जन धर्म निरपेक्षिता धर्म मानव-धर्म धर्म या अधर्म ?' धर्म राज धर्मराज धांसू नक्षत्र नया साल नरसंहार नव अन्न नव वर्ष नव-स्रिजन... नवभारत टाईम्स नशा नाभिक ऊर्जा नारि नारी मुक्ति नारी-भाव नाश प्रकृति का निर्निमेष निर्विकार निष्काम कर्म निष्ठुरता नीति व्यवहार नीति-नियम नीति-व्यवहार नीलकंठ नेकियां नैतिकता नैन-डोर नैना नौ कन्या न्यू-ईयर गिफ्ट नज़र नज़ारा पंचौदन अजः पत्र पद चिन्ह पद-चिन्ह परब्रह्म परम-पिता परमाणु परमानंद परमार्थ परलोक परहित पराग पराया-धन परिकल्पना पल- छिन पशु पहलू पायल पिचकारी पीर पुरुषार्थ पुलिस पूजा पूर्ण-ब्रह्म पूर्णकाम पृथ्वी प्यार प्रकृति प्रकृति दोहन प्रकृति बादल प्रजापति प्रणम्य शहीद प्रणय प्रणय -दीप प्रणय के पल प्रतिकण प्रतियोगिता प्रत्रकार प्रदूषण प्रभाव प्रभु प्रभु ज्ञान प्रश्न मन के प्रिय प्रवास प्रीति के रंग प्रीति-चलन प्रेम के छःलक्षण प्रेम प्याला प्रेम ममता बंगलोर . कर्णाटक बंगालूरू बंधन व मुक्ति नारी बच्चे बजरंग बली बद्दुआ बन्गलूरू बयान बरसाना बरसानौ बलि बसंत बसंतोत्सव/मदनोत्सव बहादुरी बहु बहुरंगी संस्कृति बाढ़ ने बिगाड़ा पशुपालन कारोबार बात बापू बाबा अम्बेडकर साहब बाबा संस्कृति बिग-बेंग बिगबेंग ब्रह्म ब्रह्मा ब्रह्माण्ड ब्रिषभानु ब्लागिंग ब्लॉगरों का सम्मान ब्लोग नगरी ब्लोगोत्सव- २०१० भगवा रंग भारत भारत की रमणियाँ भारत जय हिन्द भारत भूमि भारत माता भारत रत्न भाव सप्रेषण भाषा भूख भेदाभेद परे भ्रष्टाचार मंजिल मंदिर मस्जिद मटुकी मतदाता मथानी मथुरा मदरसे मधु कल्पना मधुपुरी मन का निर्मलेी मन विहग मन-मीत मनाना मनुहार मनोरंजन मनोरजंन मन्त्र पल मर्दों में यौन कुंठा मर्यादा मलेशिया मस्ज़िद-मन्दिर महक महात्मा गाँधी पर मार्टिन लूथर किंग महान देश महिला सेवा समिति महेश महफ़िल माखन माधुरी गुप्ता मानव -कृत्य मानव के विस्तार मानो या न मानो माहेश्वरी-प्रजा मिट गये मिथिलेश मिथिलेश दुबे मिथिलेश दुब मिथिलेश दुबे लेख महिंला मिलन मिस्र में विद्रोह मुजाहिद मुन्ना भाई मुलाक़ात मुस्कराहट मुहब्बत ए इलाही मूल मूलभूत सुविधाएं मूल्यांकन मेघ मेरा देश मेरे मन मेले मैं -तू मैं करता तब मैथुनी-भाव मॉल संस्कृति मोक्ष मोमिन मोर मुकुट यकीं यक्ष प्रश्न यक्ष-प्रश्न यम-यमी यशवंत याद में तेरी जाग-जाग के युवा दिवस युवा प्रतिभा सम्मान युवावर्ग यूपीखबर 'DR. ANWER JAMAL' योग भ्रष्ट रंग रस रत्न रमज़ान रवींद्र प्रभात रवीन्द्र प्रभात रस-राज रागिनी राणा प्रताप राधा-कान्हा राम राम भक्त राष्ट्र गान राष्ट्र-प्रेम राष्ट्र-भाषा रिपोर्ट रूह रोजगार रोशन सिंह लखनऊ के ब्लॉगर लखनऊ ब्लोगर एसोसिएशन पर विवादित पोस्टों का वहिष्कार होगा--------मिथिलेश लज्जा ललिता लहर लाइब्रेरी लास लीला लोकसभा वतन वन नीति में बदलाव की जरूरत वन्दे मातरं वन्दे मातरम वरदान वह कल वाक्-आउट वादाये वफ़ा वायु वार्तालाप वासवी-निषंग विकास विकृति विखंडन-संयोजन विचित्र किन्तु सत्य वितान विद्वान् विधिना विधु बदनी विरज़ विवेकानंद विश्लेषण विष्णु विष्णु का चक्र विहान वीर वीर जवान वीर-प्रसू वीराना वीरों के गीत वैदिक ज्ञान व्यक्त वफ़ादारी शक्ति शराबी ब्लॉगर्स शास्त्र शिकायत शिक्षक-दिवस. शिक्षक-स्नातक निर्वाचन शिक्षा शिवम् मिश्रा शील शुद्धतावादी शुभकामना सन्देश शूरवीर शेयर शेर शेष-ब्रह्म शौर्य के स्वर श्याम श्याम सवैया श्यामली सखी श्यामा श्यामान्गिनी श्रध्दांजलि श्री कान्त श्रुति-सम्मत श्रृंगार श्रृद्धा श्रेय-प्रेय श्रेष्ठता षड्यंत्र संकट हरण संक्षिप्तता संत साहित्य संतान संतोष भारतीय संदेह संरक्षण संस्कार सखि सखी सत्कर्म सद-नासद सदस्य बनिए सदा सदाधार सद्दाम का इराक सन्त कंवर राम सन्त साहित्य परम्परा सन्देश सपना सप्ताह की श्रेष्ठ पोस्ट समता समय समलैंगिकता समस्या समाचारपत्र कतरन सम्मान प्राप्त सर सर्वत एम० सर्वश्री रविन्द्र प्रभात सलीम अख्तर सिद्दीकी सलीम अख्तर सिद्दीक़ी सलीम भाई सलीम भाई और अनव भाई सहारनपुर सांझ सांवरी सांस्कृतिक समारोह सागर साड़ी साध्वी सामुदायिक ब्लॉग सार सार्थकता साहित्य साहित्यकार दिवस साहित्यिक कविताएँ सिंगापुर सिद्धि सिद्धि-प्रसिद्धि सिनेमा सीता सुख सुख-दुःख सुख-शान्ति सुखन सुधार सुहाने रितु सेवा समितियां सेवानिवृत्ति सौर-ऊर्जा स्थित-प्रज्ञ स्थिति-प्रग्य स्नेह और सहयोग स्पर्श स्पेसिंग स्फुरणा स्वतंत्रता दिवस पर लेख प्रतियोगिता स्वतन्त्रता प्रश्न स्वामी स्वार्थ हरियाली हरीश सिंह हाइड्रोजन हाथी हारि हास्य कविताएँ हिंदुस्तान की आवाज़ हिन्दी गुलामी का शिकार हिन्दी सेवा समितियां हिन्दू-मुस्लिम एकता हिन्‍दुस्‍तान हिमवान हिरण्यगर्भ हीलियम हुश्ने मतला हेमांड होठों की छुअन होली होली का आमंत्रण LBA परिवार को. होस्टल ज़िंदगी ज़िन्दाकौम फ़ितरत ‘बिहारी‘ ‘ब्लॉग की ख़बरें‘

