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मंगलवार, नवंबर 16, 2010
मंत्रियों के लिए भ्रष्टाचार महा लूट ऑफर शर्तें लागू

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आजकल पुरे देश में  भ्रष्टाचार  की लहर चल रही है ,नित नए दिन नित नए  घोटालों का महा लूट ऑफर चल रहा है, जिसको देखो वो इस गंगा में दुबकी लगा रहा है ,पहले इस महा लूट में लोग अपना चेहरा छुपाते थे , मगर अब खुले आम ये लूट चल रही है ,
इस वर्ष तो  दिवाली पर कई ऑफर आये, जैसे 'कॉमन वेल्थ गेम'   लूट ऑफर , 'आदर्श ऑफर ' और ' २ जी  ऑफर' , ये तो बड़े बड़े महालूट ऑफर थे , छोटे मोटे लूट ऑफर तो बात ही न कीजिये , और ऑफर ऐसा तगड़ा की राजनेता  मंत्री समूह , लोकशाही के  लोग यहाँ तक हमारे बड़े बड़े  फौजी अफसर भी इस ऑफर से मुंह नहीं मोड़ पाए , सभी इस गंगा में दुबकी लगाने लगे ,
लेकिन इस बार ऑफर में कुछ छुट भी थी तभी तो बहुत से नेताओं के रिश्तेदारों  ने   नौकरों  , तथा ड्राईवर ने भी करोड़ों  के फ़्लैट अपने नाम करने में सफल रहे
किन्तु इस महालूट ऑफर में  कुछ शर्ते और नियम  भी हैं , अगर आप इस शर्तों पर खरे उतरते हैं तो आप भी ख़ुशी ख़ुशी इसी महासमर के महालूट में शामिल हो सकते हैं
शर्ते व नियम ,
१- आप का मानसिक रूप से भ्रष्ट होना आवश्यक है ( सबसे ज़रूरी शर्त)
२- आप किसी भी सरकारी पद पर हों या पहले रह चुके हों .
३-आप नेता या मंत्री  हो.
४- आप का किसी सरकारी अफसर या नेता तथा मंत्री का  रिश्तेदार  होना ज़रूरी है   नौकर हों तो भी चलेगा .
५- आपके अन्दर ये गुण विद्यमान  होना आवश्यक है  बेईमानी  , झूठ  , ढीठ  , मक्कारी , मौकापरसती  आदि
६- आप के अन्दर ये अवगुण  बिलकुल  नहीं होना चाहिए  देशभक्ति ,  देश की भलाई का विचार , आम जनता के बारें में सोचने का विचार

Tausif Hindustani
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शनिवार, अक्टूबर 30, 2010
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हम सभी भारत महान , हिंदुस्तान जिंदाबाद , भारत माता की जय जैसे नारे लगा कर  खुश हो जाते हैं ,
अक्सर मीडिया हमें रंगीन ख़्वाबों में डुबोये रहती है , आज सेंसेक्स इतने  प्वाइंट  ऊपर  चढ़ा , G D P  बढ़ रहा है, बस हम महा शक्ति बनने वाले हैं , सभी देशों को पछाड़ देंगे ,
किन्तु वास्तव में हम हिन्दुस्तानी कहाँ खड़े हैं , हम जब सुबह उठते  है कोई न कोई घोटाला हमारा प्रतीक्षा कर रहा होता है , वर्ष 2003 में भारत में लगभग 8%   की दर से आर्थिक वृद्धि हुई है जो कि विश्व की सबसे तीव्र बढती हुई अर्थव्यवस्थओं में से एक है। परंतु प्रतिव्यक्ति आय क्रयशक्ति की दर से मात्र 3262 अमेरिकन डॉलर है जो कि विश्व बैंक के अनुसार १२५वें स्थान पर है।
आये दिन आपको समाचार  मिल जायेगा आज इतने किसानो ने आत्महत्या की ,कहीं नक्सलवाद कहीं माओवाद , कही आतंकवाद , सभी हिंदुस्तान को चोट पहुचाने में लगे हुए हैं  .
आप किसी भी सरकारी  विभाग में  काम  के सिलसिले में जाइए ,आप की अकल ठिकाने आजायेगी . कही भी बिना  घूस- रिश्वत के आप तो पहले किसी सरकारी बाबू से मिल नहीं पाओगे अगर कई कठिनाइयों  के पश्चात् अगर भेंट हो भी गयी तो बिन घूस सब सून नज़र  आएगा ,
यहाँ तक की हम सब के खून में ये घूस  प्रवेश कर गया है और हमारा एक अंग बन गया है ,
कोई पूल, सड़क , ओवरब्रिज , नाली, नाला, नहर  या कुछ भी सरकारी खर्च पर बने,  बनने से पहले सभी को अपना  अपना हिस्सा मिल जाता है ,

इन भ्रष्ट लोगों को केवल मौका दे कर तो  देखो ये टूट नहीं लूट पड़ेंगे , अधिक से अधिक कोई क्या कर लेगा इनका , . वर्षों जांच होगी  , मुकदमा चलेगा , तब तक इनके स्विस अकाउंट में पैसे पहुँच गए होंगे , और इनकी संतान मौज करेगी भाड़ में जाये हिंदुस्तान की जनता , इनके ठेंगे से , यही इनकी सोच है , आगे कोई और इस से बड़ा घोटाला हो जायेगा , जनता इनको भूल जाएगी ,

85 %   मुजरिम , घोटालेबाज, बलात्कारी, हत्यारे  , इसी  सफेदपोश  के वर्ग से आते  है .
कभी बोफोर्स घोटाला, चारा घोटाला , ताबूत घोटाला , हवाला कांड, केतन मेहता का शेयर घोटाला , तेलगी का स्टाम्प पेपर  घोटाला , ताज कारीडोर घोटाला ,सत्यम  घोटाला, नटवर सिंह का   Oil-for-food programme घोटाला ,मधु कोड़ा द्वारा  4000 करोड़  .रूपये का घोटाला ,2G Spectrum घोटाला ,MIG-Fighter Jets घोटाला , IPL घोटाला  और अभी ताज़ा ताज़ा  दो घोटाला , कॉमन  वेल्थ गेम  घोटाला ,  मुंबई का आदर्श घोटाला , को कैसे भूल सकते हैं , ये लिस्ट इतनी लम्बी है की  एक पूरा का पूरा ब्लॉग ही इस के लिए बनाना पड़   जायेगा ,
 इन नेताओं , अफसरों ने या कहिये जिसको भी लूटने  का मौका मिला वो  चौका मारने से नहीं चूका , यहाँ तक की आम हिन्दुस्तानी की आज महंगाई से कमर टूट गयी है पर इन को अनाज सड़ाने और खेल खेलाने से   फुर्सत नहीं , हज़ारो करोड़ रूपये खेल के नाम पर  और झूठे शान -शौकत के नाम पर पानी की तरह बहा दिया , उन्हें आत्महत्या करते किसानो और लोगों की चिंता नहीं , लोगों की औने पौने दाम में ज़मीन छीन  ली जा रही है  इसकी चिंता नहीं , इन्होने हमारे देश को इतना जम कर लूटा खसोटा है  की आज हमसे छोटे - छोटे  देश जिनकी पहले कोई पहचान न थी जीनके के पास कोई  विशेष  साधन न थे हमारे देश से बहुत आगे निकल गए हैं ,और हम इंडिया शाइनिंग का ढिंढोरा पिटते रह गए , आज हिंदुस्तान कराह रहा है लेकिन कोई उसका  पुरसाने हाल नहीं
कभी कभी तो ऐसा लगता है की अगर मीडिया और अदालत न हो तो ये नेता परेता देश को ही बेच दें और हमें पता भी न चले .
   आज हम अपने देश की बागडोर धीरे धीरे मफिआयों, गुंडों  के हाथ में देते जा रहे हैं , आखिर हम कब होश में आएंगे कब ?

इन सभी हालात को सुरिंदर नारंग जी ने क्या खूब अच्छे अंदाज़ में पेश किया है

घोटाला  एक  नहीं , घोटाले  हजारों  हो  गए ,
रिश्वत  के  आंकड़े , भी  बहुत  ज्यादा  हो  गए .

वक्त  ने  ली , कुछ  इस  तरह  अंगड़ाई ,
जो   कभी   थे  अभियुक्त ,आज  नेता  हो  गए .

पशुओं  का  चारा  हो , या  हो  खेल  मैदान ,
सभी  जगह  रिश्वत  खोरी ,   रिश्वत  ही  भगवान्  .

नेता  तो  नेता , अफसर  भी  धनवान  हो  गए ,
शिक्षा  के  मंदिर , भी  बदनाम  हो  गए .

