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गुरुवार, फ़रवरी 03, 2011
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एल. बी. ए. से जुड़े समस्त स्नेही साथियों,

आज यह पोस्ट डालते हुए अपार पीड़ा का अनुभव हो रहा है कि विगत कई दिनों से लगातार एल बी ए में उठापठक की स्थिति बनी हुई है, पोस्ट के विरुद्ध पोस्ट और व्यक्तिगत आक्षेप को सर्वाधिक महत्व दिया जा रहा है ! चूँकि यह प्रबुद्ध वर्गों का मंच है, इसलिए सदाचार के अतिक्रमण से मन क्षुब्ध हो जाता है, ऐसे में मैं अपने को इसके नाकाबिल महसूस कर रहा हूँ !

अत: मैं आज एल. बी. ए. के अध्यक्ष पद से स्वयं को मुक्त करते हुए त्याग पत्र देता हूँ और आप सबसे वादा करता हूँ कि एक प्राथमिक सदस्य की हैसियत से आपके हर कार्यों में सहयोग करता रहूँगा !

एक अभिभावक की हैसियत से जब भी मुझे आप याद करेंगे, आप हमेशा मुझे अपने साथ पायेंगे !

आप सभी का आभार जो मुझे अध्यक्ष की हैसियत से इतना सम्मान दिया !

रवीन्द्र प्रभात
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रविवार, जनवरी 30, 2011
न आना इस देश बापू

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(शहीद दिवस पर विशेष )

!! न आना इस देश बापू !!

शान्ति का  उपदेशक
सत्य-अहिंसा में आस्था रखना छोड़ दिया है
और  जम्हूरियत
बन गयी है खानदानी वसीयत का पर्चा
सिपहसलार-
कर गया  है सरकारी खजाना
सगे-संवंधियों के नाम......

संसद के केन्द्रीय कक्ष में
व्हिस्की के पैग के साथ
होती रहती  है कभी  राम राज्य तो कभी भ्रष्टाचार पर चर्चा
बापू !
वह स्थान भी सुरक्षित नहीं बचा
जहां बैठकर गा सको -
वैष्णव जन.............पीर पराई जाने रे......!

तुम्हारे समय से काफी आगे निकल चुका है यह देश
इस देश के लिए सत्य-अहिंसा कोई मायने नहीं रखता अब
टूटने लगे हैं मिथक
चटखने लगी है आस्थाएं
और दरकने लगी है-
हमारी बची-खुची तहजीब
इसलिए लौटकर फिर -
न आना इस देश बापू !

() रवीन्द्र प्रभात
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मंगलवार, जनवरी 25, 2011
एक अपील :  ईश निंदा से बचें सदस्यगण !

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विगत कुछ दिनों से देख रहा हूँ कि हमारे सदस्यगण ईश निंदा में ज्यादा मशगूल हैं, यह सत्य है कि अपना धर्म अपना मजहब और उस मजहब के निति-नियम सबको प्यारे लगते हैं, किन्तु विवाद की स्थिति तब आती है जब हम अन्य धर्मों की निंदा में ज्यादा वक़्त देने लगते हैं -


आज हम भूल गए हैं गुरु नानक के उस अमर उपदेश को, कि-" अव्वल अल्लाह नूर उपाया कुदरत के सब बन्दे, एक नूर तो सब जग उपज्या कौन भले कौन भंदे "

भूल गए हैं हम अलामा इकवाल के उस सन्देश को, कि " मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, हिंदी हैं हम वतन है हिन्दुस्ता हमारा "

भूल गए हैं हम गांधी की अमर वाणी को, कि " प्रभु भक्त कहलाने का अधिकारी वही है जो दूसरों के कष्ट को समझे "

भूल गए हैं हम तुलसीदास के धर्म की परिभाषा को, कि " पर हित सरिस धर्म नहीं भाई "

इसप्रकार-
मंदिर, मस्जिद, गिरजा, गुरुद्वारा तो शक्ति का साधन स्थल है ! परस्पर प्रेम, सौहार्य, एकता एवं धार्मिक-सांस्कृतिक सहिष्णुता का पूज्य स्थल है । सर्व धर्म समन्वय ही हमारी सभ्यता और संस्कृति का मूल प्राण है । अनेकता में एकता ही हमारी आन- बान और शान है ।

मित्रों !
निष्काम कर्म ही मनुष्य का धर्म है / मानवता का मूल मंत्र है ।

याद करो राष्ट्रीय कवि मैथली शरण गुप्त की वह पंक्तियाँ, कि "यह पशु प्रवृति है कि आप ही आप चारे, मनुष्य वही जो मनुष्य के लिए मरे "
याद करो रहीम के सत्य के प्रतिपादन को/सच्ची मानवता के दर्शन को -" यो रहीम सुख होत है उपकारी के संग , बाटन वारे के लगे ज्यों मेंहदी के रंग "

याद करो कि सलीब पर चढाते हुए / अपने हत्यारों के लिए दुआ माँगते हुए इसाईयों के प्रवर्तक ईशा ने क्या कहा था ? यही न कि " प्रभु इन्हें सुबुद्धि दे, सुख-शान्ति दे, ये नहीं जानते कि क्या करने जा रहे हैं "

याद करो- कर्बला के मैदान में / प्राणों की बलि देने वाले /अंतिम सांस तक मानव कल्याण हेतु दुआएं माँगने वाले (मोहम्मद साहब के नवासे) इमाम हुसैन (ए.स) ने क्या कहा था .......?

कर्बला मैं क्या हुआ था यहाँ पढ़ सकते हैं आप.

आर्य समाज के प्रबर्तक महर्षि दयानंद ने अभय दान दे दिया क्यों अपने हत्यारों को ? महात्मा बुद्ध ने अपने धर्म के प्रचार में अन्य धर्मों के विरूद्ध द्वेष का प्रदर्शन क्यों नहीं किया ? स्वामी विवेकानंद , राम तीर्थ, रामकृष्ण परमहंस ने किसी धर्म के लिए अपशब्द क्यों नहीं कहे ?