ऑल इंडिया ब्लॉगर्स एसोसियेशन
ALL INDIA BLOGGERS' ASSOCIATION

ब्लॉगर्स बन्धुवों !
आप सभी को हर्ष और बधाई के साथ यह सूचना देना चाहता हूँ कि LBA अपनी सफलता के उस मुक़ाम तक आ चुका है कि इसकी सदस्यता संख्या अपने चरण तक पहुँच चुकी है और जो ब्लॉगर्स बन्धु इससे जुड़ने की इच्छा रख रहे हैं और जिनके मेल मुझे मिल रहे हैं उसको मद्देनज़र रखते हुए नयी सदस्यता के इच्छुक ब्लॉगर्स को एक और भी शक्तिशाली और नया मंच का गठन आज किया जा रहा है जिसका नाम है 'ऑल इंडिया ब्लॉगर्स असोसिएशन' अर्थात AIBA ! इस मंच का हिस्सा सभी भारतीय बन सकते है, फ़िर चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में रह रहें हों !!!
सभी ब्लॉगर्स से निवेदन है कि वे इस मंच के सदस्य बनकर देश, समाज और मानवता के हित में अपना योगदान दें. इच्छुक ब्लॉगर्स यहाँ अपना ईमेल एड्रेस दर्ज करा कर सदस्य बन सकते हैं.
शीघ्र ही इसकी देखरेख के लिए आवश्यक पदों की निर्माण-प्रक्रिया पूर्ण की जायेगी. ब्लॉग पर पहुँचने के लिए यहाँ क्लिक करें.
Please Email me for more details at swachchhnsandesh@gmail.com

Follow by Email

इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.