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शुक्रवार, मार्च 02, 2012
देखूं क्या बचा अब हुस्न यार में

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दर्द उसने दिया मुझे फ़स्ल-ए-बहार में
चैन उसने ले लिया मेरे एक क़रार* में

मेरे दम से अब तो ये क़ायनात है
शब्-ओ-माहताब हैं अख्तियार में

जुदाई का मज़ा भी क्या अजीब है
ऐसा मज़ा कहाँ विसाल-ए-यार* में

आओ एक बार और आ जाओ
देखूं क्या बचा अब हुस्न यार में

जीस्त* की स्याह मेरी दास्तान में 
कुछ नहीं बचा दिल-ए-दाग़दार में

कैसे गया उलझ 'सलीम' प्यार में
मेरे हाथ काँटों में, पाँव अँगार में

(क़रार= एग्रीमेंट, विसाल= मिलन, जीस्त= ज़िन्दगी)
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गुरुवार, फ़रवरी 09, 2012
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वक़्त बेपरवाह है
वक़्त के साथ चलो

कोई क़िस्सा न बनो
खुद में हालात बनो
वक़्त के साथ चलो.

बज़्म में शोर नहीं
दिल पे कोई ज़ोर नहीं
अपना कोई ठौर नहीं
वक़्त के साथ चलो.

नक़ाब-दर-नक़ाब है वो
फ़िर भी एक ख़्वाब है वो
जाने कैसा जनाब है वो
वक़्त के साथ चलो.

इक ज़रा हाथ बढ़ा
दो क़दम साथ बढ़ा
जज़्बे हँसी में न उड़ा
वक़्त के साथ चलो.

आईना टूट गया
साथ जो छूट गया
मुझसे वो रूठ गया
वक़्त के साथ चलो.

हाथ में है सिर्फ़ लकीरें
पढ़ी न गई अपनी ताबीरें
तन्हाईयाँ दिल को चीरें
वक़्त के साथ चलो.

जिसपे भरोसा है किया
क़त्ल उसने ही किया
पूछे वो ये किसने किया
वक़्त के साथ चलो.

मेरा कौन मुकाम
मेरा कौन मुकीम
तुझे पाने की मुहीम
मैं एक अदना सा 'सलीम'
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सोमवार, अप्रैल 11, 2011
भ्रष्टाचार रुपी ज़हरीली मलाई के दलदल में हम इस क़दर फंसे हैं कि इससे उबरना अब मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा हो गया है.

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रविवार, फ़रवरी 20, 2011
LBA के सम्मानित सदस्यों से अपील व गुफ़्तगू

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हालाँकि माननीया अध्यक्षा महोदया श्रीमती रेखा श्रीवास्तव जी ने जो निति-नियम हम सबको बताये वह अपने आप में काफ़ी में और उस पर अमल में लाकर हम यक़ीनन एक अच्छे वातावरण का ब्लॉग-परिवार कहला सकते हैं. पिछले कुछ दिनों में जो कुछ उठा-पाठक हुई उसमें मेरी चुप्पी का मकसद बस इतना था कि वक़्त सब कुछ ठीक कर देता है. हमारे पदाधिकारी-गणों ने जो एक जुटता दिखाई वह भी कुछ पूर्वाग्रही लोगों के मंसूबों पर पूरी तरह से सुनामी फ़ेर चुका है. और सबसे बड़ी बात मैंने इसमें सिर्फ ईश्वर का सहारा लिया जिसने मुझे संयम बरतने की ताक़त दी.

बहुत पहले जब मैंने LBA बनाया तो यक़ीन मानिये मेरे ज़ेहन में सिर्फ़ एक ही मकसद था और वह था::: उत्तर प्रदेश के ब्लॉगर्स की ताक़त को पूरे भारत में दर्शाना !. LBA के बाद AIBA का गठन भी कुछ इस तरह से हुआ है. कुछ लोग जो उस वक़्त LBA को सिर्फ़ इस्तेमाल करना चाहते थे उनका क्या हश्र हुआ सब जानते हैं. आने वाले वक्तों में भी अगर उन्होंने LBA अथवा मेरे प्रति अपने पूर्वाग्रही सोच को न बदला तो मेरे पास सिर्फ़ एक ही हथियार है और वह है ईश्वर से दुआ करना.

ब्लॉग जगत में सभी ब्लॉगर्स समान है
एक ब्लॉगर एक नहीं, सैकड़ों ब्लॉग बना सकता है, इसके लिए न तो कोई नियम हैं और न ही रोक. पिछले दिनों कई एसोशियेशन बन कर आये जिसके एक ही नाम थे. ऐसा करके हम अपनी शक्ति को बाँट देते हैं. अगर हम परिवार में है तो उसका लिहाज़ भी करें. हालाँकि ब्लॉग जगत में कुछ ऐसे तत्व हैं जो तोड़फोड़ की राजनीती में व्यस्त रहते हैं मगर कोई क़दम उठाने से से पहले हमें यह सोचना चाहिए कि जिस भी ब्लॉग पर हम जवान हुए और पहचान मिली उसके प्रति ईमानदार रहें. गलतियाँ किससे नहीं होती है, मुझसे भी हुई हैं!

हमारीवाणी की निष्पक्ष छवि
ब्लॉगवाणी और चिट्ठाजगत बहुत ही उम्दा ब्लॉग-संकलक थे. मगर उसका इस्तेमाल कुछ ख़ास ब्लॉगर करते थे. दोनों ही संकलकों ने ऐसे नियम बना रखे थे जिसके चलते नए ब्लॉगर्स अथवा असल प्रतिभावान ब्लॉगर को अवसर नहीं मिल पाता था. ऐसा नहीं था कि उनका ब्लॉग चलता नहीं था अथवा उनके ब्लॉग पर पाठक जाते नहीं थे बल्कि होता ये था कि ब्लॉग-जगत में माफ़ियागिरी ख़ूब चल रही थी. कुछ ब्लॉग संकलकों ने शीर्ष 40 ब्लॉगरों  की लिस्ट को बक़ायदे मेंटेन कर रखा था अथवा कुछ ने मनमाने तरीके से चन्द ब्लॉगरों की पोस्ट को तरजीह दे रहे थे. इस नज़रिए से हमारीवाणी एक निष्पक्ष ब्लॉग-संकलक है.

औसतन सक्रिय रहें:
LBA के सदस्यों में कुछ ऐसे भी है जो बिलकुल ही निष्किय हैं, उन्हें चाहिए की वे पूरी तरह से न सही कम से कम औसतन सक्रिय रहा करें. अगर ऐसा न हो सकेगा तो उनकी निष्क्रियता को जगाने के लिए अध्यक्षा महोदया जी की तरफ़ से मेल जायेगी और तीन मेल के बाद उनकी सदस्यता निष्क्रिय कर जायेगी.