सूफी संत आमिर खुसरो, हजरत निजामुद्दीन, संत कबीर, नामदेव क्यों सर्वस्व त्याग दिया मजहबी एकता के लिए अर्थात सर्व धर्म समन्वय के लिए ?

इस सबका एक ही उत्तर है कि हमारा धर्म बाद में है पहले हम भारतीय हैं ...!

आईये हम मिलकर शपथ लेते हैं कि अपने-अपने धर्म को महसूस करेंगे, पर न तो दूसरे धर्म की निंदा करेंगे और न हम अमन और भाईचारे पर किसी भी प्रकार की आंच आने देंगे !
जय हिंद !

गणतंत्र दिवस की अग्रिम शुभकामनाओं के साथ  

शुभेच्छु-
रवीन्द्र प्रभात
अध्यक्ष, एल बी ए

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नोट : यदि इस अपील के बावजूद हमारे सदस्यगण अपनी चिर-परिचित प्रवृतियों का परित्याग नहीं करेंगे तो एल बी ए की कार्यकारणी की आपात वैठक बुलाकर उक्त सदस्य की सदस्यता से वंचित करने हेतु अनुमोदन किया जा सकता है, हलांकि मुझे पूरा यकीं है कि हमारे सदस्यगण हमारी भावनाओं को अवश्य महसूस करेंगे और इसप्रकार के विवाद से एल बी ए की गिरती हुई शाख को  अवश्य बचायेंगे !
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बुधवार, जनवरी 19, 2011
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साभार अभिव्‍यक्ति
वर्ष-२०१० में हिंदी चिट्ठाकारिता के चहुमुखी विकास में पूरे वर्ष भले ही अवरोध की स्थिति बनी रही, किन्तु बुद्धिजीवियों का एक बड़ा तबका अपने इस आकलन को लेकर करीब-करीब एकमत है कि आने वाला कल हमारा है यानी हिंदी चिट्ठाकारिता का है। इसकों लेकर किन्तु-परन्तु हो सकता है कि हिंदी चिट्ठाकारिता का विकास अन्य भाषाओं की तुलना में धीमा रहा, लेकिन इसे लेकर किसी को संशय नहीं होना चाहिए कि हिंदी चिट्ठाकारी उर्जावान चिट्ठाकारों का एक ऐसा बड़ा समूह बनता जा रहा है जो किसी भी तरह की चुनौतियों पर पार पाने में सक्षम है और उसने अपने को हर मोर्चे पर सिद्ध भी किया है । वस्तुत: विगत वर्ष की एक बड़ी उपलब्धि और साथ ही आशा की किरण यह रही है कि चिट्ठों के माध्यम से वातावरण का निर्माण केवल वरिष्ठ चिट्ठाकारों ने ही नहीं किया है ,अपितु एक बड़ी संख्या नए और उर्जावान ब्लोगरों की भी आई है,जिनके सोचने का स्तर परिपक्व है। वे सकारात्मक सोच रहे हैं,सकारात्मक लिख रहे हैं और सकारात्मक गतिविधियों में शामिल भी हो रहे हैं।

अभिव्‍यक्ति में मेरे द्वारा  पेश किया गया  है, अवश्‍य पढि़एगा
इस आलेख को   पूरा पढ़ने व प्रतिक्रिया देने के लिए क्लिक कीजिए, यह आपका ही मामला है 
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शुक्रवार, जनवरी 14, 2011
प्रिंट मीडिया में परिकल्पना ब्लॉग विश्लेषण-२०१० की गूँज

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ऊपर :
2 जनवरी 2011 को जयपुर से प्रकाशित डेली न्यूज़ में परिकल्पना-अमरेन्द्र प्रकरण
सहित पिछले वर्ष की हिन्दी ब्लॉगिंग का जायजा लेता सुश्री प्रतिभा कुशवाहा का  आलेख.......
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नीचे :
लोकसंघर्ष  पर पुनर्प्रकाशित परिकल्पना ब्लॉग विश्लेषण-२०१० की चर्चा स्वाभिमान टाईम्स ( 9 जनवरी 2011 को स्वाभिमान टाईम्स के नियमित स्तंभ ‘अन्तर्जाल’ ) में .....
 
स्वाभिमान टाईम्स में लोक संघर्ष
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मंगलवार, जनवरी 11, 2011
एक नया कीर्तिमान अविनाश वाचस्पति और गिरीश बिल्लोरे के नाम

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रविवार ९ जनवरी २०११ का दिन हिंदी ब्लोगिंग के सम्मेलनीय इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। इस दिन खटीमा (उत्तराखंड) में हिंदी ब्लोगरों के सम्मलेन का जीवंत प्रसारण इंटरनेट के जरिए पूरे विश्व में सफलतापूर्वक विभिन्न एग्रीगेटर्स, खासकर ब्लॉगप्रहरी (दिल्ली), सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक,ट्विटर, गूगल-बज्ज आदि के जरिये किया गया।



हिंदी ब्लोगिंग के सम्मेलनीय स्वरुप को चहुं ओर सकारात्मकता के साथ प्रसारित करने वाले चर्चित ब्लॉ्ग नुक्कड़ के मॉडरेटर और ब्लॉरगर, साहित्यकार, व्यंग्यकार अविनाश वाचस्पति ने जबलपुर के मशहूर ब्लोगर गिरीश बिल्लोरे ‘मुकुल’ के साथ मिलकर इन स्वर्णिम पलों को पूरे विश्व में प्रसारित करके ऐतिहासिक बना दिया है। इससे साबित होता है कि धुन के धनी जब चाहते हैं तो प्रत्येक परिस्थिति को अपने अनुकूल बना नेक कार्यों को सर्वोत्तम अंजाम तक पहुंचा देते हैं।


