डेल्ही ब्लोग्गेर्स की इस छोटी सी ब्लागर मीट ने यह साबित कर दिया कि अगर दिल में खुलूस और सच्चाई हो तो नफ़रतों को दम तोड़ने में देर नहीं लगती।
मौलाना वहीदुददीन खान साहब से किसी ने उनके लेक्चर के बाद सवाल किया कि मुसलमान मजहब के नाम पर इतनी नफरत क्यों करता है तो उन्होंने जवाब दिया कि आज आम मुसलमान कौमी तहजीब पर है इस्लाम पर नहीं। आप किसी से पूछिये कि क्या तुमने कभी खुदा से हिदायत की दुआ करके शुरू से आखिर तक एक बार भी पूरा कुरआन पढ़ा है ?आपको नहीं मिलेगा। मैंने एक आर्टिकल के लिए पूरा कुरआन पढ़ा है।
मौलाना के संबोधन में इस बात का पूरा जवाब मौजूद है कि आज आदमी और आदमी के दरम्यान रिश्ते क्यों कमज़ोर पड़ रहे हैं और उसका हल क्या है ?
मौलाना के पास जाने का आकर्षण साथ जाने वालों की मौजूदगी ने और भी ज़्यादा बढ़ा दिया था। तारकेश्वर गिरी जी तो ख़ैर मुख्य आकर्षण थे। इस छोटी सी ब्लागर मीट ने यह साबित कर दिया कि अगर दिल में खुलूस और सच्चाई हो तो नफ़रतों को दम तोड़ने में देर नहीं लगती। इसी तजर्बे को समाज में बड़े पैमाने पर आज़माये जाने की ज़रूरत है।

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