-बातें अभी बहुत हैं,  गुफ़्तगू जारी रहेगी.
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शुक्रवार, फ़रवरी 18, 2011
यमराज प्रवृत्ति न अपनाएं हिंदी ब्लॉगर, पूर्वाग्रह से बचें::: लखनऊ ब्लॉगर एसोसियेशन

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सलीम ख़ान
संस्थापक एवं संयोजक
लखनऊ ब्लॉगर एसोसियेशन 
एक बार किसी बात से यमराज जी सरदार जी से किसी बात पर चिढ गए थे. चित्रगुप्त ने उनसे पूछा कि आखिर वजह क्या है कि आप सरदार जी से इतने चिढ़े हुए हैं? उन्होंने कहा- क्यूंकि सरदार पॉकेट में रोकेट रखता है और वो भी दोनों तरफ़! और तुम देखना चित्रगुप्त जब सरदार मर कर आएगा तो मैं इसे नरक में ही डालूँगा.


फिर वह वक़्त भी आया कि जब सरदार जी के जीवन की लीला समाप्त हुई और वह यमराज के समक्ष उपस्थित हुए और अपने फैसले का इंतज़ार करने लगे. उसी वक़्त २ अन्य लोगों (एक पंडित जी और एक मुल्ला जी) का भी देहावसान हुआ था और वह भी अपने फ़ैसले के इंतज़ार में खड़े थे. लेकिन यमराज जी तो बस सरदार जी को ही नाहरे जा रहे थे और सोच रहे थे कि कैसे उसे नरक का भोगी बनाऊं. 

"आप लोगों से सवाल तलब किये जायेंगे और जो जवाब सही दे देगा वह जन्नत में जायेगा और जिसने ग़लत जवाब दिया तो उसे दोज़ख मिलेगी." यमराज गरजे.

उसके बाद वाईवा शुरू हुआ. 


"पंडित जी आप २ का पहाड़ा सुनाईये?" यमराज जी का सवाल पंडित जी के लिए.

पंडित जी ने एक ही सांस में २ का पहाड़ा सुना दिया. फलस्वरूप उन्हें जन्नत का सर्टिफिकेट मिल गया.


"मुल्ला जी आप ३ का पहाड़ा सुनाईये? यमराज जी का सवाल मुल्ला जी के लिए. 

मुल्ला जी ने भी एक ही सांस में ३ का पहाड़ा सरपट सुना दिया. फलस्वरूप उन्हें भी जन्नत का सर्टिफिकेट मिल गया.


"हाँ! तो सरदार जी आप १९ (उन्नीस) का पहाड़ा सुनाईये?" यमराज जी का सवाल सरदार जी के लिए था...

बेचारे सरदार जी को उन्नीस का पहाड़ा आता ही नहीं था और वह सवाल जवाब के सेशन में फेल हो चुके थे. फलस्वरूप उन्हें नरक का सर्टिफिकेट मिला.

सरदारजी को लगा कि उनसे कुछ ज्यादा ही कठिन सवाल पूछ लिया गया है. उन्होंने कहा - "हे महाराज! मुझे लगता है कि मेरे साथ ज्यातदी की गयी है. मुझसे सवाल अन्य लोगों की अपेक्षा अधिक कठिन सवाल पूछा गया है."

ठीक है, हम दोबारा से पूछते हैं.

"पंडित जी आप बताईये कि आपके एक हाँथ में कितनी उंगलिया हैं?" 

"जी, पांच" पंडित जी ने चिहुँकते हुए जवाब दिया.

"मुल्ला जी आप बताईये कि आपके एक पैर में कितनी उंगलिया हैं?"

जी, पांच" मुल्ला जी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया. 

"हाँ! तो सरदार जी आप बताईये कि आपके सिर में कितने बाल हैं?"

यहाँ पर फ़िर सरदार जी जवाब नहीं दे पाए और उन्हें एक बार फ़िर दोज़ख का सर्टिफिकेट मिल गया. 

लेकिन अबकी बार भी सरदार जी ने विरोध किया तो यमराज जी ने तीसरा और आखिरी मौक़ा देते हुए सवाल दगा.

"पंडित जी, कैट की स्पेलिंग बताईये?"

"सी ए टी"

"मुल्ला जी, डॉग की स्पेलिंग बताएं?" 

"डी ओ जी"

"हाँ! तो सरदार जी, आप चिकोस्लोवाकिया की स्पेलिंग बताएं?" 

"!!!!!!!!"

इस तरह से प्री-ज्यूडिस मामले में पंडित जी और मुल्ला जी को जन्नत और सरदार जी को अंततः दोज़ख ही मिली.

चलते चलते:: 
मेरा सभी ब्लॉगर से अनुरोध है कि किसी पूर्वाग्रह के चलते आप किसी भी ब्लॉगर का विरोध न करे बल्कि उसकी बातों को चिंतन और मनन के उपरान्त और सत्य की कसौटी पर उतार कर उसके बारे में फैसला लें.
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गुरुवार, फ़रवरी 10, 2011
रेखा श्रीवास्तव जी नियुक्त हुईं LBA की नयी अध्यक्षा, आईये तहे-दिल से आपका स्वागत करें.

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यह घोषणा करते हुए बहुत ही हर्ष का अनुभव हो रहा है कि LBA की नयी अध्यक्षा  रेखा श्रीवास्तव जी को नियुक्त किया गया है.
इससे पहले कि कुछ आगे कहूँ, आपको रेखा जी बारे में उन्हीं की ज़ुबानी कुछ बताना चाहता हूँ.
"मैं आई आई टी , कानपूर में मशीन अनुवाद प्रोजेक्ट में कार्य कर रही हूँ. इस दिशा में हिंदी के लिए किये जा रहे प्रयासों से वर्षों से जुड़ी हूँ. लेखन मेरा सबसे प्रिय और पुरानी आदत है. आदर्श और सिद्धांत मुझे सबसे मूल्यवान लगते हैं , इनके साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता है. गलत को सही दिशा का भान कराना मेरी मजबूरी है , वह बात और है कि मानने वाला उसको माने या न माने. सच को लिखने में कलम संकोच नहीं करती."

परिवर्तन प्रकृति का नियम है
कहते हैं कि इस दुनियाँ की हर चीज़ बदलती रहती है. हालात बदलते रहते हैं और हालात को सँभालने वाले इंसान भी बदलते रहते हैं इसीलिए LBA की पारीवारिक हालात सँभालने के लिए प्रेसिडेंट पद के लिए नियुक्त किया गया है- रेखा श्रीवास्तव को ! रेखा श्रीवास्तव जी एक पुख्ता सोच और संतुलित व्यवहार की मालिक हैं, वहीँ वह हिन्दी के लिए पूर्ण रूप से समर्पित भी हैं. वह ब्लॉग-जगत में ही नहीं बल्कि बाहर भी एक प्रतिष्ठित साहित्यकार के नाम से जानी जाती हैं. उनका नाम ब्लॉग जगत में भी किसी परिचय का मोहताज नहीं है, एक लम्बे अरसे से वे ब्लॉग जगत में सक्रिय हैं और ऊँचा मुकाम रखती हैं. LBA के कार्यकारिणी के पदाधिकारीगण और सदस्यों से अनुरोध है कि वे अपने नए प्रेसिडेंट का स्वागत तहेदिल और जोश-ओ-ख़रोश से करें.