इस अवसर पर साहित्य शारदा मंच के तत्वा वधान में उत्तराखंड स्थित खटीमा के ब्लॉ्गर, कवि डॉ. रूप चन्द्र शास्त्री ‘मयंक’ की दो पुस्तकें क्रमश: सुख का सूरज और नन्हें सुमन का लोकार्पण डॉ. इन्द्रराम, सेवानिवृत्त प्राचार्य राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय काशीपुर के कर कमलों द्वारा किया गया ।इस अवसर पर बहुचर्चित व्यंग्यकार/चिट्ठाकार श्री अविनाश वाचस्पसति मुख्य अतिथि रहे तथा विशिष्ट अतिथि रहे हिंदी के प्रमुख ब्लॉग विश्लेषक श्री रवीन्द्र प्रभात ।


एक साथ कई पायदानों पर सफलतापूर्वक सफर करने वाले श्री अविनाश वाचस्पति और गिरीश बिल्लोरे के इस कारनामे को, हिंदी ब्लॉगिंग विधा के चितेरे करोड़ों दर्शकों ने लगातार ६ घंटे तक इस जीवंत प्रसारण का भरपूर आनंद लिया और इस महत्वपूर्ण पलों के साक्षी बनी पूरी दुनिया ।

उल्लेयखनीय है कि इसका जीवंत प्रसारण अब भी
इस अवसर पर खटीमा में मौजूद रहे, हिंदी के प्रमुख ब्लॉग विश्लेषक और साहित्यकार तथा लखनऊ ब्लोगर असोसिएशन के अध्यक्ष सर्वश्री रवींद्र प्रभात (परिकल्पना) , दिल्ली के पवन चंदन (चौखट) , राजीव तनेजा (हंसते रहो) , धर्मशाला के केवलराम (चलते चलते), बाराबंकी के रणधीर सिंह सुमन (लोकसंघर्ष) , खटीमा के रावेन्द्र कुमार रवि, डॉ. सिद्धेश्वार सिंह और आसपास के क्षेत्रों यथा बरेली, पीलीभीत, हल्द्वातनी इत्यादि के साथ साथ कतिपय साहित्यकार कवि, प्रोफेसरों और हिन्दी ब्लॉ गजगत के प्रेमियों सोहन लाल मधुप, बेतिया से मनोज कुमार पाण्डेय (मंगलायतन) ,शिवशंकर यजुर्वेदी, किच्छा से नबी अहमद मंसूरी, लालकुऑ (नैनीताल) से श्रीमती आशा शैली हिमांचली, आनन्द गोपाल सिंह बिष्ट, रामनगर (नैनीताल) से सगीर अशरफ, जमीला सगीर, टनकपुर से रामदेव आर्य, चक्रधरपति त्रिपाठी, पीलीभीत से श्री देवदत्त प्रसून, अविनाश मिश्र, डॉ. अशोक शर्मा, लखीमपुर खीरी से डॉ. सुनील दत्त, बाराबंकी से अब्दुल मुईद, पन्तनगर से लालबुटी प्रजापति, सतीश चन्द्र, मेढ़ाईलाल, रंगलाल प्रजापति, नानकमता से जवाहर लाल, सरदार स्वर्ण सिंह, खटीमा से सतपाल बत्रा, पी. एन. सक्सेना, डॉ. गंगाधर राय, सतीश चन्द्र गुप्ता, वीरेन्द्र कुमार टण्डन आदि उल्लेखनीय हैं।

कार्यक्रम का संचालन श्री रावेन्द्र कुमार रवि द्वारा किया गया।

प्रेषक : नुक्कड़ संपादकीय टीम।
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गुरुवार, दिसंबर 23, 2010
ब्लॉग जगत ने क्या खोया क्या पाया इस वर्ष ?

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नि:संदेह भारत ने एक संप्रभुता संपन्न राष्ट्र के रूप में बड़ी-बड़ी उपलब्धियां प्राप्त की । आई टी सेक्टर में दुनिया में उसका डंका बजा । चिकित्सा,शिक्षा, वाहन, सड़क, रेल, कपड़ा, खेल, परमाणु शक्ति, अंतरिक्ष विज्ञान आदि क्षेत्रों में बड़े काम हुए । परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र का रुतवा भी हासिल हुआ । तेजी से यह देश आर्थिक महाशक्ति बनने को अग्रसर है । मगर राष्ट्र समग्र रूप से विकसित हो रहा है इस दृष्टि से विश्लेषण करें तो बहुत कुछ छूता हुआ भी मिलता है, विकास में असंतुलन दिखाई देता है एवं उसे देश के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाने में सफलता नहीं मिली है । जिससे भावनात्मक एकता कमजोर हो रही है , जो किसी राष्ट्र को शक्ति संपन्न , समृद्धशाली,अक्षुण बनाए रखने के लिए जरूरी है । यह समस्या चिंता की लकीर बढाती है ।

हमारे देश में इस वक्त दो अति-महत्वपूर्ण किंतु ज्वलंत मुद्दे हैं - पहला नक्सलवाद का विकृत चेहरा और दूसरा मंहगाई का खुला तांडव । जहां तक ब्लॉग पर प्रमुखता के साथ मुद्दों को प्रस्तुत करने की बात है, इस वर्ष प्रमुखता के साथ छ: मुद्दे छाये रहे हिंदी ब्लॉगजगत में । पहला बिभूती नारायण राय के बक्तव्य पर उत्पन्न विवाद, दूसरा नक्सली आतंक,तीसरा मंहगाई,चौथा अयोध्या मामले पर कोर्ट का फैसला,पांचवां कॉमनवेल्थ गेम में भ्रष्टाचार और छठा बराक ओबामा की भारत यात्रा ।इन्हीं छ: मुद्दों के ईर्द-गिर्द घूमता रहा हिंदी ब्लॉगजगत पूरे वर्ष भर ।

