डा श्याम गुप्त की गज़ल...किधर जायेंगे।
आप ने पूछा है कि अब आप किधर जायेंगे।
आप कहदेंगे जिधर हम तो उधर जायेंगे ।
अब ज़माना कहे चाहे जो भी अफ़साने,
प्यार की बात से कैसे मुकर जायेंगे ।
बात मीठी हो या तीखी हो तेरी हो अगर,
तेरी हर बात पै चाहोगे तो मर जायेंगे।
प्यार में तेरे कोसे ये ज़माना चाहे,
तेरी ज़ुल्फ़ों में सज़े हम तो निखर जायेंगे।
अपने अशआर में हमने भी संजोया है जहां,
मुड के चल देगा जहां हम तो जिधर जायेंगे ।
मोड जायेंगे जमाने की कई राहों को,
करके नये रंग जमाने की नज़र जायेंगे ।
बात मेरी न सुने सारा जमाना चाहे,
चंद ज़ाहिद तो सुनेंगे औ सुधर जायेंगे।
बात तेरी हो मेरे प्यार, मेरे देश अगर,
हम तो दीवानगी की हद से गुज़र जायेंगे।
मेरी यादों में न लग पायेंगे मेले चाहे,
तेरी गलियों में किये याद मगर जायेंगे ।
श्याम ,इक रोज़ चले जायेंगे जहां से लेकिन,
बनके खुशबू तो ज़माने में बिखर जायेंगे॥
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आप कहदेंगे जिधर हम तो उधर जायेंगे ।
अब ज़माना कहे चाहे जो भी अफ़साने,
प्यार की बात से कैसे मुकर जायेंगे ।
बात मीठी हो या तीखी हो तेरी हो अगर,
तेरी हर बात पै चाहोगे तो मर जायेंगे।
प्यार में तेरे कोसे ये ज़माना चाहे,
तेरी ज़ुल्फ़ों में सज़े हम तो निखर जायेंगे।
अपने अशआर में हमने भी संजोया है जहां,
मुड के चल देगा जहां हम तो जिधर जायेंगे ।
मोड जायेंगे जमाने की कई राहों को,
करके नये रंग जमाने की नज़र जायेंगे ।
बात मेरी न सुने सारा जमाना चाहे,
चंद ज़ाहिद तो सुनेंगे औ सुधर जायेंगे।
बात तेरी हो मेरे प्यार, मेरे देश अगर,
हम तो दीवानगी की हद से गुज़र जायेंगे।
मेरी यादों में न लग पायेंगे मेले चाहे,
तेरी गलियों में किये याद मगर जायेंगे ।
श्याम ,इक रोज़ चले जायेंगे जहां से लेकिन,
बनके खुशबू तो ज़माने में बिखर जायेंगे॥

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