इसी के साथ मैं यह भी ध्यान दिलाना चाहता हूँ कि पिछले काफ़ी समय से चन्द ब्लॉगर्स (LBA सदस्य) को छोड़ के काफ़ी ब्लॉगर्स ऐसे भी हैं जो LBA पर अपनी पोस्ट नहीं डाल रहे हैं, उनसे अनुरोध है कि वे अपने निजी ब्लॉग के साथ-साथ LBA पर भी अपनी पोस्ट डालें. आजकल बहुत से मुद्दे ऐसे हैं जिन पर जागरूकता की आवश्यकता है. LBA का मंच आज सशक्त है और उनका विचार उनके निजी ब्लॉग कि अपेक्षा और ज़्यादा यहाँ LBA पर प्रचार पा सकता है. हिन्दी और हिन्दी भाषी हित के लिए समर्पित इस ब्लॉग पर पूरा योगदान दें!

ध्यान देने योग्य कुछ और बातें
मार्गदर्शन निति नियम के अभाव में विगत कुछ दिनों से जो हालात पैदा हुए वे फ़िर न पैदा हों इसके लिए जल्द ही निति-निर्देश को अंतिम रूप दे कर लागू कर दिए जायेंगे. इस सन्दर्भ में नयी अध्यक्षा सहित LBA के सभी ख़ास-ओ-आम सदस्यों से अपील है कि वे अपना अमूल्य सुझाव दें. हाँ, कुछ बातें अभी से लागू की जा रही हैं जो नीति निर्देश का हिस्सा अवश्य ही होंगी कि किसी भी जायज़ सवाल को सभ्य तरीक़े से पूछना का हक़ सबको है, यहाँ तक कि वह LBA का सदस्य हो अथवा नहीं लेकिन इतना ध्यान अवश्य ही रखना होगा कि संयोजक और अध्यक्षा की पोस्ट के जवाब में पुनः पोस्ट न डाली जाए बल्कि उनकी उसी पोस्ट में टिपण्णी करके अपने विचार प्रस्तुत किये जाएँ.

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उपाध्यक्ष जनाब एस. एम. मासूम जी को नियुक्त किया गया है. वे एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर हैं और वर्तमान में 'देश की मर्यादा' नामक मैगजीन के ब्यूरो चीफ़ हैं. वे मूल रूप से जौनपुर, उत्तर प्रदेश से वाबस्ता है. उनका पुख्ता तरीक़े से यह मानना है कि ब्लॉगर्स की आवाज़ बड़ी दूर तक जाती है इसलिए ब्लॉगर्स इसका सही इस्तेमाल करें. क़लम का इस्तेमाल इंसानियत के हित में करें. अमन का पैगाम नामक ब्लॉग इनका काफ़ी चर्चा में रहता है. रेखा श्रीवास्तव जी और जनाब एस.एम. मासूम दोनों ही विश्व के सबसे बड़े सामुदायिक ग़ैर-मुनाफ़ा ब्लॉग ऑल इंडिया ब्लॉगर्स एसोसियेशन के सदस्य भी है.

पुनश्च रेखा श्रीवास्तव जी को अध्यक्षा और जनाब एस.एम. मासूम को उपाध्यक्ष बनाये जाने पर बहुत-बहुत बधाई.
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बुधवार, फ़रवरी 09, 2011
वो आसमान से मौत बनके बरसेगी: Saleem Khan

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लोककथाओं में ही नहीं अनेक किवदंतियों में भी आसमान से ईश्वर का क़हर बरसने के किस्से प्राचीन काल से चले आ रहे हैं। हालाँकि इन कथाओं को हमेशा शक की निगाह से देखा जाता रहा है, लेकिन आज के घोर वैज्ञानिक युग में भी कुछ ऐसे हालात बन रहे हैं, कि लोक कथाओं के वह किस्से हमें सच होने जैसे लग रहे हैं। बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण के कारण हमारे वायुमण्डल में 'अम्ल वर्षा' की संभावनाएं प्रबल होती जा रही हैं। यह अम्ल वर्षा किन्हीं मामलों में ईश्वरीय कहर से कम नहीं। यह क्या है और इसके पीछे क्या कारण हैं?

'अम्ल वर्षा' को अंग्रेज़ी में 'acid rain' कहते हैं. जैसा कि नाम से ही लग रहा है कि यह किसी प्रकार की वर्षा है जो अम्लीय होगी. गाड़ी, औद्योगिक उत्पादन आदि के प्रक्रिया के उपरान्त निकली ज़हरीली गैसें (सल्फर-डाई- ओक्साईड और नाइत्रोज़न ओक्साईड) जो कि ऊपर बारिश के पानी से मिल कर अम्लीय अवस्था में आ जाती हैं. वह वर्षा जिसके पानी में यह गैस मिल जाती है अम्ल वर्षा कहलाती है.

ज़हरीली गैसों के अम्लीय अवस्था तक का ख़तरनाक सफ़र
(ज़हरीली गैस + जल = अम्ल)
इसका वैज्ञानिक सूत्र इस प्रकार है:- 
SO2 + H2O = H2SO4 (Sulfuric Acid)
NOx + H2O = HNOx (Nitric Acid)

निम्न चित्र के माध्यम से हम अम्ल वर्षा को समझ सकते हैं.

अम्ल वर्षा हमारे लिए पर्यावरण सम्बन्धी मौजूदा समस्याओं में से एक सबसे बड़ी समस्या है. यह अदृश्य गैसों से निर्मित होती है जो कि आम तौर पर ऑटोमोबाइल या कोयला या जल विद्धुत संयंत्रों के कारण वातावरण में बनतीं है. यह अत्यंत विनाशकारी होती है.

वैज्ञानिकों ने इसके बारे में सबसे पहले सन 1852 में जाना. एक अँगरेज़ वैज्ञानिक रॉबर्ट एग्नस(Robert Agnus) ने अम्ल वर्षा के बारे सबसे पहले इसे परिभाषित किया और इसके कारण और विशेषताओं की व्याख्या की. तब से अब तक, अम्ल वर्षा के वैज्ञानिकों और वैश्विक नीति-निर्माताओं के बीच तीव्र बहस का एक मुद्दा रहा है.