कौन-कौन से मुद्दों पर हिंदी ब्लॉगजगत ने कैसी रणनीति बनायी, सार्वजनिक रूप से क्या कहा और भ्रष्टाचार आदि मुद्दों पर क्या प्रतिक्रिया रही हिंदी ब्लॉग जगत की, जानने के लिए चलिए चलते हैं परिकल्पना पर जहां आजकल वार्षिक हिंदी ब्लॉग विश्लेषण प्रकाशित किये जा रहे हैं -
वार्षिक हिंदी ब्लॉग विश्लेषण (भाग-१ )

वार्षिक हिंदी ब्लॉग विश्लेषण (भाग-२ )

वार्षिक हिंदी ब्लॉग विश्लेषण (भाग-३ )

वार्षिक हिंदी ब्लॉग विश्लेषण (भाग-४ )

वार्षिक हिंदी ब्लॉग विश्लेषण (भाग-५ )

वार्षिक हिंदी ब्लॉग विश्लेषण (भाग-६ )

वार्षिक हिंदी ब्लॉग विश्लेषण (भाग-७ )
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मंगलवार, दिसंबर 14, 2010
हिंदी ब्लोगिंग में सक्रिय  ५०० से ज्यादा साहित्यकारों की चर्चा

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जी हाँ ,
परिकथा के नवंबर-दिसंबर अंक में प्रवक्ता, अनवरत, हिंद युग्म की हिंदी खबर, चिट्ठा चर्चा, औब्जेक्सन मी लॉर्ड, जगदीश्वर चतुर्वेदी के साथ परिकल्पना के शब्द सभागार की चर्चा हुई है !
ये तो हुई परिकथा में परिकल्पना की बात ।
और अब आपको यह बता दूं कि आज परिकल्पना ब्लॉग विश्लेषण के अंतर्गत वर्ष-२०१० में हिंदी ब्लोगिंग में सक्रिय
५०० से ज्यादा साहित्यकारों की चर्चा हुई है ।
यदि आप साहित्य कर्म से जुड़े हैं और हिंदी ब्लोगिंग में इस वर्ष सक्रिय रहे हैं तो आप अवश्य शामिल होंगे इस विश्लेषण में .....
तो देर किस बात की आईये चलते हैं आज के विश्लेषण पर एक नज़र डालने ......लिंक के लिए यहाँ किलिक करें
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सोमवार, दिसंबर 13, 2010
परिकल्पना ब्लॉग विश्लेषण में शामिल होईए आप भी

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यदि आप सक्रिय ब्लोगर हैं और सार्थक ब्लोगिंग करते हुए सकारात्मक गतिविधियों में संलग्न हैं तो पूरे वर्ष भर के लेखा-जोखा में आप भी शामिल होईए, ढूंढिए विश्लेषण में अपना और अपने ब्लॉग का नाम , यदि दिखाई न दे तो कॉमेंट बॉक्स में डाल दें अपने ब्लॉग का नाम और पता , आपका ब्लॉग स्वयं बोलेगा अपने बारे में इस विश्लेषण के दौरान , तो देर किस बात की ये लीजिये लिंक जहां आपको पहुँचना है-
http://www.parikalpnaa.com/
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गुरुवार, दिसंबर 09, 2010
वर्ष-२०१० में हिंदी ब्लोगिंग के सुखद पहलू

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हिंदी ब्लोगिंग वर्ष-२०१० में ७ वर्ष पूर्ण कर चुकी है । यह सुखद पहलू है कि विगत कई वर्षों की तुलना में वर्ष-२०१० में हिंदी ब्लोगिंग समृद्धि की ओर तेज़ी से अग्रसर हुई है । इस वर्ष लगभग ८ से 10 हजार के बीच नए ब्लोगर्स का आगमन हुआ है , किन्तु सक्रियता के मामले में इस वर्ष आये ब्लोगर्स में से केवल ५०० से १००० के बीच ही सक्रिय हैं और सार्थक लेखन के मामले में ३०० के आसपास ।

कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि तपी जमीन को कुछ ठंडक देने का काम हुआ , लेकिन विकासक्रम की द्रष्टि से अन्य भाषाओं की तुलना में बहुत संतोषप्रद नहीं कहा जा सकता । हिंदी ब्लोगिंग की सात वर्षों की इस यात्रा में अमूमन यही देखा गया कि यह ब्लॉगरों के लिए एक ऐसा धोबीघाट रहा ,जहां बैठकर वे अपने घर से लेकर गली-मोहल्ले तक की तमाम मैली चादरों को धोने का काम करते रहे और सुखाते रहे ।

पूरा आलेख पढ़ने के लिए यहाँ किलिक करें .......
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शनिवार, अक्टूबर 16, 2010
विजयादशमी की शुभकामनाएं ...

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असत्य, अमानवीयता और कुत्सित अवधारणाओ के ऊपर
सत्य, मानवीयता और प्रेरक विचारों के
प्रभुत्व का प्रतीक पर्व "विजया दशमी "
आप और आपके परिवारजनों के लिए
खुशियों के अनेकानेक क्षण लाए !
आप सभी का जीवन शान्ति,सुख, संतुष्टि परक हो ...!
इन्ही शुभकामनाओं के साथ-
शुभेच्छु-
रवीन्द्र प्रभात
अध्यक्ष: एल बी ए
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शुक्रवार, सितंबर 24, 2010
एल बी ए संगठन नहीं एक परिवार है

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एक अध्यक्षीय अपील


इस समय हिंदी में लगभग १५००० के आसपास ब्लोग्स हैं , जबकि यह संख्या अंग्रेजी की तुलना में काफी कम है । समय के लिहाज से अंग्रेजी और हिंदी के बीच मात्र छ: साल की दूरी है लेकिन ब्लॉग की संख्या के लिहाज से दोनों के बीच कई प्रकाश वर्ष का अंतर है !

