सुषमा गुप्ता जी का एक गीत....
गीत लवों पर खिल आता है.....
चूल्हे चौके की खटपट में,
चूल्हे चौके की खटपट में,
समय भला कब मिल पाता है |
सब्जी कढ़ी दाल अदहन में,
गीत भला कब बन पाता है ||
तवा कडाही कलछा चिमटा,
के स्वर की रागिनी सजे नित |
दूध चाय पानी के स्वर में ,
कब संगीत उभर पाता है ||
पर मन में संगीत बसा हो,
सब कुछ संभव हो जाता है |
गुन गुन में मन-मीत बसा हो,
तो मन गीत सजा पाता है ||
चूल्हे चौके की खटरस में,
ताल बंद लय मिल जाते हैं |
थाली बेलन चकले के स्वर,
सुर और राग बता जाते हैं ||
दाल, झोल, अदहन के स्वर भी ,
नाद, अनाहत बन जाएँगे |
मन में प्रिय रागिनी बसी हो,
गीत स्वयं ही सज जायेंगे ||
गर्मा गर्म रसोई की जब,
उठती भीनी गंध सुहानी|
लगती सुन्दर काव्यभाव सी,
बन जाती इक कथा-कहानी ||
मेरे गीतों में जीवन की -
खुशियों की थिरकन होती है |
इन गीतों में जन जन मन के,
ह्रदय की धड़कन होती है ||
चूल्हे चौके की खट पट में,
समय कहाँ फिर मिल पाता है |
मन में प्रिय रागिनी बसी हो,
गीत लवों पर खिल आता है ||

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