अम्ल वर्षा अति-प्रदूषित इलाक़े में बड़ी दूर तक बड़ी आसानी से फैलती है. यही वजह है कि यह एक वैश्विक प्रदूषण समस्या है. जिसके लिए विभिन्न देश एक दुसरे पर तोहमत लगाते हैं. जबकि कोई भी इसके प्रति उतना गंभीर नहीं है जितनी तेज़ी से यह समस्या बढ़ रही है. पिछले कुछ सालों में विज्ञान ने अम्ल वर्षा के मूलभूत कारणों को जानने की कोशिश कि तो कुछ वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला है कि मानवीय उत्पादन मुख्य रूप से जिम्मेदार है तो वही कुछ वैज्ञानिकों ने इस समस्या का ज़िम्मेदार प्राकृतिक कारणों को माना. वस्तुतः सभी देशों को अम्ल वर्षा के कारणों और उसके दुष्प्रभावों के प्रति सजग रहना होगा.
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मंगलवार, फ़रवरी 08, 2011
हमें ब्लॉगिंग के क्षेत्र में महिला ब्लॉगर्स को आगे बढ़ाने की कोशिश ज़रूर करनी चाहिए The chairperson

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हमने एलबीए से इस्तीफ़े का ऐलान सुना तो श्री रवीन्द्र प्रभात जी दरख्वास्त की थी कि वे अपने फ़ैसले पर दोबारा ठंडे दिल से ग़ौर करें लेकिन उनकी तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया अभी तक नहीं मिली है जबकि वे बदस्तूर नेट पर सक्रियता दिखा रहे हैं। इससे अंदाज़ा होता है कि वे वास्तव में ही स्वयं को एलबीए के अध्यक्ष पद से मुक्त कर चुके हैं। अतः अध्यक्ष पद ख़ाली है जिसे कि ज़्यादा देर तक ख़ाली नहीं रहना चाहिए। इस पद पर जल्दी ही किसी कि तक़र्रूरी होनी चाहिए ताकि व्यवस्था बनी रहे और एलबीए हिन्दी की सेवा बदस्तूर कर सके।
कुछ समय पहले एक ख़बर सुनने में आई थी कि महिला वैज्ञानिक पिछड़ रही हैं। हम वैज्ञानिक नहीं हैं इसलिए हम उनके लिए कुछ नहीं कर सकते लेकिन हमें ब्लॉगिंग के क्षेत्र में महिला ब्लॉगर्स को आगे बढ़ाने की कोशिश ज़रूर करनी चाहिए। जहां भी कोई कम्यूनिटी ब्लॉग नज़र आता है, उसमें अध्यक्ष पद पर एक मर्द ही विराजमान नज़र आता है।
यह क्या नाइंसाफ़ी है ?
एलबीए की कुर्सी ए सदारत अब किसी औरत के हवाले की जानी चाहिए। 
एक ऐसी औरत जिसकी सोच और तजर्बा दोनों पुख्ता हों। जो शिक्षित और आधुनिक तो हो लेकिन पश्चिम के रंग में न रंगी हो। जिसका लिबास देखकर भारतीय संस्कृति का परिचय मिले। ऐसी बहुत सी महिला ब्लॉगर्स एलबीए में शामिल हैं। उनमें से जो भी हिन्दी के लिए समर्पित हो, उसे अब कुर्सी ए सदारत पर बिठाया जाए। एक मां अपने हर तरह के बच्चों को निभा लेती है और कभी घर छोड़कर भी नहीं भागती जबकि बाप अक्सर भागते देखे गए हैं।
औरत का सबसे क़ाबिले ताज़ीम रूप उसका मां का रूप है। मेरे ब्लॉग प्यारी मां में बहुत सी विद्वान महिलाओं ने शामिल होकर यह भी साबित कर दिया है कि वे मर्दों की तरह गुटबाज़ नहीं होतीं और न ही उनके दिलों में मर्दों की तरह संकीर्णता और खुदग़र्ज़ी ही होती है। जो वास्तव में नारी के मूल तत्व से सुशोभित हैं, ऐसी किसी एक भी महिला से मुझ सहित किसी ब्लागर और ग़ैर-ब्लागर को इस पूरी ज़मीन पर अतीत और वर्तमान में आज तक कोई शिकायत पेश नहीं आई है और न ही भविष्य में ही कभी पेश आने वाली है। ऐसी ही कोई विदुषी महिला इस पद के लिए सर्वथा उपयुक्त है और ऐसी ही किसी महिला को आल इंडिया ब्लॉगर्स एसोसिएशन का भी सर्द मुक़र्रर किया जाए।
ऐसा मेरा विचार है। अगर किसी के पास इससे अच्छा कोई और विचार हो तो उसे पेश किया जाए ताकि एलबीए और हिन्दी की बेहतरी के लिए कोई बेहतर फ़ैसला जल्दी किया जा सके।
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सोमवार, फ़रवरी 07, 2011
हमारी Association का नया अध्यक्ष कैसा हो ?

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मैंने श्री रविन्द्र प्रभात जी द्वारा अध्यक्ष पद से इस्तीफे के बाद उनसे पुनर्विचार की विनती की थी लेकिन उनके द्वारा कोई प्रतिक्रया ज़ाहिर न करना बताता है कि Lba का अध्यक्ष पद अब सचमुच ख़ाली हो चुका है जिसे कि ज़्यादा देर तक ख़ाली नहीं रखा जा सकता .
हमारा नया अध्यक्ष कैसा हो ?,
अब इस पर विचार किया जाना चाहिए .
इस सम्बन्ध में हमें गुणों को प्रमुखता देनी चाहिए .
वे क्या गुण हों इस पर हम सभी को सोचना होगा .
इस विषय पर जल्दी ही मैं एक पोस्ट लिखूंगा और आप उस पर अपनी राय दीजियेगा .
धन्यवाद .
जो जहां सुख महसूस करे , मालिक उसे वहां सुखी रखे .
ऐसी हम कामना करते हैं हरेक के लिए .
 तब तक आप हमारे ब्लॉग 'प्यारी माँ' की यह भावपूर्ण कहानी पढ़ें और इसके पहले और इसके बाद की पोस्ट्स भी देखें.
http://pyarimaan.blogspot.com/2011/01/blog-post_18.html


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शनिवार, फ़रवरी 05, 2011
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आदरणीया डिंपल माहेश्वरी जी ! यदि आप 'प्यारी मां' ब्लॉग के लेखिका मंडल की सम्मानित सदस्य बनना चाहती हैं तो
कृपया अपनी ईमेल आई डी भेज दीजिये और फिर आपको निमंत्रण भेजा जाएगा । जिसे स्वीकार करने के बाद आप इस ब्लाग के लिए लिखना शुरू
कर सकती हैं.
यह एक अभियान है मां के गौरव की रक्षा का .
मां बचाओ , मानवता बचाओ .

http://pyarimaan.blogspot.com/2011/02/blog-post_03.html


यह कमेंट आप देख सकते हैं इस बेहतरीन पोस्ट पर -
Dil Ki Zubani: कहानी एक औरत की..
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गुरुवार, फ़रवरी 03, 2011
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ब्लॉगर्स बन्धुवों !
आप सभी को हर्ष और बधाई के साथ यह सूचना देना चाहता हूँ कि LBA अपनी सफलता के उस मुक़ाम तक आ चुका है कि इसकी सदस्यता संख्या अपने चरण तक पहुँच चुकी है और जो ब्लॉगर्स बन्धु इससे जुड़ने की इच्छा रख रहे हैं और जिनके मेल मुझे मिल रहे हैं उसको मद्देनज़र रखते हुए नयी सदस्यता के इच्छुक ब्लॉगर्स को एक और भी शक्तिशाली और नया मंच का गठन आज किया जा रहा है जिसका नाम है 'इंडियन ब्लॉगर्स असोसिएशन' अर्थात IBA ! इस मंच का हिस्सा सभी भारतीय बन सकते है, फ़िर चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में रह रहें हों !!!