इसमें कोई संदेह नहीं कि संगणित भूमंडल की अद्भुत सृष्टि हैं ये ब्लोग्स । यदि हिन्दी ब्लोग्स की बात की जाय तो आज का हिन्दी ब्लॉग अति संवेदनात्मक दौर में है , जहाँ नित नए प्रयोग भी जारी हैं। मसलन समूह ब्लाग का चलन ज़्यादा हो गया है। समूह ब्लॉग में हर प्रकृति के लोग होते हैं जिनका ख्याल रखना होता है इसलिए कभी-कभार लिखने की मर्यादा पर भी सवाल उठाए जाने लगे हैं। समूह ब्लॉग की सफलता इसी में है जब हम एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करें । एक दूसरे को सार्थक लेखन के लिए उत्प्रेरित करें और उनके विचारों को ज्यादा से ज्यादा फैलाएं । लखनऊ ब्लोगर एसोसिएसन उन्हीं उद्देश्यों की पूर्ती की दिशा में एक कदम है । अर्थात एल बी ए संगठन नहीं भावनाओं पर आधारित एक परिवार है जिसमें सभी धर्म-जाति और संप्रदाय के लोग हैं इसलिए हमें कोई भी ऐसा कार्य न करना चाहिए जिससे किसी की भी भावना को ठेस पहुंचे ।

कहा गया है कि ब्लोगिंग की दुनिया पूरी तरह स्वतंत्र,आत्म निर्भर और मनमौजी किस्म की है ! यहाँ आप स्वयं लेखक, प्रकाशक और संपादक की भूमिका में होते हैं !ब्लॉग की दुनिया समय और दूरी के सामान अत्यंत विस्तृत और व्यापक है ! यहाँ केवल राजनीतिक टिप्पणियाँ और साहित्यिक रचनाएँ ही नहीं प्रस्तुत की जाती वल्कि महत्वपूर्ण किताबों का इ प्रकाशन तथा अन्य सामग्रियां भी प्रकाशित की जाती है . आज हिंदी में भी फोटो ब्लॉग, म्यूजिक ब्लॉग, पोडकास्ट, , विडिओ ब्लॉग, सामूहिक ब्लॉग, प्रोजेक्ट ब्लॉग, कारपोरेट ब्लॉग आदि का प्रचलन तेजी से बढ़ा है ! यानी हिंदी चिट्ठाकारिता आज संवेदनात्मक दौर में है इसमें कोई संदेह नहीं है !

जैसा कि आप सभी को विदित है कि चाहे जीवन क्षेत्र हो अथवा कर्मक्षेत्र , हर जगह निति-नियम का बहुत महत्व होता है । जहां तक ब्लोगिंग का सवाल है यदि आप अपनी भाषा पर, व्यवहार पर नियंत्रण नहीं रखेंगे तो धीरे-धीरे आप अलग-थलग पड़ते जायेंगे, क्योंकि निति नियम किसी आयु विशेष के लिए ही है, ऐसा नहीं है यह आजीवन , निरंतर,अविराम चलने वाली क्रिया है । इसी से मनुष्य जीवन में सफलता और विकास प्राप्त कर सकता है ।

इसलिए मेरा मानना है, कि आज जब हिंदी ब्लोगिंग अत्यंत संवेदनात्मक दौर से गुजर रही है , कोशिश की जाए कि हमारे सभी ब्लोगर साथी नीतिवान, संस्कारवान,सच्चरित्र और अनुशासित हों तभी हम ब्लोगिंग के माध्यम से एक नए सह-अस्तित्व की परिकल्पना को मूर्त रूप देने में सफल हो सकेंगे ।


इसलिए एल बी ए के सदस्यों हेतु एक अपील है , बस महसूस करें और ब्लोगिंग के माध्यम से दें हिंदी को नया आयाम-


ब्लॉग शिष्टाचार के अंतर्गत आपको भाषा के व्याकरण पर विशेष ध्यान केन्द्रित करें । यह सही है कि ब्लॉग आपका पर्सनल मामला है और इसे किसी भी भाषा में और कैसे भी लिखने के लिए आप स्वतंत्र हैं । फिर भी आप चाहते हैं कि आपकी लेखनी अधिक से अधिक लोग पढ़ें तो भाषा और वर्तनी की शुद्धता पर अवश्य ध्यान देना होगा । व्याकरण एकदम शुद्ध रखने का प्रयास करना होगा । यदि उसमें कोई गलती हो तो संज्ञान में आते ही सुधारने का प्रयास करें ।