जिस  के  पास  है  पैसा , वो इज्ज़तदार   हो  गए ,
संस्कृति  की  धरोहर  वाले , कर्जदार  हो  गए .

पड़ोस  के  देशों  को  ,मालूम  है  हमारी  कमजोरी ,
कल  तक  जो  दबंग  थे , आज  पहेलवान  हो  गए .

आतंकवाद   चारो   ओर , नहीं  शांति  का  नाम ,
यही  तो  है  विशेषता , मेरा  भारत  महान .
        (सुरिंदर नारंग  )

तौसीफ  हिन्दुस्तानी (dabirnews.blogspot.com )
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शनिवार, अक्टूबर 23, 2010
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आज हम   अधिकांश लोगों द्वारा ये  वाक्य सुनते हुए मिल जायेंगे  की " हर मुसलिम आतंकवादी नहीं होता किन्तु हर आतंकवादी मुसलिम होता है "
लेकिन अभी जब प्रणब मुखर्जी और मीडिया द्वारा भगवा आतंकवाद या हिन्दू आतंकवाद का नाम लिया गया तो पुरे हिंदुस्तान से इसके विरुद्ध आवाज़ उठने लगी ,
आखिर हम आतंकवादियों को किस श्रेणी में रखें , धार्मिक श्रेणी में या भौगोलिक श्रेणी में , क्योंकि  ये जो बिहार,  बंगाल, आँध्रप्रदेश  , असम , छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, झारखण्ड , उड़ीसा ,  और न जाने किते राज्यों में माओवादी ,नक्सलवादी बेगुनाहों को आये  दिन मार रहे हैं , वोह  कौन से श्रेणी के आतंकवादी  हैं , हिन्दू या मुस्लिम , जो पंजाब में इतने  सिख आतंकवाद के नाम पर  मारे गए  उनको किस आतंकवादी के नाम से बुलाएँगे , ये श्रीलंका में जो इतने तमिल  लोगों ने राजीव गाँधी की हत्या की तथा इतना बम धमाके  किये, न जाने कितने बेगुनाहों को बम से उड़ाया, तथा दुनिया  कि सबसे अधिक फिदायीन दस्ते बनाये ,वो कौन से आतंकवाद के श्रेणी में आता है .जिन सिखों  ने  इन्द्रा गांधी जी को गोलियों से भुना , उनको किस आतंकवाद के नाम से बुलाएँगे , जिस आर एस एस के स्वयं  सेवक  नाथूराम गोडसे  ने गाँधी जी को गोली मारी, उसको आतंकवाद के किस श्रेणी में रखेंगे  . हद तो यह है कि हमेशा    , ऐसे लोगों को दोगले नज़र से देखा गया , एक अगर अपराधी मुस्लिम है तो पक्का आतंकवादी , जैसे सोहराबुद्दीन ,और अगर वो गैर मुसलिम है तो  छोटा मोटा अपराधी, अगर दाऊद है तो देशद्रोही , छोटा राजन  है तो  गैंगेस्टर . मीडिया से लेकर सरकारी तंत्र तक इस दोगलेपन में भागीदार है, अगर अपने देश के लिए भगत सिंह जैसे  महान क्रातिकारी व देशभक्त लड़े तो शहीदे आज़म कि पदवी , और अगर कोई फलिस्तीनी  अपने देश के लिए  लड़े अपना हक जो उस से छीन लिया गया है पाने के लिए  लड़े तो मिलिटेंट , उग्रवादी है , वाह रे  वाह क्या इन्साफ है !
अगर कश्मीरी अपनी आजादी के लिए लड़े तो दहशतगर्द और अगर पूर्वी तिमोर के लोग लड़े इंडोनेशिया से तो यही संयुक्त राष्ट संघ उसको अलग देश घोषित  करके आजादी दिलवाता है क्योंकि पूर्वी तिमोर कि बहुसंख्यक आबादी इसाई है ( यहाँ मैं कश्मीर कि आजादी  की    बात नहीं कर रहा हूँ केवल दोगलापन दिखाने  के लिए उदहारण मात्र  है)
ऐसे दोगलेपन से हम अच्छी तरह वाकिफ हैं फिर भी हमारे मन व मस्तिष्क में इस के विरुद्ध कोई विचार नहीं आता क्योंकि हम भी इसके आदी  हो चुके हैं ,
आज दौर है मीडिया का विज्ञापन का  जो वो हमें दिखाते  हैं  वही हम देखते हैं ,
आइये हम इस दोगलेपन के खिलाफ आवाज़ उठाये वरना ऐसा न हो जाये कि हमें विश्व  के सबसे तेज़ी से बढ़ते हुए धर्म इस्लाम और विश्व कि दोसरी सबसे बड़ी जनसख्या हम से ही इतनी दूर न हो जाये कि सभी मुसलिम अपने को आतंकवादी समझने लगे , ये किसी भी समाज के लिए अच्छे संकेत नहीं है
 हमें आतंकवादी और  अपने  देश के लिए तथा अपना हक प्राप्त  करने के लिए  लड़ने वालो में अंतर करना सीखना होगा
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बुधवार, अक्टूबर 13, 2010
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 न्यू यॉर्क. 19 साल बाद मंगलवार को भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थाई सदस्य के तौर पर चुन लिया गया। संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस सीट के लिए हुए मतदान में भारत को 191 में से कुल 187 वोट मिले। हालांकि, सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के तौर पर भारत को वीटो का अधिकार नहीं होगा। पाकिस्तान ने भी भारत के पक्ष में वोट डाला है।

जनवरी, 2011 से शुरू हो रहे दो साल के कार्यकाल के लिए कजाकिस्तान द्वारा नाम वापस लेने के बाद भारत एशियाई क्षेत्र से इस सीट के लिए एक मात्र दावेदार बच गया था, और इस तरह भारत की जीत तय थी। इससे पहले 1992 में भारत सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्य निर्वाचित हुआ था। दक्षिण अफ्रीका और कंबोडिया ने भी अफ्रीकी और लातिन अमेरिकी सीटों पर जीत दर्ज कराई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि हरदीप सिंह सूरी ने सदस्यता मिलने पर खुशी जाहिर की है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र के छः प्रमुख अंगों में से एक अंग है, जिसकी उत्तरदायित्व है अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना । परिषद को अनिवार्य निर्णयों को घोषित करने का अधिकार भी है । ऐसे किसी निर्णय को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव कहा जाता है ।
सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य है , पांच स्थाई और दस अल्पकालिक । पांच स्थाई सदस्य हैं चीन, फ़्रांस, रूस, संयुक्त राजशाही, और संयुक्त राज्य । इन पांच देशों को कार्यविधि मामलों में तो नहीं पर विधिवत मामलों में प्रतिनिषेध (शक्ति है । बाकी के दस सदस्य क्षेत्रीय आधार के अनुसार दो साल के अवधियों के लिए समान्य सभा द्वारा चुने जाते है । सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष हर महीने वर्णमालानुसार बदलता है ।
हर वक्त सुरक्षा परिषद के किसी सदस्य को संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय में होना आवश्यक है ।
अंतर्राष्ट्रीय कानून द्वारा केवल सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई सदस्य की नाभिकीय योग्यताएं अनुमोदित हैं । इन सदस्यों को प्रतिनिषेध शक्ति  (Veto power) भी दी गई है . इसका मतलब है कि सुरक्षा परिषद के बहुमत द्वारा स्वीकृत कोई भी प्रस्ताव इन पांच में से किसी भी एक के असम्मति से उस प्रस्ताव का पारण रोका जा सक्ता है ।
सुरक्षा परिषद के बाकी के दस सदस्य दो साल की अवधियों के लिए चुने जाते है । हर साल इन दस में से पांच चुने जाते है । यह चुनाव क्षेत्रीय आधार पर होते है । अफ्ररीकी गट तीन सदस्य चुनता है । जंबूद्वीपीय गट, पश्चिम यूरोपीय गट, और लैटिन अमरिक व कैरिबियन गट सब दो सदस्य चुनते हैं । पूर्वी यूरोपीय एक सदस्य चुनता है । इनमें से किसी एक सदस्य का अरब होना भी अवश्यक है ।
सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्यों की संख्या को बढाने के बारें में काफ़ी विवाद रहा  है । विशिष्ट है चार राष्ट्र (ब्राज़ील, भारत, जर्मनी और जापान) जिनको G4 कहलाया जाता है (अंरेज़ी से G ,Group of Four, चार का समूह) । जापान और जर्मनी संयुक्त राष्ट्र की काफ़ी आर्थिक सहायता करते हैं, और ब्राज़ील तथा भारत जनसंख्या में बड़े होने के कारण संयुक्त राष्ट्र के विश्वशांति के लक्ष्य के लिए सैन्य-दल के सबसे बड़े योगदान करनेवालों में से हैं । 21 सितंबर 2004 को, G4 राष्ट्रों ने स्थाई सदस्य बनने के बारें में आपसी समर्थन घोषित की । संयुक्त राजशाही और फ़्रांस ने भी इस घोषणा को स्वीकार किया है । पारण के लिए 128 मतों की जरूरत है ।
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मंगलवार, अक्टूबर 12, 2010
भारत तीसरी महाशक्ति लेकिन भुखमरी पाकिस्तान से भी ज्यादा