सभी ब्लॉगर्स से निवेदन है कि वे इस मंच के सदस्य बनकर देश, समाज और मानवता के हित में अपना योगदान दें. इच्छुक ब्लॉगर्स टिपण्णी में अपना ईमेल एड्रेस दर्ज करा कर सदस्य बन सकते हैं.

शीघ्र ही इसकी देखरेख के लिए आवश्यक पदों की निर्माण-प्रक्रिया पूर्ण की जायेगी. ब्लॉग पर पहुँचने के लिए यहाँ क्लिक करें.

स्नेह का आकांक्षी
-सलीम ख़ान
+91 9838659380
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एल. बी. ए. से जुड़े समस्त स्नेही साथियों,

आज यह पोस्ट डालते हुए अपार पीड़ा का अनुभव हो रहा है कि विगत कई दिनों से लगातार एल बी ए में उठापठक की स्थिति बनी हुई है, पोस्ट के विरुद्ध पोस्ट और व्यक्तिगत आक्षेप को सर्वाधिक महत्व दिया जा रहा है ! चूँकि यह प्रबुद्ध वर्गों का मंच है, इसलिए सदाचार के अतिक्रमण से मन क्षुब्ध हो जाता है, ऐसे में मैं अपने को इसके नाकाबिल महसूस कर रहा हूँ !

अत: मैं आज एल. बी. ए. के अध्यक्ष पद से स्वयं को मुक्त करते हुए त्याग पत्र देता हूँ और आप सबसे वादा करता हूँ कि एक प्राथमिक सदस्य की हैसियत से आपके हर कार्यों में सहयोग करता रहूँगा !

एक अभिभावक की हैसियत से जब भी मुझे आप याद करेंगे, आप हमेशा मुझे अपने साथ पायेंगे !

आप सभी का आभार जो मुझे अध्यक्ष की हैसियत से इतना सम्मान दिया !

रवीन्द्र प्रभात
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बुधवार, फ़रवरी 02, 2011
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जी  हाँ ! एक और ई-पत्रिका दे गयी है दस्तक हमारे द्वार पर, आईये स्वागत करें ...... 

नयी दिल्ली !जी हाँ अंतरजाल पर तेजी से ई पत्रिकाओं का प्रकाशन प्रारंभ हो रहा है , उद्देश्य है हिंदी का व्यापक और विस्तृत प्रसार ! इसी कड़ी में इस वर्ष  से शुरू हुई है एक और वेब पत्रिका नाम है : हमारी वाणी, जिसका शुभारंभ विगत ०१ फरवरी को को हुआ है ! इस पत्रिका के मुख्य संपादक हैं डा. दिनेश राय द्विवेदी, जो 1978 से वकालत कर्म से जुड़े हैं , साहित्य, कानून, समाज, पठन,सामाजिक संगठन लेखन, साहित्यिक सांस्कृतिक गतिविधियों में इनकी गहरी रूचि है । समन्वय संपादक हैं एस. एम. मासूम,जो  सना न्यूज़ मुंबई में ब्यूरो चीफ हैं !समाचार संपादक हैं अजय कुमार झा,जो कडकडूमा न्यायालय में पदस्थापित है…!साहित्यिक सम्पादक  हैं अविनाश वाचस्पति, जो सामूहिक वेबसाइट नुक्‍कड़ के मॉडरेटर हैं, इसके अतिरिक्‍त उनके ब्‍लॉग पिताजी, बगीची, झकाझक टाइम्‍स, तेताला इंटरनेट जगत में अपनी विशिष्‍ट पहचान रखते हैं। भारतीय जन संचार संस्थान से ‘संचार परिचय’, तथा ‘हिंदी पत्रकारिता पाठ्यक्रम’ में प्रशिक्षण लिया है। व्यंग्य,कविता एवं फ़िल्म लेखन उनकी प्रमुख उपलब्धियाँ हैं।

सलाहकार संपादक हैं रवीन्द्र  प्रभात,जो विगत दो-ढाई दशक से साहित्य और पत्रकारिता से जुड़े हैं !मार्गदर्शक हैं खुशदीप सहगल,जो विगत 16साल से कलम-कंप्यूटर तोड़ रहे  है और तकनीकी संपादक हैं शाहनवाज़ सिद्दीकी,जो  दैनिक हरी भूमि के लिए नियमित लेखन के साथ-साथ अनेकों पत्र-पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन से जुड़े हैं ।

हमारीवाणी हिंदी भाषा के प्रचार एवं प्रसार के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए प्रिंट एवं ऑनलाइन पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम बढ़ा रहा है.  इस प्रयास का ध्येय भी उभरते हुए हिंदी लेखकों के लेखन को सामने लाना ही है.

'हमारीवाणी' ई-पत्रिका  के शुभारम्भ पर प्रकाशित होने वाले लेख हैं:

हमारीवाणी ई-पत्रिका को आप इस पते http://news.hamarivani.com/ पर देख पाएँगे. इसके लिए आप सभी सुधी लेखकों से निम्नलिखित विषयों पर लेख आमंत्रित हैं.
* समाज
* ब्लॉग-राग
* देश-दुनिया
* राजनीति
* साहित्य
* विचार-मंच
* मनोरंजन
* खेल-खिलाड़ी
हर एक लेख 500 से 1000 शब्दों के बीच ही होने चाहिए, तथा प्रेषक के द्वारा स्वत: लिखित होना चाहिए (हर एक लेख / रचना को इस घोषणा के साथ ही हमें प्रेषित करें कि लेख आपका अपना लिखा हुआ है). आप अपना लेख / रचना संपादक को news@hamarivani.com पर भेज सकते हैं. ...!
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उसमें वह खुद ही गिरता है । इसलिए सदाचारी महात्माओं ने ऐसा करने से मना किया है । हर काल में , हर देश में और हरेक भाषा के साहित्य में आपको यह सिद्धांत लिखा हुआ मिल जाएगा ।
यह कल भी सत्य था और यह आज भी सत्य है ।
उन्हीं महात्माओं ने यह भी कहा है कि सबसे पहले आदमी को यह जानना चाहिए कि
'मैं कौन हूं ?'
वाक़ई यह बहुत ज़रूरी है।
आप किसी भी ऋषि-नबी-वली-संत से आज भी रूहानी मुलाक़ात कर सकते हैं। आप उनसे ख़ुद पूछ सकते हैं कि जो बातें उनके बारे में कही जाती हैं , उनमें से कौन सी बात सच है और कौन सी बात झूठ ?
योगी जिसे चक्र कहते हैं , मुस्लिम सूफ़ी उसे लतीफ़ अर्थात सूक्ष्म होने के कारण लतीफ़ा कहते हैं और बहुत थोड़े अर्से में ही वे अपने मुरीद के तमाम चक्रों को जगा देते हैं। सबसे बड़े लतीफ़े सहस्राधार चक्र को वे लतीफ़ा ए उम्मुद्-दिमाग़ कहते हैं और इसे भी वे अपनी तवज्जो की बरकत से सहज ही जगा देते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि इस काम को सिर्फ़ वही कर सकता है जो कि सचमुच सूफ़ी हो । आजकल बहुत से पाखंडी उनके मेकाप में घूम रहे हैं । उनसे बचने की ज़रूरत है ये लोग ठगों में से हैं।
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रविवार, जनवरी 30, 2011
न आना इस देश बापू

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(शहीद दिवस पर विशेष )

!! न आना इस देश बापू !!