इसके अलावा गलती मानने की प्रवृति अपनाएं , क्योंकि कोई भी हमेशा सही नहीं हो सकता । यदि आपसे जाने-अनजाने में कोई गलती हो जाए तो वजाए तर्क-वितर्क के गलती मान लेनी चाहिए । इससे दूसरों की नज़रों में आपका सम्मान बढेगा ।
हमेशा सकारात्मक बने रहे : अच्छे ब्लॉग लेखन के लिए जरूरी है आप हमेशा सकारात्मक सोचे, सकारात्मक टिप्पणी करें और सकारात्मक पोस्ट लिखें । सारे नकारात्मक भावों को झटके से किनारे कर दें और सकारात्मकता को हमेशा के लिए अंगीकार करें । साथ ही आपसे जुड़े जो भी ब्लोगर हैं उन्हें भी सकारात्मक बने रहने की शिक्षा दें । अपनी पसंद के विचारों को महत्व दें : पोस्ट लेखन के दौरान आप वही लिखें जो आपको पसंद हो । यदि आप किसी ऐसे पोस्ट से गुजरते हैं जो आपको नापसंद हो तो कोई जरूरी नहीं कि आप अपनी नकारात्मकता को टिप्पणी के माध्यम से प्रदर्शित करे हीं । आप उस पोस्ट से अपने को अलग करते हुए अगले पोस्ट की ओर बढ़ जाईये , व्यर्थ की विवादों में अपना समय न गवाएं । बार -बार आत्मचिंतन करें : जिन चिजों की कमी आपके अन्दर है, आप उन्हें लेकर खुद को कम मत आंकिये । इस कॉम्पलेक्स से बाहर आईये । इसका रास्ता है कि आप केवल अपनी पोजिटिव चिजों पर ही ध्यान दीजिये , बजाय उन चिजों के जो आपके अन्दर नहीं है और दूसरे ब्लोगर के अन्दर है । सोचिये क्या व्यक्ति की पाँचों ऊँगलिया बराबर होती है ?दूसरों को नीचा मत दिखाएँ : कुछ लोगों को दूसरों को नीचा दिखाने में मजा आता है । ऐसे लोग जानबूझ कर अनाप-सनाप टिप्पणी करते हैं । दूसरों का दिल दुखाते है । उन्हें परेशान करते हैं, ताकि वे खुद को सुपीरियर साबित कर सके । यदि आप ऐसे लोगों से घिरे हैं तो उन्हें महत्व मत दीजिये, किन्तु कोई आपकी सेल्फ स्टीम को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे तो अपने भीतर उनसे सामना करने की ताक़त जरूर विकसित करें । अपने गुणों को सामने लायें : हर व्यक्ति में कोई -न-कोई गुण अवश्य होते हैं, जो उन्हें औरों से अलग करते हैं । अपने इन्हीं गुणों को ढूंढिए और ब्लोगिंग के माध्यम से उसका विकास कीजिये । इससे आपकी सेल्फ स्टीम में इजाफा होगा और आप खुद को लेकर अच्छा महसूस करेंगे । हमेशा खुश रहना सीखें : आपके पोस्ट पर किसी दिन बहुत टिप्पणी आई और आप खुश हो गए , दूसरे दिन कम टिप्पणी आई आप निराश हो गए और किसी दिन कोई टिप्पणी नहीं आई तो आपके भीतर नकारात्मक पहलू पनपने लगे । ऐसा नहीं होना चाहिए ।
एक और महत्वपूर्ण बात है ब्लोगिंग के सन्दर्भ में कि ब्लॉग पढ़ने के लिए किसी को भी बाध्य न करें , क्योंकि इससे आप अपनी प्रतिष्ठा खो देंगे । एक-दो बार लोग आपका मन रखने के लिए टिप्पणी तो कर देंगे , किन्तु आपके पोस्ट से उनकी दिलचस्पी हट जायेगी ।


और हाँ कोशिश यह अवश्य करें कि कोई भी टिप्पणी आप अपने नाम से ही करें , क्योंकि लोग आपके विचारों को पहचानते हैं । अपनी पहचान को क्षति न पहुचाएं । स्वयं के प्रति ईमानदार बने रहें ।
एक और महत्वपूर्ण बात कि लेखन की जिम्मेदारी लेना लेखक की विश्वसनीयता मानी जाती है । कोई हरदम आपकी तारीफ़ नहीं कर सकता , कभी आपको कटाक्ष का दंश भी झेलना पड़ता है ऐसे में कटाक्ष पर शांत रहना सीखें ताकि आप उस आग में जलकर कंचन की भांति और निखर सकें ।
और अंत में सिर्फ इतना कहना है, कि यीश निंदा से बचें : यानी किसी भी धर्म अथवा संप्रदाय विशेष की निंदा न करें और न सांप्रदायिक बातों को महत्व दें । अर्थात हमेशा धर्मनिरपेक्ष बने रहें ।
आशा ही नहीं, किन्तु मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सभी एल बी ए के सदस्यगण उपरोक्त बातों का अनुसरण करते हुए एल बी ए को एक आदर्श परिवार के रूप में स्थापित करने की दिशा में हमारा साथ अवश्य देंगे ।
जय हिंद !
शुभेच्छु:
() रवीन्द्र प्रभात
अध्यक्ष : लखनऊ ब्लोगर एसोसिएसन
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शनिवार, सितंबर 11, 2010
सभी को ईद मुबारक !

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अमनो-अमां और आपसी भाईचारे का त्यौहार "ईद" एक ओर जहां बफादारी के साथ इताअत यानी अल्लाह के बताये मार्ग पर चलने का सन्देश देता है वहीं दूसरी ओर ताजीम यानी मालिक द्वारा बनाए गए इज्जत, अदब, पेश करने के तरीकों पर अमल करने तथा सबकी सलामती के लिए दुआ करने की सीख देता है ।
आज ईद का त्यौहार है ,
आप सभी को मेरी ओर से---- ईद मुबारक !
शुभेच्छु-
रवीन्द्र प्रभात
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शुक्रवार, सितंबर 03, 2010
वटवृक्ष पर आपका स्वागत है

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कहते हैं समय ठहरता नहीं , मौसम बदलते हैं , तेवर बदलते हैं , चाँद भी पूर्णता से परे होता है
और अमावस की रात आती है ... यूँ कहें अमावस जीवन का सत्य है, एक अध्यात्म की खोज -
जहाँ से ज्ञान मार्ग शुरू होता है ........
यह कहना है कवियित्री रश्मि प्रभा का , जिनके संचालन-समन्वयन में आज से वटवृक्ष का शुभारंभ किया जा रहा है

वटवृक्ष पर आज पढ़िए-
मुक्ति ! (यहाँ किलिक करें )
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रविवार, अगस्त 15, 2010
स्वतंत्र भारत का ६४वे वर्ष में प्रवेश : मुबारक हो मेरे देश

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देश की स्वतन्त्रता का यह पवित्र दिवस हमें अपने समाज .संस्कृति और मर्यादा के मूलभूत तत्वों को और ज्यादा मजबूत करने का सन्देश देता है ।
आज के इस पवित्र दिवस पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए , कि स्वयं से जुड़े हुए समस्त व्यक्तियों को ज्यादा से ज्यादा शिक्षित करने की दिशा में कार्य करेंगे, ताकि हम अपने इस महान देश को विकास के चरम पर ले जाने में सफल हो सकें ।
जय हिंद !
शुभेच्छु-
रवीन्द्र प्रभात
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मंगलवार, अगस्त 10, 2010
आईये देते हैं शुभकामनाएं इन्हें

