स्वतंत्रता दिवस पर लेख प्रतियोगिता Tausif Ahmad,Mirzapur,Uttarpradesh
हिन्दुस्तानियो के सोते हुए ज़मीर को जगाना है ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाना है , कसम खा लो आज से एक नया हिन्दुस्तान बनाना है
देश को आजाद कराने के लिए हमारे न जाने कितने हिन्दुस्तानी भाइयों ने अपने जान निछावर कर दिए, अनगिनत क्रन्तिकारी देश भक्त ने देश के लिए हँसते हँसते फांसी के फंदे को चूम लिया और तब हमारा देश आजाद हुआ, उस वक़्त सभी के दिल में बस एक मकसद था हम एक नया हिंदुस्तान बनायेंगे , सभी एक मंज़र व् एक हालात से गुज़रे थे गुलामी और बटवारा . लेकिन आज उस आज़ादी का मोल हमें नहीं पता ,हम तो बस एक आज़ादी जानते है कुछ भी करने की और कही भी करने की .
लेकिन मै एक बात जानता हूँ की अगर सभी हिन्दुस्तानी एक हो जाये बिना किसी भी धर्म, जाति या छेत्र देखे बिना तो हम हिंदुस्तान को एक नए उचाई पे ले जा सकते हैं जैसा हम १८७५ के ग़दर में किया था . लेकिन जसे उस समय हमे धोखा देने वालो की कमी न थी वैसे ही अभी भी ऐसे देश के गद्दार हर धर्म और छेत्र में मौजूद है और दीमक की तरह इस देश को चाट रहे हैं. हम नेता नहीं जो केवल बड़ी बड़ी बाते ही करता रहता है , हम एक काम कर सकते हैं . आपस में मेल मिलाप रख के द्वेष की भावना को समाप्त करके , रिश्वतखोरी को रोक दें ,भ्रष्ट नेताओ तथा गुंडों को वोट न देकर हम गाँधी जी के सपने को पूरा कर सकते हैं . तो आप क्या सोच रहे हो ? आओ इस आज़ादी के दिन ये कसम खाएं की हम एक पक्के हिन्दुस्तानी बनेगे और एक नया इन्कलाब लायेंगे . जय हिंद
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देश को आजाद कराने के लिए हमारे न जाने कितने हिन्दुस्तानी भाइयों ने अपने जान निछावर कर दिए, अनगिनत क्रन्तिकारी देश भक्त ने देश के लिए हँसते हँसते फांसी के फंदे को चूम लिया और तब हमारा देश आजाद हुआ, उस वक़्त सभी के दिल में बस एक मकसद था हम एक नया हिंदुस्तान बनायेंगे , सभी एक मंज़र व् एक हालात से गुज़रे थे गुलामी और बटवारा . लेकिन आज उस आज़ादी का मोल हमें नहीं पता ,हम तो बस एक आज़ादी जानते है कुछ भी करने की और कही भी करने की .
लेकिन मै एक बात जानता हूँ की अगर सभी हिन्दुस्तानी एक हो जाये बिना किसी भी धर्म, जाति या छेत्र देखे बिना तो हम हिंदुस्तान को एक नए उचाई पे ले जा सकते हैं जैसा हम १८७५ के ग़दर में किया था . लेकिन जसे उस समय हमे धोखा देने वालो की कमी न थी वैसे ही अभी भी ऐसे देश के गद्दार हर धर्म और छेत्र में मौजूद है और दीमक की तरह इस देश को चाट रहे हैं. हम नेता नहीं जो केवल बड़ी बड़ी बाते ही करता रहता है , हम एक काम कर सकते हैं . आपस में मेल मिलाप रख के द्वेष की भावना को समाप्त करके , रिश्वतखोरी को रोक दें ,भ्रष्ट नेताओ तथा गुंडों को वोट न देकर हम गाँधी जी के सपने को पूरा कर सकते हैं . तो आप क्या सोच रहे हो ? आओ इस आज़ादी के दिन ये कसम खाएं की हम एक पक्के हिन्दुस्तानी बनेगे और एक नया इन्कलाब लायेंगे . जय हिंद

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