शान्ति का  उपदेशक
सत्य-अहिंसा में आस्था रखना छोड़ दिया है
और  जम्हूरियत
बन गयी है खानदानी वसीयत का पर्चा
सिपहसलार-
कर गया  है सरकारी खजाना
सगे-संवंधियों के नाम......

संसद के केन्द्रीय कक्ष में
व्हिस्की के पैग के साथ
होती रहती  है कभी  राम राज्य तो कभी भ्रष्टाचार पर चर्चा
बापू !
वह स्थान भी सुरक्षित नहीं बचा
जहां बैठकर गा सको -
वैष्णव जन.............पीर पराई जाने रे......!

तुम्हारे समय से काफी आगे निकल चुका है यह देश
इस देश के लिए सत्य-अहिंसा कोई मायने नहीं रखता अब
टूटने लगे हैं मिथक
चटखने लगी है आस्थाएं
और दरकने लगी है-
हमारी बची-खुची तहजीब
इसलिए लौटकर फिर -
न आना इस देश बापू !

() रवीन्द्र प्रभात
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शनिवार, जनवरी 29, 2011
आशियाना मुझे एक मयस्सर न हो सका: ऐ खुदा तुने ये जहाँ किस तरह बनाया है !

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ये कैसा हादसा हमें पेश आया हैं
सिर पे सलीब रोज़ हमने उठाया है

जब चिराग़-ओ-शम्स मयस्सर न हुआ
अपने दिल को रौशनी के लिए जलाया हैं

आशियाना मुझे एक मयस्सर न हो सका
ऐ खुदा तुने ये जहाँ किस तरह बनाया है

मैं क्या करूँगा ज़माने की ख्वाहिशें
जबसे तुने मुझको रोना सिखाया है 
  
तेरे ही बदौलत सही मुझे ये नसीब है
सरे-ज़माना मैंने अब सर कटाया है
  
किस्मत की दास्ताँ कुछ इस तरह हुई
ग़म-ख्वार ने ही 'सलीम' हर ग़म बढाया है
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शुक्रवार, जनवरी 28, 2011
LBA के मार्ग-दर्शक नीति नियम TERMs AND CONDITIONs FOR LBA MEMBERs

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LBA के सदस्य-गण व पाठक-गण को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाओं सहित धन्यवाद कि वे LBA में अपनी निष्ठां बनाये रखे. मैंने जब इस संगठन का निर्माण किया था तो मुझे एक बात का यक़ीन था कि यह ब्लॉग हिन्दी भाषा के विकास, सार्थक सामाजिक सोच को बढ़ावा देगा और अभी तक यह काम हम LBA के माध्यम से ब्लॉग-जगत में सक्रीय होते हुए बख़ूबी निभा रहे है और आशा है कि आगे भी निभाते रहेंगे. 

मैं स्वयं इस ब्लॉग बल्कि पूरे ब्लॉग-जगत में लगभग निष्क्रिय ही था और मुझे पुनः वापिस आने पर मजबूर होना पड़ा अध्यक्ष महोदय जनाब रविन्द्र प्रभात जी की शिकायत पर कि इस परिवार के कुछ सदस्य कुछ ऐसी पोस्ट लिख रहे है जो कुछ मायने में सही नहीं है इसलिए मुझे पुनः आना पड़ा कि आख़िर माजरा क्या है? मैं आप सबका ज़्यादा वक़्त अर्बाद न करते हुए इस पोस्ट के शीर्षक के मद्दे-नज़र अपनी कहना चाहता हूँ कि पिछले कुछ दिनों से कुछ ऐसी पोस्ट कुछ लोग कर रहे हैं जो यक़ीनन परिवार में कुछ दरार डाल रही हो सकती है,  ऐसा कहते हुए मेरे पास फ़ोन आने शुरू हुए तो मुझे ये पोस्ट लिखनी पड़ी. इस पोस्ट के द्वारा मैं माननीय अध्यक्ष जी और पधाधिकारी-गण से ये कहना चाहता हूँ कि अगर वे निम्न बातों का ध्यान दे कभी भी LBA परिवार में किसी भी तरह का न कोई विवाद होगा और न ही कोई परेशानी :::

LBA (लखनऊ ब्लॉगर्स एसोशिएशन) का संविधान, मार्ग-दर्शक नीति नियम का लागू होना
माननीय अध्यक्ष महोदय जनाब रविन्द्र प्रभात जी ने मुझे फ़ोन करके ब्लॉग की उक्त स्थिति से अवगत कराया और अपनी आपत्ति जताई, जहाँ तक मेरा मानना है उनकी आपत्ति कई मुद्दों पर जायज़ है और इसके निदान के लिए मैं यह काम अध्यक्ष महोदय को सौपना चाहता हूँ और कहना चाहता हूँ कि जितनी जल्दी हो सके LBA की मार्ग-दर्शक नियमावली बनायें और उसे सभी सदस्यों को मेल कर दें और साथ ही साथ पोस्ट भी डाल दें. कुछ समय उपरान्त उसे इस ब्लॉग के सबसे ऊपर उस नियमावली को अनुकूलित करके विज़ेट के रूप में लगा दें, इस नियमवाली का प्रभाव समान रूप से सब पर लागू होगा फ़िर चाहे वो संयोजक हों, अध्यक्ष महोदय हों या फ़िर LBA के पदाधिकारी अथवा एक आम सदस्य.

कौन सा परिवार विवादित नहीं है, किस पेड़ में हवा नहीं लगी 
जैसा कि पिछले दिनों जो विवाद हो रहा था उसमें दो सदस्यों डॉ अनवर जमाल साहब और डॉ श्याम सुन्दर जी को हटाने की बात चल रही थी जिसमें मेरी सहमति की अनुमति मांगी गई थी लेकिन मेरा सोचना है कि किसी को निकाल देना किसी समस्या का हल नहीं है. डॉ श्याम सुन्दर जी ने भी स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि वे दोनों लड़ नहीं रहे थे बल्कि सार्थक बहस कर रहे थे. BJP के नेता जसवंत सिंह को जिन्ना की तारीफ़ के बावजूद गले लगा लिया. सभी लेख का गहन अध्यन करने पर पाया कि उक्त दोनों सदस्य के साथ साथ कई और सदस्य जो कि पदाधिकारी भी है, ने उसी पैटर्न पर लेख लखे हैं. इस तरह से हम किस-किस को निकालते रहेंगे. और हम लोग कोई नेता नहीं है किसी को निकाल दें फ़िर वापिस पार्टी में बुला लें...!