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विश्व के सबसे शक्तिशाली देशों में तीसरे नंबर पर गिना जा रहा भारत भुखमरी से लड़ने के मामले में चीन ही नहीं बल्कि पड़ोसी पाकिस्तान से भी पीछे है।  अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति शोध संस्थान (आईएफपीआरआई) द्वारा जारी वैश्विक भुखमरी सूचकांक, 2010 में भारत को 67वां स्थान दिया गया है जो सूची में चीन और पाकिस्तान से भी नीचे है। आईएफपीआरआई ने जर्मनी के एक समूह, कंसर्न वर्ल्डवाइड एंड वेल्टहंगरहिल्फे (सीडब्ल्यूडब्ल्यू) के सहयोग से जारी किया है। 84 देशों की सूची में चीन नौवें और पाकिस्तान 52 वें स्थान पर रखा गया है।  इस सूचकांक को देशों में बाल कुपोषण, शिशु मृत्यु दर और दो जून भरपेट भोजन न पाने वाली आबादी के आधार पर तैयार किया गया है। हाल ही में अमेरिका के नेशनल इंटेलीजेस कॉउंसिल (एनआईसी) और यूरोपीय संघ की संस्था यूरोपीयन यूनियन इंस्टिट्यूट फार सिक्यूरिटीज स्टडीज (ईयूआईएसएस) के अध्ययन में कहा गया था कि भारत अमेरिका और चीन के बाद विश्व का तीसरा सबसे शक्तिशाली राष्ट्र है। विश्व शक्ति का 22 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका के पास है। जबकि 16 प्रतिशत चीन और आठ प्रतिशत भारत के पास है।  भारत को कुपोषण और भरण पोषण के मामले में महिलाओं की खराब स्थिति के कारण काफी नीचे स्थान मिला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व में 42 प्रतिशत पैदायशी कमजोरी भारत में हैं। इस मामले में पाकिस्तान (पांच प्रतिशत) की स्थिति बेहतर है।
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शनिवार, अक्टूबर 02, 2010
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 Tausif Hindustani
जिन्होंने बाबरी मस्जिद को शहीद किया आज दुनिया उनका हाल जानती है , आज जितने लोग उस समय उनके साथ थे लगभग सभी लोगो ने उनका साथ छोड़ दिया है , इस घिनौने काम  को अंजाम देने वाले और लोगो की भावनाओ के साथ खेलने वाले में सब से ऊपर जिसका नाम हमेशा काले शब्दों में लिखा जायेगा, वह लाल कृष्ण आडवाणी है  . ऊपर वाला जब किसी को ज़लील करना चाहता है तो खुद वह शख्स  अपने मुंह से ही उलटी सीधी बाते करने लगता है . यही आडवाणी जिन्नाह जैसे देश को बाटने वाले  लोगो की तारीफ करने लगता है , जिस से उन्ही की पार्टी में आज उनकी क्या इज्ज़त है सभी को पता है , वो अब पार्टी में कोई मायने नहीं रखते सिर्फ नाम के बचे हैं .जिन्हें हिन्दुस्तानी की जनता ने प्रधानमंत्री के कुर्सी पर बैठाने से इंकार कर दिया और वो  प्रधानमंत्री  बनने की तमन्ना  लिए ही दुनिया से कूच कर जाये . दुसरे पायेदान  पर उमा भारती जो आज दर दर भटक रही हैं  की भाई भाजपा वालो,  हमें वापस पार्टी में रखलो . जब ऊपर वाला  किसी की मति मार दे तो वह मुख्यमंत्री के पद से सीधे निचे धडाम से गिर जाता है , कहा वो शान कहाँ अब उनको कोई घास न डालने वाला अब वो अपने ही पार्टी की लुटिया डुबोने में अपना समय बिता रही हैं.
तीसरे नम्बर  हैं , कल्याण सिंह जिसने सब कुछ होने दिया जिसकी एक दिन सजा भी भुगत चुके हैं जेल में रह कर. आज बेचारे  जब अयोध्या गए तो इन्सान तो छोडिये एक कुत्ता भी उनके पीछे पीछे नहीं आया . चार नम्बर है स्वर्गीय पि वि नरसिंहा  जो जनाब टी वि पे बाबरी मस्जिद के शहीद होने का नज़ारा देखते रहे और प्रधानमंत्री होते हुए कहते रहे रोते रहे हम कुछ नहीं कर सके . मुसलमान चिल्लाते रह गए लेकिन इस स्वयंसेवक संघ के पुराने कारसेवक रह चुके के दिल में  लड्डू फूट रहे थे और होठों   पर झूठी रंज व ग़म की बाते . मरने तक गुमनामी में ही रह गए   उन्ही की पार्टी  वालो तक ने उन्हें छोड़ दिया . इसी मुद्दे पर  खाने कमाने वाली भाजपा उस माजिद को कलंक बताने वाली भाजपा एक दिन आखिर मान गयी बाबरी मस्जिद का गिरना राष्ट्रीय शर्म की बात है , लेकिन अब जो हाई कोर्ट न फैसला दिया है आप ही तय करे की   ये किस दर्जे में रखेगे शर्म या गर्व
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शुक्रवार, सितंबर 17, 2010
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Ibn7
नई दिल्ली। भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, यानि इस मुल्क में सभी धर्मों की बराबर इज्जत है। संविधान भी आपको आपका धर्म अपनाने की आजादी देता है। लेकिन क्या ये आजादी आज सिर्फ कागजों पर है? आखिर नाम बताने पर आपको घूरती हुई निगाहों से क्यों देखा जाता है? आईबीएन7 ने दिल्ली, एनसीआर और मुंबई में ऐसी ही एक दुनिया देखी जहां आपका नाम सुनने के बाद आपको किराये पर आशियाना दिया जाता है।  आईबीएन7 और कोबरापोस्ट के रिपोर्टर सैयद मसरूर हसन का खास मिशन- माई नेम इज खान चलाया 
जिसमे मुम्बई और दिल्ली के अलग अलग इलाको में वो मुसलमान के नाम पर किराये का मकान लेने गए तो तक़रीबन 88 % लोगो ने मुसलमानों को किराये पर मकान देने से इंकार दिया . कहा की सोसाइटी में मुस्लिम अलाउड  नहीं है , इनमे से कई लोगो को क्रिस्चियन भी मंज़ूर नहीं है  ,ये है आज़ाद भारत का एक घिनौना सच
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गुरुवार, सितंबर 16, 2010
साठ साल से बाबरी मस्जिद की क़ानूनी लड़ाई लड़ते हाशिम अंसारी

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रामदत्त त्रिपाठी  "मैं फ़ैसले का भी इंतज़ार कर रहा हूँ और मौत का भी....लेकिन यह चाहता हूँ मौत से पहले फ़ैसला देख लूँ." ये शब्द हैं 90 साल के बुज़ुर्ग हाशिम अंसारी के, जो मेरे कानों में बराबर गूंज रहे हैं.

साठ साल से बाबरी मस्जिद की क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे 90 वर्षीय हाशिम गज़ब के जीवट के आदमी हैं. लेकिन उनके चेहरे पर झुर्रियों के साथ-साथ ऐसी मायूसी मैंने बीस वर्षों में पहली बार देखी.

कारण पूछने पर वो कहते हैं, "कुछ मायूसी है हालात को देखते हुए. जो मुखालिफ़ पार्टियां चैलेंज कर रही हैं, उससे मायूसी है और हुकूमत कोई एक्शन नहीं लेती."

हाशिम अयोध्या के उन कुछ चुनिंदा बचे हुए लोगों में से हैं जो लगातार 60 वर्षों से अपने धर्म और बाबरी मस्जिद के लिए संविधान और क़ानून के दायरे में रहते हुए अदालती लड़ाई लड़ रहे हैं.

'हिंदुओं से भाईचारा, खानपान'

स्थानीय हिंदू साधु-संतों से उनके रिश्ते कभी ख़राब नहीं हुए. मै जब भी उनके घर गया, हमेशा अड़ोस पड़ोस के हिंदू युवक चचा-चचा कहते हुए उनसे बतियाते हुए मिले.

