ये लखनऊ की सरज़मीं - शकील बदायुँनी
ये लखनऊ की सरज़मीं
- शकील बदायुँनी
ये लखनऊ की सरज़मीं
ये लखनऊ की सरज़मीं
ये रंग रूप का चमन
ये हुस्न-ओ-इशक का वतन
यही तो वो मुक़ाम है
जहाँ अवध की शाम है
जवाँ जवाँ हंसीं हंसीं
ये लखनऊ की सरज़मीं
शबाब-ओ-शेर का ये घर
ये अह्ल-ए-इल्म का नगर
है मंज़िलों की गोद में
यहाँ हर एक रह-गुज़र
ये शहर लालदार है
यहाँ दिलों में प्यार है
जिधर नज़र उठाइये
बहार ही बहार है
कली कली है नाज़नीं
ये लखनऊ की सरज़मीं
यहाँ की सब रवायतें
अदब की शाहकार हैं
अमीर अह्ल-ए-दिल यहाँ
ग़रीब जाँ-निसार हैं
हर एक शाख पर यहाँ
हैं बुलबुलों के चहचहे
गली-गली में ज़िंदगी
क़दम क़दम पे कहकहे
हर एक नज़ारा है दिलनशीं
ये लखनऊ की सरज़मीं
निभाई अपनी आन भी
बढ़ाई दिल की शान भी
हैं ऐसे मेहरबान भी
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- शकील बदायुँनी
ये लखनऊ की सरज़मीं
ये लखनऊ की सरज़मीं
ये रंग रूप का चमन
ये हुस्न-ओ-इशक का वतन
यही तो वो मुक़ाम है
जहाँ अवध की शाम है
जवाँ जवाँ हंसीं हंसीं
ये लखनऊ की सरज़मीं
शबाब-ओ-शेर का ये घर
ये अह्ल-ए-इल्म का नगर
है मंज़िलों की गोद में
यहाँ हर एक रह-गुज़र
ये शहर लालदार है
यहाँ दिलों में प्यार है
जिधर नज़र उठाइये
बहार ही बहार है
कली कली है नाज़नीं
ये लखनऊ की सरज़मीं
यहाँ की सब रवायतें
अदब की शाहकार हैं
अमीर अह्ल-ए-दिल यहाँ
ग़रीब जाँ-निसार हैं
हर एक शाख पर यहाँ
हैं बुलबुलों के चहचहे
गली-गली में ज़िंदगी
क़दम क़दम पे कहकहे
हर एक नज़ारा है दिलनशीं
ये लखनऊ की सरज़मीं
निभाई अपनी आन भी
बढ़ाई दिल की शान भी
हैं ऐसे मेहरबान भी

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