डॉ हड़ताल पर जाते है जिसके चलते मरीजों की जान तक चली जातीं हैं
सरकारी अस्पताल के डॉक्टर्स हड़ताल पर जाते हैं और अपने फ़र्ज़ को दर-किनार करते हुए मरीज़ को देखते नहीं न ही उनका इलाज करते हैं और जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारे अपने जायज़ अथवा नाजायज़ मांग को पूरा करवाने के लिए अस्पताल के बाहर इकट्ठे रहते हैं. उनके इस कृत्य से मरीजों की जाने तक चली जाती हैं, फ़िर भी उन्हें नौकरी से निकाला नहीं जाता.

दायरे में रह कर प्रश्न पूछना संवैधानिक अधिकार की श्रेणी में आता है 
जब हम LBA कि नियमावली बना लेंगे तो हम अपने सदस्यों अथवा पाठकों को उनके जायज़ प्रश्न को पूछने का भी मौक़ा देंगे और अगर कोई इस नियम का नाजायज़ फायेदा उठाएगा तो प्रथम दृष्टया उसे नज़र अंदाज़ कर देंगे तदुपरांत उसे चेतावनी देते हुए समझायेंगे यदि फ़िर भी न मानेगा तो एक बैठक बुला कर उस पर निर्णय लिया जायेगा जिसे अध्यक्ष महोदय के द्वारा लागू कर दिया जायेगा. इसी के साथ मैं डॉ अनवर जमाल साहब और डॉ श्याम सुन्दर जी से ये कहना चाहता हूँ कि वे नरमी बरते और ख़ास कर मैं डॉ अनवर जमाल साहब को फ़ोन करके उन्हें नरमी बरतने की सलाह दूंगा.

वर्तमान में LBA पर पाठक और टिपण्णी संख्या में इज़ाफा हुआ है
यह एक अच्छा संकेत है कि LBA पर इन दिनों पाठक और टिपण्णी संख्या में इज़ाफा हुआ है जिसके लिए मैं अध्यक्ष महोदय को बधाई देता हूँ कि उन्होंने LBA पर काफ़ी मेहनत की है और उम्मीद करता हूँ कि वे वैचारिक सुदृढ़ता, हिन्दी भाषा के विकास में योगदान करेंगे और पूर्वाग्रह नियोजित मानसिकता का नाश करेंगे.

नतीजा
LBA की नियमावली लागू होते ही न कोई विवाद होगा और न ही किसी तरह की कोई परेशानी होगी. जैसा कि मैंने पहले ही कहा कि इस नियमवाली का प्रभाव समान रूप से सब पर लागू होगा फ़िर चाहे वो संयोजक हों, अध्यक्ष महोदय हों या फ़िर LBA के पदाधिकारी अथवा एक आम सदस्य. ग़लती की सज़ा पद अथवा पॉवर देख कर न लेते हुए एक समान आचार संहिता के तहत सब बराबर एक ही नज़र से देखे जायेंगे न कि मुग़ले-आज़म की तरह "शहंशाह कि ज़ुबान से निकला हर लफ्ज़ इन्साफ़ होता है'.

इसी आशा के साथ !

आप सबका
सलीम ख़ान
संयोजक, LBA
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डैनिक जनवाणी मेरठ से प्रकाषित होने वाला प्रमुख अखबार है। अखबार में आपका स्वागत है। अखबार के लिए आप अपने आलेख, कविता, गजल, कहानी और लघु कथा आदि भेज सकते हैं। हमारा एक काॅलम वे पढ़ रहें हैं इस काॅलम के लिए आप हमें आजकल किस साहित्यकार की पुस्तक पढ़ रहे हैं। उस पुस्तक में क्या नया है। क्यों पढ़ रहे हैं आदि लिखकर भेज सकते हैं। दूसरा काॅलम जो न पढ़ सका है इस काॅलम के लिए आप हमें उस पुस्तक के बारे में लिख कर भेज सकते हैं, जो आप पढ़ नहीं सके। क्यों नहीं पढ़ सके। क्या मजबूरी रही। क्यों पढ़ना चाहते थे। मलाल एक काॅलम है। इस काॅलम में आप लिख सकते हैं कि जिंदगी में आप को किस बात का मलाल रहा। इनके अलावा एक काॅलम सुकून का दिन है। आप अपना कौनसा दिन सुकून के साथ किस तरह बिताते हैं, इसके बारे में अपने अनुभव भेज सकते हैं। षब्द सीमा 500-600 तक हो। साथ में अपनी पासपोर्ट साइज फोटो भेजना मत भूलिएगा
सलीम अख्तर सिद्दीकी
०९०४५५८२४७२ Saleem_iect@yahoo.co.in
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बुधवार, जनवरी 26, 2011
इस दिन  हम स्वयं नहीं वल्कि पूरी दुनिया आंदोलित होती है

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मेरे प्यारे प्यारे साथियों,

हम भारतीयों का पर्व है गणतंत्र दिवस
इस दिन  हम स्वयं नहीं वल्कि पूरी दुनिया आंदोलित होती है
और स्वयं में सुधार हेतु अपनी बचनबद्धता को दुहराती है
आईये हम इस दिवस को साक्षी मानकर
सामूहिक रूप से ये शपथ  लेते हैं कि
ऐसा कोई भी कार्य हम नहीं करेंगे जिससे दूसरों की भावनाएं आह़त हो ....

आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाईयाँ और  कोटिश: शुभकामनाएं !
शुभेच्छु-
रवीन्द्र प्रभात
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मंगलवार, जनवरी 25, 2011
देसी स्विस बैंक का भंडाफोड़; बड़े नोटों के प्रचलन पर सरकार तुरंत रोक लगाये : सलीम ख़ान

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पिछली पोस्ट में मैंने ज़िक्र किया था कि क्यूँ स्विस बैंक में जमा पैसा वापिस आना चाहिए, यक़ीन मानिये अगर ऐसा वास्तव में हो गया तो हमारा प्यारा भारत देश पुनः सोने की चिड़िया बन जाएगा. मैं बीती पोस्ट की एक बात दोहराना चाहता हूँ कि अगर स्विस बैंक में जमा रक़म हमारे देश में आ जाती है और इसे हर भारतीय को हर महीने रु. 2000/- दिया जाए तो भी यह रक़म अगले 60 साल तक ख़त्म नहीं होगी. इस वाक्य पर ज़ोर डालिए और फ़िर सोचिये कि किस तरह से ये नेता/घोटालेबाज़/पूंजीपति आदि ने मात्र 64 सालों में ही देश को कितना और किस तरह से नोच-खसोट कर लूटा. आज हर भारतीय का ये फ़र्ज़ होना चाहिए कि इस रक़म को वापिस लाने के लिए आन्दोलन करे, लेख लिखे और पूरी कोशिश करे कि यह रक़म कैसे अपने देश भारत वापिस मंगाई जाए.

 ये तो रही स्विस बैंक में जमा देश की काली पूंजी की बात. मैं इस पोस्ट में देश में स्थापित देसी स्विस बैंक का खुलासा करूँगा ! आगे पढिये...