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पहचानिए ये हैं हिंदी चिट्ठाकारी के जाने-माने स्तंभ
जिन्हें अलंकृत किया गया है -
वर्ष के श्रेष्ठ आदर्श ब्लोगर के रूप में
यहाँ ....किलिक करें
और शुभकामनाएं दें
यदि इनके बारे में विस्तार से जाना हो तो -
यहाँ किलिक करें
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शनिवार, अगस्त 07, 2010
ये हैं हमारे दो युवा हस्ताक्षर

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वर्ष के दो प्रखर ब्लोगर, दोनों युवा एक देश में एक विदेश में ....
दोनों हुए एक साथ सम्मानित ब्लोगोत्सव में
आईये मिलते हैं एक से यहाँ
और दूसरे से यहाँ
शुभकामनाएं देते हैं एक को यहाँ
और दूसरे को यहाँ
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शुक्रवार, अगस्त 06, 2010
एक अपनी तकनीकी कार्यशैली के लिए मशहूर हैं तो दूसरे .....

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पहचानिए इन्हें, ये हैं हिंदी ब्लॉग-जगत के दो ऐसे धुरंधर

जिन्हें महारत हासिल है अपने फ़न में

एक अपनी तकनीकी कार्यशैली के लिए मशहूर हैं तो दूसरे सम सामयिक गतिविधियों

पर चुटीली टिप्पणियों के लिए -

एक हैं वर्ष के श्रेष्ठ तकनीकी ब्लोगर

तो दूसरे हैं वर्ष के चर्चित उदीयमान ब्लोगर

इनसे मिलने के लिए यहाँ किलिक करें

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गुरुवार, अगस्त 05, 2010
पहचानिए ये हैं वर्ष के श्रेष्ठ

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पहचानिए ये हैं वर्ष के श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लोगर (पुरुष )
और ये हैं वर्ष की श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लोगर (महिला)

उन्हें यदि शुभकामनाएं देना चाहते हैं तो -
यहाँ किलिक करें- (१) वर्ष के श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लोगर (पुरुष)
(२) वर्ष की श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लोगर (महिला)

वर्ष के श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लोगर से मिलने के लिए यहाँ किलिक करें
वर्ष की श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लोगर से मिलने के लिए यहाँ किलिक करें
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बुधवार, अगस्त 04, 2010
एक नायाब और अद्वितीय सम्मान धारक

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एक ऐसा सम्मान जो शायद पहलीवार सृजित हुआ है और उसे प्राप्त करनेवाला विश्व का पहला सम्मान धारक हैं -
यहाँ किलिक करें
विस्तार से जानने के लिए यहाँ किलिक करें
एक ऐसी महिला जो पहली बार हिंदी ब्लोगिंग में आई और
वर्ष के श्रेष्ठ महिला चिन्तक होने का सौभाग्य प्राप्त की -
जानते हैं कौन है वो ?
जानने के लिए यहाँ किलिक करें
विस्तार से जानने के लिए यहाँ किलिक करें

