२५-१२-२०२०
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सहभागी
सर्व श्री-श्रीमती अनिल बाजपेयी, अमरेंद्र नारायण, अशोक शर्मा, जय प्रकाश श्रीवास्तव, निरुपमा वर्मा, बसंत शर्मा, भारती नरेश पाराशर, भावना दीक्षित, मिथलेश बड़गैया, विनीता श्रीवास्तव, विवेक रंजन श्रीवास्तव, संतोष शुक्ला, हरसहाय पांडेय और मैं।
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मोक्षदा एकादशी; गीता दिवस पर, मदन मोहन को नमन शत,
अटल हों संकल्प अपने; दिन बड़ा है; भारती माँ को नमन शत।
अटल हों संकल्प अपने; दिन बड़ा है; भारती माँ को नमन शत।
निरुपमा कविता व्यथित है, देख कृषकों को सड़क पर यूँ उपेक्षित -
सलिल कर अभिषेक श्रम का, अन्नदाता देश के उनको नमन शत।
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वंदन शारद भारती; हरि सहाय हों आज
नमन अनिल अमरेंद्र को; हो अशोक सब काज
जय प्रकाश की भावना; हो बसंत का राज
मन मिथलेश अवधपति; हो तन तब संतोष
कर विवेक रंजन सदा; सृजन विनीता कोष
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आमंत्रित सबको करें जो वे अब रहें न दूर
काव्य पाठ मिथलेश जी करें बजे संतूर
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भाभी जी का स्टेशन है भैया जी के मन में
सादर वंदन नमन समर्पित, हो हुलास जीवन में
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नेह नर्मदा बहे निरंतर, महके आँगन देहरी
कविता-कविता मन को छूती बातें कह दे गहरी
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