हाशिम कहते हैं, "मैं सन 49 से मुक़दमे कि पैरवी कर रहा हूँ, लेकिन आज तक किसी हिंदू ने हमको एक लफ़्ज़ ग़लत नहीं कहा. हमारा उनसे भाईचारा है. वो हमको दावत देते हैं. मै उनके यहाँ सपरिवार दावत खाने जाता हूँ."

विवादित स्थल के दूसरे प्रमुख दावेदारों में निर्मोही अखाड़ा के राम केवल दास और दिगंबर अखाड़ा के राम चंद्र परमहंस से हाशिम की अंत तक गहरी दोस्ती रही.


परमहंस और हाशिम तो अक्सर एक ही रिक्शे या कार में बैठकर मुक़दमे की पैरवी के लिए अदालत जाते थे और साथ ही चाय-नाश्ता करते थे.

उनके ये दोनों दोस्त अब जीवित नहीं रहे. मुक़दमे के एक और वादी भगवान सिंह विशारद भी नहीं रहे.

हाशिम के समकालीन लोगों में निर्मोही अखाड़ा की ओर से मुक़दमे के मुख्य पैरोकार महंत भास्कर दास जीवित हैं.

दंगाइयों का हमला, स्थानीय हिंदुओं ने बचाया
अयोध्या अवध की मिली जुली गंगा जमुनी तहजीब का केंद्र रहा है.

हाशिम इसी संस्कृति में पले बढे़ जहां मुहर्रम के जुलूस पर हिंदू फूल बरसाते हैं और नवरात्रि के जुलूस पर मुसलमान फूलों की बारिश करते हैं.

हाशिम पिछले साल हज के लिए मक्का गए थे तो कई जगह उन्हें भाषण देने के लिए बुलाया गया. हाशिम ने वहाँ लोगों को बताया कि हिंदुस्तान में मुसलमानों को कितनी आज़ादी है और वे कई मुस्लिम मुल्कों से बेहतर हैं.

हाशिम का परिवार कई पीढ़ियों से अयोध्या में रह रहा है. वो 1921 में पैदा हुए, 11 साल की उम्र में सन् 1932 में उनके पिता का देहांत हो गया.

दर्जा दो तक पढाई की. फिर सिलाई यानी दर्जी का कम करने लगे. यहीं पड़ोस में फैजाबाद में उनकी शादी हुई. उनके बच्चे हैं. एक बेटा और एक बेटी. उनके परिवार की आमदनी का कोई खास ज़रिया नहीं है.

छह दिसंबर, 1992 के बलवे में बाहर से आए दंगाइयों ने उनका घर जला दिया, पर अयोध्या के हिंदुओं ने उन्हें और उनके परिवार को बचाया.

जो कुछ मुआवज़ा मिला उससे हाशिम ने अपने छोटे से घर को दोबारा बनवाया और एक पुरानी अम्बेसडर कार ख़रीदी.

बेटा मोहम्मद इक़बाल इसे टैक्सी के तौर पर चलाते है, वह अक्सर हिंदू तीर्थयात्रियों को इसी टैक्सी में अयोध्या के मंदिरों के दर्शन कराते हैं.

हाशिम एक बात बड़े गर्व से कहते हैं, "हमने बाबरी मस्जिद की पैरवी ज़रुर की. लेकिन राजनीति फ़ायदा उठाने के लिए नही."

उनके एक साथी बताते हैं कि छह दिसंबर, 1992 के बाद एक बड़े नेता ने उनको दो करोड़ रुपए और पेट्रोल पम्प देने की पेशकश की तो हाशिम ने न केवल ठुकरा दिया बल्कि उस संदेशवाहक को दौड़ा दिया.

सादगी का रहन-सहन
हाशिम अंसारी और उनके परिवार का रहन-रहन नहीं बदला. उनके छोटे से कमरे में दो तखत पड़े हैं. यही उनका ड्राइंग रूम है और यही बेड रूम.

दीवार पर बाबरी मस्जिद की पुरानी तस्वीर टंगी है और घर के बाहर अंग्रेज़ी में बाबरी मस्जिद पुनर्निमाण समिति का बोर्ड.

मै पहुंचा तो हो हाशिम जांघिया पहने लेटे थे. जल्दी जल्दी लुंगी और कुरता पहना, सिर पर सफ़ेद टोपी लगाई और बातचीत के लिए तैयार हुए.

वर्ष 90 साल की उम्र में भी उनकी याददाश्त दुरुस्त है. वर्ष 1934 का बलवा भी उन्हें याद है, जब हिंदू वैरागी संन्यासियों ने बाबरी मस्जिद पर हमला बोला था.

वो बताते हैं कि ब्रिटिश हुकूमत ने सामूहिक जुर्माना लगाकर मस्जिद की मरम्मत कराई और जो लोग मारे गए उनके परिवारों को मुआवज़ा भी दिया.

सन 1949 में जब विवादित मस्जिद के अंदर मूर्तियां रखी गई, उस समय प्रशासन ने शांति व्यवस्था के लिए जिन लोगों को गिरफ़्तार किया, उनमे हाशिम भी शामिल थे.

हाशिम कहते हैं, "चूँकि मै सोशल (मेलजोल रखने वाला) हूँ इसलिए लोगों ने मुझसे मुक़दमा करने को कहा और इस तरह मैं बाबरी मस्जिद का पैरोकार हो गया."

'हर हाल में अमन'
बाद में 1961 में जब सुन्नी वक्फ़ बोर्ड ने मुक़दमा किया तो उसमे भी हाशिम एक मुद्दई बने. पुलिस प्रशासन की सूची में नाम होने की वजह से 1975 की इमरजेंसी में उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया और आठ महीने तक बरेली सेंट्रल जेल में रखे गए.

यह भी एक वजह हो सकती है कि हाशिम ने कांग्रेस को कभी माफ़ नही किया. बाबरी मस्जिद मामले में हर क़दम पर वह कांग्रेस को दोषी मानते हैं.

हाशिम सभी पार्टियों के मुस्मिल नेताओं के भी आलोचक हैं. बातचीत में हाशिम बार-बार जोर देते हैं, "हर हालत में हम अमन चाहते हैं, मस्जिद तो बाद की बात है."

हाशिम कहते हैं, "अगर हम मुक़दमा जीत गए तो भी मस्जिद निर्माण तब तक नहीं शुरू करेंगे, जब तक कि हिंदू बहुसंख्यक हमारे साथ नहीं आ जाते."

हाशिम अब अपनी निजी सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं. उनका कहना है कि मुझे अयोध्या नहीं बाहर के लोगों से ख़तरा है, जो माहौल बिगाड़ने के लिए कुछ भी कर सकते हैं ताकि मुसलमान डर जाएँ.

हाशिम को शिकायत है कि पहले उनकी सुरक्षा में तैनात तीनों सिपाहियों के पास हथियार थे. अब उत्तर प्रदेश सरकार ने दो हथियार वापस ले लिए हैं. एक हथियार है जिससे तीनों सिपाही बारी बारी से आठ आठ घंटे डयूटी देते हैं.

हाशिम को आश्वस्त करने के लिए स्थानीय पुलिस अफसरों ने उनके घर के बगल ही पुलिस पिकेट तैनात कर दी है.

इसके बावजूद हाशिम के चेहरे पर चिंता के भाव हैं. हाशिम पहले कभी इतना चिंतित नहीं दिखे. चलते-चलते बार-बार कहते हैं - "हाल ख़बर लेते रहिए."
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शुक्रवार, सितंबर 10, 2010
ईद मुबारक!

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DABIR  NEWS  के जानिब से सभी भाईयों को ईद मुबारक हो ।
 इस मुबारक मौके पर बस अल्लाह से यही दुआ है की हम हिन्दुस्तानी भाई अपने सारे गिले शिकवे  भूल के एक दोसरे के गले मिले आपस में मिलजुल के रहें , और हिंदुस्तान के तरक्की  में अपना योगदान दे । अल्लाह हमेशा हमें अपने अमान में रखे
  आमीन
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शुक्रवार, अगस्त 27, 2010
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विनीत खरे

बीबीसी संवाददाता, मुंबई

घटती जनसंख्या से परेशान पारसी समुदाय के लिए एक फ़र्टिलिटी प्रोजेक्ट काफ़ी मददगार साबित हो रहा है.वर्ष 2001 के आंकड़ों के मुताबिक भारत में पारसियों की संख्या 69 हज़ार के आसपास थी.इस समस्या से निपटने के लिए वर्ष 2004 में 'बांबे पारसी पंचायत' ने मुंबई के जसलोक अस्पताल की एक स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉक्टर अनाहिता पंडोल की मदद से एक फ़र्टिलिटी क्लीनिक की शुरुआत की.