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गीत छंद क्या है? गीत जयकार कीजिए गीत दोहा गीत प्रीत की बात गीत राम कहानी गीत सलिला गीत सुग्गा बोलो गीत सूरज उगाएँ गीत हिमालय गीत ज़ुल्फ़ गीत-नवगीत संग्रह सूची २०२० गीत. मोगरा गीत: तुमने बुलाया गीता अध्याय ४ गीता छंद गीति रचना गीतिका छंद गुफ़्तगू गुब्बारे गुमाँ गुमां गूढ़ प्रश्न गेट माहिया गोरस गोष्ठी गौ गौ-रक्षा गौधूली ग्रह ग्लोबलाइजेशन ग्वाल | घण्टा-घर चतुष्पदी चला जारहा कौन चाँद-चकोरी चाहत चिंतन चिकित्सा चित्रगुप्त वंदना चिद-बीज चुनाव और मतदान चूल्हे चौके की खटपट चोंच में आकाश चौपइया छंद छंद विजाति छंद - बहर दोउ एक हैं छंद : कथ्य लय भाव रस छंद अनुकूला छंद अमरकंटक छंद उल्लाला छंद कामरूप छंद काव्य छंद कृष्णमोहन छंद गीत छंद गीता छंद गीतिका छंद चौपइया छंद दोही छंद पीयूषवर्ष छंद बह्र दोउ एक है छंद मानव जातीय छंद विधाता छंद शंकर छंद शाला छंद शाला १ छंद सप्तमात्रिक छंद सलिला १ छंद सवैया गंगोदक छत छत्तीसगढ़ी छाया जग जगदीश व्योम जनतंत्र जनरल जनवरी कब क्या जन्म जन्माष्टमी जप जय हिन्द का सच जल जल -युद्ध ज़ाकिर अली 'रजनीश' जाति धर्म जिंदगी जीवन-घृत जोक्स joks जौहर ज्योति झन्डा रोहण झर-झर टुकड़े टेक्ट टॉप ब्लॉगर टोपी डंके की चोट पर डर डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट में हाथियों की मौत के बाद सरकार को आया होश elephant डॉ. अव्यक्त अग्रवाल डॉ. रविशंकर शर्मा अभिनन्दन डॉ. संतोष शुक्ला तनहाई तन्मात्राएँ तांका सलिला तार्किक तुम तुम कहीं भी हो तुलसी चौरा तूलिका तृप्ति तेरा स्वर नर्तन तेरेी तेवरी त्रिआयामी पदार्थ सृष्टि त्रिपदिक गीत त्रिपदिक छंद त्रिपदिक नवगीत त्रिपदियाँ दक्ष दम दयानंद सरस्वती दरी दर्शन दलाल और खरीददार दलित समाज दहेज़ दायित्व दावानल से गड़बड़ाया दुधवा का पारिस्थितिकीय तंत्र दिया दिया कविता दिल टुकड़े दिल दास्ताँ दिवाली नवगीत दिवाली माहिया दिवाली हाइकु दीप-पर्व दीपक दीपावली दीपित दीया दीवाली दीवाली और दीवाला दुनिया दुबे -कविता दुर्योधन दृष्टा देवता देवी भक्त देश एकता देशद्रोहियों और आतंकवादियों देशफरोश देह व्यापार दोषों को त्याग दोहा ममता दोहा नया साल दोहा भवन दोहा गंगा दोहा गाथा सनातन १ दोहा गीत दोहा दुनिया दोहा भवन दोहा मुक्तिका दोहा सलिला गणतंत्र दोहा सावरकर दोहा स्वास्थ्य दोहा ग़ज़ल दोहांजलि दोही छंद दोहे गणतंत्र दौलत के पुजारी द्रष्टा -दृष्टि द्रोपदी द्रौपदी द्वंद्व द्विपदियाँ द्विविधा धंधा धन धनार्जन धरती धर्म निरपेक्षिता धर्म मानव-धर्म धर्म या अधर्म ?' धर्म राज धर्मराज धांसू धूप -छाँव नए शब्द नक्षत्र नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे नया साल गीत नया साल दोहा नरसंहार नर्मदा नर्मदाष्टक मणिप्रवाल नव अन्न नव गीत आभा सक्सेना नव गीत: सांताक्लाज नव वर्ष काव्य गोष्ठी २०२१ नव-स्रिजन... नवंबर २०२० नवगीत दिन घूरे के नवगीत ना मिटहै अंधेरा नवगीत - गुरु विपरीत नवगीत अपना अपना सच नवगीत अभी नहीं सच हारा नवगीत उठो पाखी! नवगीत और देश नवगीत करना ... सही नवगीत काल है संक्रांति का नवगीत कुछ तो कीजिए नवगीत कौन है जो नवगीत क्यों? नवगीत गोल क्यों? नवगीत घोंसले में नवगीत छोडो हाहाकार मियाँ! नवगीत जगो सूर्य आता है नवगीत त्रिपदिक नवगीत दर्पण का दिल नवगीत दिवाली नवगीत नव वर्ष नवगीत नागफनी उग आयी नवगीत निर्माणों के गीत नवगीत पहले गुना नवगीत भटक न जाए नवगीत भीड़ में नवगीत मिली दिहाडी नवगीत में नए रुझान नवगीत राम बचाए नवगीत रार ठानते नवगीत लोकतंत्र का पंछी नवगीत वह खासों में खास है नवगीत शिव नवगीत संक्रांति काल है नवगीत संग्रह नवगीत सत्याग्रह के नाम पर नवगीत समय वृक्ष नवगीत समीक्षा नवगीत सड़क पर नवगीत सड़क पर... नवगीत: उगना नित नवगीत: उड़ चल हंसा नवगीत: दीन प्रदर्शन नवगीत: नाम बड़े हैं नवगीत: भाग्य कुंडली नवगीत: लोकतंत्र का पंछी बेबस नवगीत: कुण्डी खटकी नवगीत: छोडो हाहाकार मियाँ! नवगीत: बजा बाँसुरी नवगीत: भारत आ रै नवगीत: रब की मर्ज़ी नवभारत टाईम्स नशा नाक की सर्जरी नाग नाभिक ऊर्जा नारि नारी मुक्ति नारी-भाव नाश प्रकृति का निर्निमेष निर्विकार निष्काम कर्म निष्ठुरता नीति व्यवहार नीति-नियम नीति-व्यवहार नीलकंठ नेकियां नेह नर्मदा तीर पर नेह-नाता नैतिकता नैन-डोर नैना नौ कन्या न्यू-ईयर गिफ्ट नज़र नज़ारा पंचौदन अजः पद चिन्ह पद-चिन्ह पद्मिनी परब्रह्म परम-पिता परमाणु परमानंद परमार्थ परलोक परहित पराग पराया-धन पल- छिन पशु पहलू पाँच पर्व पायल पिचकारी पीयूषवर्ष छंद पीर पुरुषार्थ पुरोवाक : यह बगुला मन पुरोवाक ओस की बूँद पुरोवाक केरल एक झाँकी पुरोवाक बुधिया लेता टोह पुरोवाक् पुलिस पूजा पूर्ण-ब्रह्म पूर्णकाम पृथ्वी पैरोडी पोखर ठोके दावा प्यार प्रकृति प्रकृति दोहन प्रकृति बादल प्रजापति प्रणम्य शहीद प्रणय प्रणय -दीप प्रणय के पल प्रतिकण प्रतियोगिता प्रत्रकार प्रदूषण प्रभाव प्रभु प्रभु ज्ञान प्रश्न मन के प्राण शर्मा प्रातस्मरण स्तोत्र प्रिय प्रवास प्रीति के रंग प्रीति-चलन प्रेम के छःलक्षण प्रेम प्याला प्रेम ममता फरवरी कब क्या? 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ब्लॉगर्स बन्धुवों !
आप सभी को हर्ष और बधाई के साथ यह सूचना देना चाहता हूँ कि LBA अपनी सफलता के उस मुक़ाम तक आ चुका है कि इसकी सदस्यता संख्या अपने चरण तक पहुँच चुकी है और जो ब्लॉगर्स बन्धु इससे जुड़ने की इच्छा रख रहे हैं और जिनके मेल मुझे मिल रहे हैं उसको मद्देनज़र रखते हुए नयी सदस्यता के इच्छुक ब्लॉगर्स को एक और भी शक्तिशाली और नया मंच का गठन आज किया जा रहा है जिसका नाम है 'ऑल इंडिया ब्लॉगर्स असोसिएशन' अर्थात AIBA ! इस मंच का हिस्सा सभी भारतीय बन सकते है, फ़िर चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में रह रहें हों !!!
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