क्या करूँ समझ में नहीं आ रहा है.
वैसे मेरे अंतर्मन ने एक बात कही कि कहीं ऐसा तो नहीं कि ब्लॉग-एग्रीगेटर्स का महायुद्ध शुरू हो गया है अथवा ऐसा तो नहीं कि अब एग्रीगेटर के दिन लद गए लेकिन उसी पल दी ग्रेट चिट्ठाजगत.इन का ख़्याल आया तो सोचा भई वह तो लम्बी रेस का घोड़ा साबित हो रहा है.
एक बात और ज़ेहन में आ रही है कि कहीं ब्लॉगवाणी आने वाली तो नहीं है, वैसे उम्मीद कम ही है लेकिन हो सकता है कि वह आ जाये लेकिन तब तक बाक़ी नए एग्रीगेटर्स की वाट लग चुकी होगी.

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इन वार्निंग नोटिसों से मैं भी परेशान हूं।
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