तीन सौ साल से भी ज़्यादा पुरानी संस्था 'बांबे पारसी पंचायत' की ये पहल उन पारसी दंपत्तियों के लिए थी जिन्हें गर्भधारण में समस्या पेश आ रही थी.इस पूरे प्रयास को नाम दिया गया है 'पंचायत फ़र्टिलिटी प्रोजेक्ट.'

इस परियोजना में दंपत्तियों को गर्भधारण में हो रही समस्या के लिए सलाह दी जाती है, पुरुषों में शुक्राणुओं या फिर खून की जाँच की जाती है, और आईवीएफ़ तकनीक का भी सहारा लिया जाता है.दंपत्तियों को यौन समस्याओं के बारे में भी जानकारी और सलाह दी जाती है.

इस प्रोजेक्ट से अभी तक 500 से ज़्यादा दंपत्ति मदद ले चुके हैं.डॉक्टर पंडोल का कहना है, ''70 फ़ीसदी से ज़्यादा मामलों में दंपत्तियों को सलाह की ज़रूरत होती है. अब तक 160 दंपत्तियों को बच्चा हासिल करने में सफ़लता मिली है. एक दंपत्ति को तीन बच्चे पैदा हुए.''''कई दंपत्तियों को जुड़वा बच्चे हासिल हुए. कई दंपत्ति शादी के छह महीने बाद आते हैं, कई बार वो सात साल बाद आते हैं. धीरे-धीरे लोगों में जागरुकता फ़ैल रही है.''

इस परियोजना पर आने वाले खर्च का ज़िम्मा बांबे पारसी पंचायत संभालती है.

पंचायत के मुखिया मेहिल पी कोल्हा कहते हैं,'' ये योजना पूरे भारत में रहने वाले पारसियों के लिए है. कुछ मामलों में इलाज का खर्चा डेढ़ लाख तक पहुँच जाता है. हम दंपत्तियों से उनकी आर्थिक पृष्ठभूमि के बारे में नहीं पूछते.

''वर्ष 2004 में पारसियों की गिरती जनसंख्या के बारे में विचार हुआ. बहुत सारे दंपत्ति गर्भधारण की समस्या से जूझ रहे थे. फिर हमने सोचा क्यों न ऐसे लोगों की मदद की जाए.''डॉक्टर पंडोल इस सेवा के लिए कोई पैसा नहीं ले रही हैं, लेकिन वो इसे बहुत तूल नहीं देना चाहतीं.

जनसंख्या में कमी को लेकर पारसी समुदाय के साथ भी वही समस्या है जो दूसरे समुदायों के साथ है. दंपत्ति अपने करियर में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि बच्चों के बारे में सोच पीछे रह जाती है. जब वो परिवार बढ़ाने के बारे में सोचते हैं तब तक थोड़ी देर हो चुकी होती है.पारसी समुदाय में लड़कों की शादी की उम्र 35 के आसपास और लड़कियों की उम्र 25-30 साल के बीच होती है और उन्हें अपने समुदाय में ही शादी करने के लिए प्रेरित किया जाता है.

पी कोल्हा के मुताबिक अगर कोई पारसी लड़का किसी ग़ैर-पारसी लड़की से शादी करता है तो भी लड़की को गैर-पारसी ही माना जाता है, लेकिन बच्चे पारसी माने जाते हैं. लेकिन अगर कोई पारसी लड़की गैर-पारसी लड़के से शादी करती है तो उसके बच्चे पारसी नहीं माने जाते.पारसी समुदाय की घटती जनसंख्या के लिए ऐसी मान्यताओं की आलोचना भी होती रही है.

जनसंख्या बढ़ाने के लिए पारसी समुदाय 'स्पीड डेटिंग' का सहारा भी ले रहा है जिसमें लड़के-लड़कियों के आपसी मेल-जोल को बढ़ावा दिया जाता है.इसके अलावा अगर किसी दंपत्ति को एक से ज़्यादा बच्चा होता है तो पंचायत की ओर से दंपत्ति को हर बच्चे के लिए 18 वर्ष की उम्र तक हर महीने 3,000 रुपए दिए जाते हैं.
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गुरुवार, अगस्त 19, 2010
'आत्मा' का वजन सिर्फ 21 ग्राम !

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इंसानी आत्मा का वजन कितना होता है? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए 10 अप्रैल 1901 को अमेरिका के डॉर्चेस्टर में एक प्रयोग किया गया। डॉ. डंकन मैक डॉगल ने चार अन्य साथी डॉक्टर्स के साथ प्रयोग किया था।

इनमें 5 पुरुष और एक महिला मरीज ऐसे थे जिनकी मौत हो रही थी।इनको खासतौर पर डिजाइन किए गए फेयरबैंक्स वेट स्केल पर रखा गया था। मरीजों की मौत से पहले बेहद सावधानी से उनका वजन लिया गया था। जैसे ही मरीज की जान गई वेइंग स्केल की बीम नीचे गिर गई। इससे पता चला कि उसका वजन करीब तीन चौथाई आउंस कम हो गया है।

ऐसा ही तजुर्बा तीन अन्य मरीजों के मामले में भी हुआ। फिर मशीन खराब हो जाने के कारण बाकी दो को टेस्ट नहीं किया जा सका। साबित ये हुआ कि हमारी आत्मा का वजन 21 ग्राम है। इसके बाद डॉ डंकन ने ऐसा ही प्रयोग 15 कुत्तों पर भी किया। उनका वजन नहीं घटा, इससे निष्कर्ष निकाला कि जानवरों की आत्मा नहीं होती।


फिर भी इस पर और रिसर्च होना बाकी थी लेकिन 1920 में डंकन की मौत हो जाने से रिसर्च वहीं खत्म हो गई। कई लोगों ने इसे गलत और अनैतिक भी माना। इस पर 2003 में फिल्म भी बनी थी। फिर भी सच क्या है ये एक राज है।
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नई दिल्ली. भोपाल गैस त्रासदी मामले में भारत को डाउ केमिकल्स से मुआवजा लेने की कोशिशें छोड़ देने की अमेरिकी नसीहत पर आज लोकसभा में खूब हंगामा हुआ। सदन की कार्रवाई शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्‍वराज ने यह मसला उठाया। उन्‍होंने जानना चाहा कि क्‍या सरकार ने अमेरिका के दबाव में भोपाल पीडि़तों को मुआवजा के मामले में गुपचुप करार कर लिया है।

सुषमा के इस बयान के बाद समूचा विपक्ष उनके साथ उठ खड़ा हुआ और विपक्षी सदस्‍य हंगामा करने लगे। राजद अध्‍यक्ष लालू प्रसाद और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की। इस बीच सुषमा ने मध्‍य प्रदेश के सभी सांसदों से वॉकआउट कर सदन के बाहर धरना देने का आह्वान किया। हालांकि संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल ने सरकार का बचाव करते विपक्ष के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

मुआवजे को लेकर अमेरिकी दबाव

इससे पहले ऐसी खबरें आई थीं कि भोपाल गैस त्रासदी के पीडि़तों के लिए मुआवजे को लेकर अमेरिका भारत पर दबाव बना रहा है। अमेरिका ने भारत को चेतावनी दी है कि यदि वह ऐसा नहीं करता तो दोनों देशों के बीच निवेश संबंधों पर असर पड़ सकता है। एक निजी चैनल के मुताबिक, यह परोक्ष धमकी अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा उप सलाहकार फ्रॉमैन माइकल ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया को भेजे ई-मेल में दी है।

ई-मेल में उन्होंने लिखा है- ‘डाउ कैमिकल्स को लेकर भारत में हो-हल्ला हो रहा है। मुझे इसके पूरे ब्योरे की जानकारी तो नहीं है,लेकिन मेरा मानना है कि हमें ऐसी स्थिति से बचना चाहिए जिससे निवेश संबंध ठंडे पड़ जाएं।’ फ्रॉमैन ने यह टिप्पणी अहलूवालिया की ई-मेल के जवाब में की है। अहलूवालिया ने विश्व बैंक से रियायती दर पर लोन लेने में अमेरिका का सहयोग मांगा था। हालांकि फ्रॉमैन ने इस मामले में मदद का भरोसा दिलाया।

सरकार का मत

सरकारी सूत्रों ने साफ किया कि इस मामले में भारत का रुख स्पष्ट है। गृह मंत्री पी चिदंबरम पिछले हफ्ते संसद में हुई बहस के बाद इस बारे में बयान दे चुके हैं। उत्तरदायित्व के बारे में उन्होंने कहा था कि इस मामले से तीन कंपनियां जुड़ी हैं। जैसे ही मध्यप्रदेश हाईकोर्ट उत्तरदायित्व तय कर देगा तो संबंधित कंपनी या कंपनियों को मुआवजे के लिए कहा जाएगा। किसी को बख्शने का सवाल ही पैदा नहीं होता।व्हाइट हाउस बचाव की मुद्रा में

इस बीच, व्हाइट हाउस बचाव की मुद्रा में है। डैमेज कंट्रोल की कवायद के तहत व्हाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता बेंजामिन चांग ने कहा कि दोनों के बीच कोई संबंध नहीं है। हम भारत में इस मसले की संवेदनशीलता को समझते हैं और गहरे द्विपक्षीय रिश्तों के प्रति वचनबद्घ हैं।

कैसी दोस्ती निभा रहे ओबामा?

अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने पिछले दिनों फरमाया- भारत जैसे देश भविष्य की नौकरियों, ऊर्जा और शिक्षा के क्षेत्र में अमेरिका को पछाड़ने में लगे है, लेकिन अमेरिकी कोई भी काम दूसरे नंबर पर रहने के लिए नहीं करता।

प्रोफेशनल वीजा फीस में बढ़ोत्तरी के फैसले से भारत की आईटी कंपनियों के हितों को ठेस पहुंची है। न्यूयॉर्क के सीनेटर चाल्र्स शूमर ने भारत की कंपनी इंफोसिस की तुलना चोरी की कारों की मरम्मत और उनके कलपुर्जे बेचने वाली दुकान से की थी। ..और अब भोपाल त्रासदी में भारत को डाउ से मुआवजा लेने की कोशिशें छोड़ देने की नसीहत। भारत को असुरक्षित बताकर अमेरिका नागरिकों को वहां न जाने की सलाह आए रोज देता है।

गैस त्रासदी से जुड़े मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। मैं ई-मेल की व्याख्या इस रूप में नहीं करता कि डाउ और विश्व बैंक में कोई संबंध है। विश्व बैंक ने ऋण सीमा बढ़ाने के भारत के आग्रह को पहले ही स्वीकार कर लिया है। मोंटेकसिंह अहलुवालिया, उपाध्यक्ष, योजना आयोग

धरने से हटे गैस पीड़ित, नहीं मिली टेंट गाड़ने की इजाजत

अपनी मांगों के समर्थन में पिछले 23 दिन से राष्ट्रीय राजधानी के जंतर मंतर पर धरने पर बैठे सैकड़ों भोपाल गैस पीड़ितों को स्थानीय प्रशासन से टेंट लगाने की अनुमति न मिलने के कारण हटना पड़ा है। इन प्रदर्शनकारियों को विभिन्न राजनीतिक दलों के 64 सांसदों का समर्थन प्राप्त है।

भोपाल ग्रुप फार इनफारमेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा ने बताया कि गैस पीड़ित उमस भरी गर्मी तथा बारिश से बचाव के लिए टेंट लगाना चाहते थे, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं मिली। वहीं भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष मोर्चा के बालकृष्ण नामदेव ने कहा कि पहले ही पीड़ा झेल रहे इन लोगों को अपनी आवाज उठाने के लिए भी जगह नहीं मिल रही है। उन्होंने मंत्री समूह द्वारा तय मुआवजे पर भी असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि कई लोगों को तो आज तक कोई मुआवजा नहीं मिला है।

कौन सुनेगा फरियाद

पीड़ितों से जुडे विभिन्न संगठन प्रधानमंत्री को एक अपील सौंपेंगे जिसमें पर्याप्त मुआवजा देने, चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा पुनर्वास आदि की मांग करेंगे।
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सोमवार, अगस्त 16, 2010
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी ‘फेसबुक’ से जुड़े, लोकप्रिय हुए!

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जोश 18
 लगता है अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी सोशल नेटवर्किंग की उपयोगिता और महत्ता समझ ली है। सरकार के एक के बाद एक महकमों द्वारा सोशल नेटवर्किंग से जुड़ने के बाद अब स्वयं प्रधानमंत्री भी इससे जुड़ गए हैं और उन्होंने ‘फेसबुक’ पर अपना एकाउंट खोल लिया है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट ‘फेसबुक’ पर एकाउंट (http://www.facebook.com/pages/Dr-Manmohan-Singh/17780227654 ) खोलना लोगों को हैरत में डालता है और इस नए मीडिया की महत्ता को और बढ़ा देता है।

सोशल नेटवर्किंग की उपयोगिता और लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ‘फेसबुक’ पर एकाउंट खोलते ही प्रधानमंत्री से 42 हजार फॉलोअर जुड़ गए।

इसमें प्रधानमंत्री का ईमेल पता भी दिया गया है, जहां नागरिक गण उनसे संपर्क कर सकते हैं। (http://pmindia.nic.in/write.htm )

इससे पहले देश के विदेश मंत्रालय ने भी एक अन्य लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट ‘ट्विटर’ पर अपना एकाउंट खोला।

भारतीय विदेश मंत्रालय भी ‘ट्विटर’ से जुड़ा!
सोशल नेटवर्किंग से सरकार और सरकार के महकमों का जुड़ना एक तरह से प्रशासन की पारदर्शिता का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

बदलते परिवेश में केवल मनोरंजन, मेल-मिलाप, व्यापारिक अथवा व्यावसयिक स्तर पर ही नहीं, राजनीतिक स्तर पर भी सोशल नेटवर्किंग की उपयोगिता को स्वीकार करते हुए भारत जैसे विकासशील देश में उसका इस्तेमाल एक नई शुरूआत है।

भारत की युवा पीढ़ी इस तरह के नए माध्यमों से लगातार खुद को जोड़ती जा रही है। ऐसे में सरकार द्वारा खुद को आम लोगों से सीधे जोड़ना और उन्हें अपनी बात कहने के लिए एक सीधा और पारदर्शी प्लैटफॉर्म देना एक अच्छा संकेत है।
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रविवार, अगस्त 15, 2010
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Navbharat Times 
आज हम देश की आजादी की 63वीं सालगिरह मना रहे हैं। इस मौके पर एनबीटी ने अपने युवा पाठकों से पूछा था कि आजादी के उनके लिए मायने क्या है

और उन्हें किससे आजादी चाहिए? हमें बंपर रेस्पॉन्स मिला और सैकड़ों पाठकों ने अपनी राय लिखकर हमारे पास भेजी। इनसे हमें पता चला कि देश का युवा सिर्फ अपने बारे में नहीं सोच रहा। उसे फिक्र है अपने देश की और उसकी आजादी, संस्कृति और विरासत को बचाए रखने की। बता रही हैं प्रियंका सिंह :

आज हम देश की आजादी की 63वीं सालगिरह मना रहे हैं। इस मौके पर एनबीटी ने अपने युवा पाठकों से पूछा था कि आजादी के उनके लिए मायने क्या हैं और उन्हें किससे आजादी चाहिए? हमें बंपर रेस्पॉन्स मिला और सैकड़ों पाठकों ने अपनी राय लिखकर हमारे पास भेजी। इनसे हमें पता चला कि देश का युवा सिर्फ अपने बारे में नहीं सोच रहा। उसे फिक्र है अपने देश की और उसकी आजादी, संस्कृति और विरासत को बचाए रखने की।वह आगे जरूर बढ़ना चाहता है लेकिन अपना मजबूत हाथआगे बढ़ाकर पूरे मुल्क को अपने साथ तरक्की की राह पर कदमताल कराना चाहता है। वह अपने सपनों की जीना चाहता है, पर इन सपनों में उसने अपने 'इंडिया' के लिए लिए जगह बचाए रखी है। वह लिवाइस पहनता है और अरमानी पहनने की चाहत रखता है, पर दीवाली पर पूजा करने के बाद पैर छूकर बड़ों का आशीर्वाद लेना नहीं भूलता।

अपनी तहजीब को गले से लगाए रखनेवाले इस युवा के मन में एक नाराजगी है। नाराजगी है देश में पसरे करप्शन के प्रति। करीब 80 फीसदी पाठकों ने कहा कि उन्हें भ्रष्टाचार और इसे बढ़ावा देनेवाली एजेंसियों से आजादी चाहिए। महंगाई, गरीबी, अपराध, बेरोजगारी, आतंकवाद जैसे मुद्दे भी बड़ी संख्या में लोगों ने उठाए। इनसे आजादी की चाहत भी बहुतों ने जताई। वैसे, पाठकों के जवाब कुछ सवाल भी खड़े कर गए। मसलन, हम जातिवाद, क्षेत्रवाद और महिलाओं के साथ भेदभाव से कब मुक्त होंगे?

कब हम सबको एक बराबर नजर से देखेंगे? कब जिंदगी अपनी मर्जी से जी पाएंगे? वैसे, एक हताशा भी नजर आती है, जब कुछ लोगों ने कहा कि ऐसी आजादी का क्या फायदा, जब हम जाति-धर्म के नाम पर बंट गए हैं, जब हम विदेशी मानसिकता के गुलाम होते जा रहे हैं? राहत की बात यह है कि स्वतंत्रता और स्वतंत्रता का फर्क समझने की हिमायत करनेवाले भी काफी लोग हैं। यानी आजादी सिर्फ अपनी बात को रखने और अपने मुताबिक जीने की, न कि दूसरों पर अपने विचारों को थोपने और उनकी आजादी में दखल देने की।

अब बात करते हैं सबसे बड़ी चिंता करप्शन की। ज्यादातर युवाओं का मानना है कि करप्शन और राजनीति सिक्के के दो पहलू हैं, इसलिए नेताओं से आजादी की ख्वाहिश जतानेवाले भी कम नहीं हैं। दरअसल, करप्शन वाकई देश की सबसे बड़ी समस्या बन गया है। हमारे देश में भ्रष्टाचार, घोटाले और धांधलियां बेहद आम हैं। चीनी घोटाला, चारा घोटाला, टेलिकॉम घोटाला, यूरिया घोटाला, स्टाम्प पेपर घोटाला, बाढ़ घोटाला, सत्यम घोटाला... यह लिस्ट इतनी लंबी है कि हिसाब रखना भी मुश्किल लगता है, जबकि जिन मामलों का खुलासा हो ही नहीं सका, वे इससे कई गुना ज्यादा हैं।

वेबसाइट http://www.corruptioninindia.org/scams की मानें तो 1992 से अभी तक देश में 73 लाख करोड़ रुपये घोटाले की भेंट चढ़ चुके हैं। इतनी बड़ी रकम से 2.4 करोड़ प्राइमरी हेल्थकेयर सेंटर बनाए जा सकते हैं, 14.6 करोड़ कम बजट के मकान बन सकते थे, नरेगा जैसी 90 स्कीमें शुरू हो सकती हैं, 60.8 करोड़ लोगों को नैनो मिल सकती है, हर भारतीय को 56 हजार रुपये या बीपीएल से नीचे रहनेवाले सभी 40 करोड़ लोगों में से हर किसी को 1.82 लाख रुपये मिल सकते हैं। यानी पूरे देश की तस्वीर बदल सकती है। अनुमान है कि जीडीपी के करीब आधे हिस्से के बराबर रकम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनैशनल द्वारा 2009 के लिए जारी करप्शन इंडेक्स में कुल 169 देशों में से हम 84वें नंबर पर पाए गए, यानी लिस्ट में करीब-करीब बीच में। न्यू जीलैंड को सबसे कम करप्ट देश पाया गया। इसके बाद डेनमार्क, सिंगापुर, स्वीडन, स्विट्जरलैंड आदि का नंबर है। बड़े देशों की बात करें तो जर्मनी 14वें, ब्रिटेन 18वें, अमेरिका 19वें और फ्रांस 24वें नंबर पर थे। यह लिस्ट सबसे कम करप्ट के मुताबिक बनाई जाती है।

सवाल यह है कि जब हम एक इकॉनमी के रूप में तेजी से विकसित हो रहे हैं और आनेवाले वक्त में खुद को ग्लोबल पावर के रूप में देखते हैं तो फिर विकसित देशों के मुकाबले हम इतने करप्ट क्यों हैं? पॉलिटिक्स, जूडिशरी, सेना, कस्टम, मेडिकल, एजुकेशन, स्पोर्ट्स, ट्रांसपोर्ट सभी में करप्शन पसरा हुआ है। नेताओं, ब्यूरोक्रेट्स और अपराधियों के बीच साठगांठ तो 1993 में वोहरा रिपोर्ट में चिंता जताई गई थी लेकिन उसके बाद से अपराधियों का राजनीति में प्रवेश बढ़ा ही है।

अब भी नेता दागी हैं। इसी तरह, हाल में राज्यसभा में पेश ब्यौरे के मुताबिक 84 आईएएस और 33 आईपीएस अधिकारियों पर आपराधिक मामले चल रहे हैं। बीते साल एक सर्वे में सिंगापुर, थाइलैंड, साउथ कोरिया, जापान, मलयेशिया, चीन आदि एशियाई देशों के ब्यूरोक्रेट्स में हमारे ब्यूरोक्रेट्स सबसे कम लायक पाए गए और उनके साथ काम करना काफी धीमा और मुश्किल भरा लगा। ये वे लोग हैं, जिनके कंधे पर देश का दारोमदार है। कॉमनवेल्थ गेम्स में करप्शन का उजागर होना इस फेहरिस्त में ताजा मामला है। सब जानते हैं कि सीवीसी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में करप्शन कम से कम 16 प्रोजेक्ट पर सवाल उठाया है, जिन पर जनता के 2500 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। यह सिर्फ एक झलक भर है, असलियत इससे कहीं भयानक होगी।

नेताओं, ब्यूरोक्रेट्स और ठेकेदारों की यह सांठगांठ देश की साख को डुबोएगी नहीं, ऐसी उम्मीदें कम ही हैं। शायद खेल मंत्री का कॉमनवेल्थ गेम्स को भगवान भरोसे कहना इस बात को साबित करता है कि हालत कंट्रोल में नहीं और अब भगवान ही इसका मालिक है।

लेकिन दूसरों पर उंगली उठाने से पहले हम जरा खुद को भी आंक लें। हममें से कितने लोग ऐसे हैं, जो चौराहे पर ट्रैफिक पुलिसवाला न होने पर खुद को रेड लाइट जंप करने से रोक पाता है, खासकर रात के अंधेरे में। कितने लोग ऐसे हैं, जो किसी भी इवेंट का पास होने के बावजूद टिकट खरीदना पसंद करता है। खुद को वीआईपी और नियमों से परे दिखाने में किसको गर्व महसूस नहीं होता? किसी बाबू की मुट्ठी गरम करके शॉर्टकट से अपना काम नहीं निकलवाना चाहता। बीते साल एक सर्वे में पता चला कि हममें से 50 फीसदी लोगों को पब्लिक ऑफिस में अपना काम निकलवाने के लिए रिश्वत देने का फर्स्ट हैंड एक्सपीरियंस है। जाहिर है, हम खिलाते हैं, इसलिए वे खाते हैं।

भ्रष्टाचार से लड़ाई के तमाम साधन हैं हमारे पास। कैग, सीवीसी, आईबी, सेबी, ऑम्ब्ड्समैन, आरबीआई, जैसे कई एंटी करप्शन वॉच डॉग हैं। इनसे भी बड़ा आरटीआई का हथियार हमारे हाथ में है। हालांकि यह राह आसान नहीं है। 2009 में आठ लोगों को सच बोलने या करप्शन के खिलाफ आवाज उठाने के बदले में अपनी जान गंवानी पड़ी।
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WILDLIFE. JUNGAL. Tips & Tricks WILDLIFE aag aankh aarati ajadee alankar alvida aman ka paigham amrit anchal anugeet chhand arab india relation arth asmyik hindi kavita atal biharee ayodhya balidan banee basant bhagat azad. bhajan bhasha bhav bimb bhojpuree bhojpuri doha bhoo bhopal book review bundelee chatushpadee chhatisgarhee chunautiyan chunav creation creatior daman dandkala chhand dard dard una ladakon ka desh dharm aur lekhan dhool dhuaan dil doha gazal dohe durmila chhand educational institute in india elegy emaan falak fasal galib ganesh datt sarasvat gantantra divas garal gas treagedy geeta chhand geetika ghalib gulf news haiku hamara dharm harish singh harsh hindee ke haiku hindi laghu katha hindi short story. kargil hindi shortstory hindi smriti geet hinsa aur ham http://sajiduser.blogspot.com/ http://www.sajiduser.blogspot.com/ imarat. india is great india. indian women and arabian shekh indipendence day jabalpur. jannah is man's destination jantantra jhulna chhand kabeer kaikeyee kamand chhand kamlinee kamroop chhand khalish khazana. kiran kriti charcha laghukatha lakhnaoo laloo laxmi lay lokneeti. loktantra lotus love manav mandir manhagaayee marhatha chhand maut meeran krishna megh mekal mirza ghalib narmada neta pakistan pita father's day prakriti prarthna pratibandh pratibha prem pyar quran and gayatri mantra rachna rachnakar radha rajneeti ram janm bhoomi ras sabab sada sakhee salgirah. sanjiv sansadji.com saraswati sat satyagrahee. sanjiv 'salil' shaheed shakeel badyoonee ship shiv shok geet shok samachar sincerity in intention sitasat siya soniya gandhi stuti sundar svasthya aur uchit ilaj svatantrata swaroopanand tadbeer talent. tam taqdeer the world is not enough tomorrow may be or not may be toofan tribhangi chhand ujala ummeed ved and quran ved mantra veenapanee vidyarthiji vivadit maamale aur ham vivek ranjan wildlife DUDHWA अ ध्यक्ष अंग्रेज़ी अंचरा अंतराग्नि अंतर्द्वंद्व अंतर्मंथन अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन अंतस अंधविश्वास अंशकालिक अनुदेशक अखंडता अगीतायन अग्ने अग्रवाल अचेतन अठखेली अति सुखा अभिलाषा अतीत अतुकांत कविता अदा अदावत अनमन अनवर जमाल अनाहत नाद. अनाहिता अनुकूला छंद अनुप्रास अनैतिकता अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस अन्धविश्वास अन्न अन्नकूट अन्ना हज़ारे अन्य कविताएँ अप:तत्व अपरा-शंभु संयोग अपराधीकरण अपशब्द अभिभावक अभियंता अभियान २६-२-२०२१ अभेद बुद्धि अमरकंटक छंद अमरेंद्र अनारायण अमोघ अस्त्र अम्बरीष श्रीवास्तव 'अम्बर' अरमां अर्धनारीश्वर अल्पना अल्लाह अवतार अशांति अशोभनीय - धन अश्वती तिरुनाळ गौरी लक्ष्मीभायी असार असीम आस्था अहं आँख आँवला आंकिक उपमान आंसू आचार्य भगवत दुबे आचार्य संजीव वर्मा "सलिल" आज आजादी आणविक परिवार आतंक की समस्या आतंक हैरान नज़रें आदत आदि-वाणी आदिशक्ति आभा सक्सेना आभूषण आरक्षण आर्टेमिस आलिंगन आलेख- मत करें उपयोग इनका आल्हा गीत भारतवारे बड़े लड़ैया आवश्यक सूचना आशनां आस्था आज़ाद शहीद दिवस इंडियन जिओटेक्नीकल सोसायटी जबलपुर इंडियन ब्लॉगर्स असोसिएशन इच्छा इच्छाएं इन्डली इन्डियन धारावाहिक इन्डिया गेट इमली ईषत इच्छा उ. प्र. राजनीति के ये घोटाले उक्ति उचित मार्ग उत्तर प्रदेश असोसिएसन उत्तर प्रदेश का सच उत्तर प्रदेश ब्लॉगर्स एसोसियेशन उदारीकरण उदासीनता उधार उपन्यासकार और पटकथा उमन्ग उर्दु उल्लाला छंद उषा ऋचाएं ऋतु ऋषि ऋषि अनंग एक तत्व एक रचना आगे मत जा एकाक्षरी श्लोक एतबार एश्वर्य एसिड की शीशी एसे गीत ऐसी तान ओउम ओमप्रकाश तिवारी औरत क्या है कंगना कछारन कथा निराली | कथा-गीत बूढ़ा बरगद कन्घा कन्या भ्रूण-हत्या कब क्या : जनवरी कब्र कर्नाटक कलम कलियुग के मोहन कलुष कल्पना कल्पना रामानी कवि लखनऊ कविता दिया २ कविता दुबे कवित्त कांता रॉय जबलपुर में कागतन्त्र है कागज़-कलम कानून काफिया काम-सृष्टि कामनाएं कामरूप छंद कामिनि कायदे कायस्थ कारण कारण-ब्रह्म कारोबार कार्य कार्यशाला दोहा से कुण्डलिया कार्यशाला : मुक्तक कार्यशाला दोहा से कुण्डलिया कार्यशाला पद कार्यशाला- ​​​​छंद बहर का मूल है- २ कार्यशाला: दोहा - कुण्डलिया कालकांज काव्य और छंद काव्य गोष्ठेी काव्य छंद काव्य शाला काव्यानुवाद किसान किसान माहिया कीर्तिदा कुंभ कुञ्ज गली कुरआन कृष्ण कुमार "बेदिल" कृष्ण कुमार 'बेदिल' कृष्णमोहन छंद कोरोना कौन क्यूं न हुआ क्रमिक विकास क्षणिका खुरचहा पति खुशबू खुशियों की थिरकन खुशी खेल-व्यवसाय खेळ खौफ गंगटोक सवैया गंगा दोहा गंगोदक सवैया गणतंत्र गणतंत्र दोहे गणितीय मुक्तक गरिमा सक्सेना गरीबी ग़ज़ल अंदाज़े-बयाँ गाँव की गोरी गांव की समस्या; लेख;शिव गाय की रोटी गाली गीत चिरैया गीत - सियाहरण गीत : नया साल गीत अम्बर का छोर गीत काम तमाम तमाम का गीत कौन हैं हम? 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नवगीत गोल क्यों? नवगीत घोंसले में नवगीत छोडो हाहाकार मियाँ! नवगीत जगो सूर्य आता है नवगीत त्रिपदिक नवगीत दर्पण का दिल नवगीत दिवाली नवगीत नव वर्ष नवगीत नागफनी उग आयी नवगीत निर्माणों के गीत नवगीत पहले गुना नवगीत भटक न जाए नवगीत भीड़ में नवगीत मिली दिहाडी नवगीत में नए रुझान नवगीत राम बचाए नवगीत रार ठानते नवगीत लोकतंत्र का पंछी नवगीत वह खासों में खास है नवगीत शिव नवगीत संक्रांति काल है नवगीत संग्रह नवगीत सत्याग्रह के नाम पर नवगीत समय वृक्ष नवगीत समीक्षा नवगीत सड़क पर नवगीत सड़क पर... नवगीत: उगना नित नवगीत: उड़ चल हंसा नवगीत: दीन प्रदर्शन नवगीत: नाम बड़े हैं नवगीत: भाग्य कुंडली नवगीत: लोकतंत्र का पंछी बेबस नवगीत: कुण्डी खटकी नवगीत: छोडो हाहाकार मियाँ! नवगीत: बजा बाँसुरी नवगीत: भारत आ रै नवगीत: रब की मर्ज़ी नवभारत टाईम्स नशा नाक की सर्जरी नाग नाभिक ऊर्जा नारि नारी मुक्ति नारी-भाव नाश प्रकृति का निर्निमेष निर्विकार निष्काम कर्म निष्ठुरता नीति व्यवहार नीति-नियम नीति-व्यवहार नीलकंठ नेकियां नेह नर्मदा तीर पर नेह-नाता नैतिकता नैन-डोर नैना नौ कन्या न्यू-ईयर गिफ्ट नज़र नज़ारा पंचौदन अजः पद चिन्ह पद-चिन्ह पद्मिनी परब्रह्म परम-पिता परमाणु परमानंद परमार्थ परलोक परहित पराग पराया-धन पल- छिन पशु पहलू पाँच पर्व पायल पिचकारी पीयूषवर्ष छंद पीर पुरुषार्थ पुरोवाक : यह बगुला मन पुरोवाक ओस की बूँद पुरोवाक केरल एक झाँकी पुरोवाक बुधिया लेता टोह पुरोवाक् पुलिस पूजा पूर्ण-ब्रह्म पूर्णकाम पृथ्वी पैरोडी पोखर ठोके दावा प्यार प्रकृति प्रकृति दोहन प्रकृति बादल प्रजापति प्रणम्य शहीद प्रणय प्रणय -दीप प्रणय के पल प्रतिकण प्रतियोगिता प्रत्रकार प्रदूषण प्रभाव प्रभु प्रभु ज्ञान प्रश्न मन के प्राण शर्मा प्रातस्मरण स्तोत्र प्रिय प्रवास प्रीति के रंग प्रीति-चलन प्रेम के छःलक्षण प्रेम प्याला प्रेम ममता फरवरी कब क्या? 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आप सभी को हर्ष और बधाई के साथ यह सूचना देना चाहता हूँ कि LBA अपनी सफलता के उस मुक़ाम तक आ चुका है कि इसकी सदस्यता संख्या अपने चरण तक पहुँच चुकी है और जो ब्लॉगर्स बन्धु इससे जुड़ने की इच्छा रख रहे हैं और जिनके मेल मुझे मिल रहे हैं उसको मद्देनज़र रखते हुए नयी सदस्यता के इच्छुक ब्लॉगर्स को एक और भी शक्तिशाली और नया मंच का गठन आज किया जा रहा है जिसका नाम है 'ऑल इंडिया ब्लॉगर्स असोसिएशन' अर्थात AIBA ! इस मंच का हिस्सा सभी भारतीय बन सकते है, फ़िर चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में रह रहें हों !!!
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