अलमारी, बेड और सूटकेस में भरे नम्बर 2 की आमदनी के बड़े नोट:
बड़े-बड़े मगरमच्छ जिनकी नम्बर 2 आमदनी रोज़ाना लाखों रूपये हैं, के घर में उनकी अलमारियों में, सूटकेश में, बेड के अन्दर  1000 और 500 के बड़े नोट भरे पड़े हैं. ये वो रक़म है जो उन्हें घूस के रूप में, उनके विभाग में किये गए किसी घोटाले के द्वारा और अन्य नम्बर दो तरीक़े से की गई आमदनी से प्राप्त हुई होती है.


अगर सरकार इन बड़े नोटों का प्रचलन तत्काल प्रभाव से रोक दे तो यह बड़े नोट उनकी अलमारी में पड़े रह जायेंगे. जैसा कि हम सब जानते है कि सरकार जिस नोट को बन्द करती है तो उसे रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया में जमा करने की ताक़ीद करती है और जहाँ तक हम-आप जैसे आम भारतीय की बात है तो वह सीना तान कर कुछ नोट जो उसकी जेब में होते है को वहाँ जमा कर छोटे नोट ले आ जाएगा.... लेकिन वही ये काले अँगरेज़ किस मुहँ से ट्रक में भर कर रिज़र्व बैंक तक ये बड़े नोट ले जा पाएंगे, सोचिये. इस तरह से भारतीय रूपये की क़ीमत अपने आप मज़बूत हो जायेगी.

अगर इच्छाशक्ति हो तो यह काम हमारी सरकार दो हफ्ते में कर सकती है....!!!!!!!!!!!!!! 

क्यूँ सही कहा ना...!
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भईया-जन को ये सलाह है की वह LUCKNOW BLOGGERS' ASSOCIATION को Google Chrome ब्राउज़र पर ही खोले जिससे उन्हें ब्लॉग पढने में और अधिक आनंद आएगा !

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नवगीत गोल क्यों? नवगीत घोंसले में नवगीत छोडो हाहाकार मियाँ! नवगीत जगो सूर्य आता है नवगीत त्रिपदिक नवगीत दर्पण का दिल नवगीत दिवाली नवगीत नव वर्ष नवगीत नागफनी उग आयी नवगीत निर्माणों के गीत नवगीत पहले गुना नवगीत भटक न जाए नवगीत भीड़ में नवगीत मिली दिहाडी नवगीत में नए रुझान नवगीत राम बचाए नवगीत रार ठानते नवगीत लोकतंत्र का पंछी नवगीत वह खासों में खास है नवगीत शिव नवगीत संक्रांति काल है नवगीत संग्रह नवगीत सत्याग्रह के नाम पर नवगीत समय वृक्ष नवगीत समीक्षा नवगीत सड़क पर नवगीत सड़क पर... नवगीत: उगना नित नवगीत: उड़ चल हंसा नवगीत: दीन प्रदर्शन नवगीत: नाम बड़े हैं नवगीत: भाग्य कुंडली नवगीत: लोकतंत्र का पंछी बेबस नवगीत: कुण्डी खटकी नवगीत: छोडो हाहाकार मियाँ! नवगीत: बजा बाँसुरी नवगीत: भारत आ रै नवगीत: रब की मर्ज़ी नवभारत टाईम्स नशा नाक की सर्जरी नाग नाभिक ऊर्जा नारि नारी मुक्ति नारी-भाव नाश प्रकृति का निर्निमेष निर्विकार निष्काम कर्म निष्ठुरता नीति व्यवहार नीति-नियम नीति-व्यवहार नीलकंठ नेकियां नेह नर्मदा तीर पर नेह-नाता नैतिकता नैन-डोर नैना नौ कन्या न्यू-ईयर गिफ्ट नज़र नज़ारा पंचौदन अजः पद चिन्ह पद-चिन्ह पद्मिनी परब्रह्म परम-पिता परमाणु परमानंद परमार्थ परलोक परहित पराग पराया-धन पल- छिन पशु पहलू पाँच पर्व पायल पिचकारी पीयूषवर्ष छंद पीर पुरुषार्थ पुरोवाक : यह बगुला मन पुरोवाक ओस की बूँद पुरोवाक केरल एक झाँकी पुरोवाक बुधिया लेता टोह पुरोवाक् पुलिस पूजा पूर्ण-ब्रह्म पूर्णकाम पृथ्वी पैरोडी पोखर ठोके दावा प्यार प्रकृति प्रकृति दोहन प्रकृति बादल प्रजापति प्रणम्य शहीद प्रणय प्रणय -दीप प्रणय के पल प्रतिकण प्रतियोगिता प्रत्रकार प्रदूषण प्रभाव प्रभु प्रभु ज्ञान प्रश्न मन के प्राण शर्मा प्रातस्मरण स्तोत्र प्रिय प्रवास प्रीति के रंग प्रीति-चलन प्रेम के छःलक्षण प्रेम प्याला प्रेम ममता फरवरी कब क्या? फागुन बंगलोर . कर्णाटक बंगालूरू बंधन व मुक्ति नारी बगीचा बच्चे बजरंग बली बद्दुआ बन्गलूरू बबिता चौबे बयान बरसाना बरसानौ बलि बसंत पंचमी बसंत मुक्तक बसंतोत्सव/मदनोत्सव बहादुरी बहु बहुरंगी संस्कृति बांगला बाढ़ ने बिगाड़ा पशुपालन कारोबार बात बापू बाबा अम्बेडकर साहब बाबा संस्कृति बारह-सोलह वर्णिक छंद बाल कविता बाल कविता : तुहिना-दादी बाल कविता अंशू-मिंशू और भालू बाल कविता कौआ स्नान बाल गीत : ज़िंदगी के मानी बाल गीत पाई शाल बाल नवगीत सूरज बबुआ! बासंती दोहा ग़ज़ल बिग-बेंग बिगबेंग बिरसा मुंडा बुंदेली नवगीत बूढ़ा बरगद कथा-गीत बेटियाँ बेदिल बेनज़ाइटन ब्रह्म ब्रह्मजीत गौतम ब्रह्मा ब्रह्माण्ड ब्रिषभानु ब्लागिंग ब्लॉगरों का सम्मान ब्लोग नगरी ब्लोगोत्सव- २०१० भगवती प्रसाद देवपुरा भगवा रंग भवन निर्माण भविष्य भारत आरती भारत की रमणियाँ भारत जय हिन्द भारत भूमि भारत माता भारत रत्न भारतीय मुद्रा पर गाँधी भाव सप्रेषण भाषा भाषा सेतु भाषाविज्ञान भूख भेदाभेद परे भ्रष्टाचार मंजिल मंदिर मस्जिद मटुकी मतदाता मत्तगयंद सवैया मथानी मथुरा मदरसे मधु कल्पना मधुपुरी मधुर मधुर निनाद मन का निर्मलेी मन विहग मन-मीत मनाना मनुहार मनोरंजन मनोरजंन मन्त्र पल मर्दों में यौन कुंठा मर्यादा मलेशिया मस्ज़िद-मन्दिर महक महात्मा गाँधी पर मार्टिन लूथर किंग महादेवी महान देश महिला सेवा समिति महेश महफ़िल माखन माघ माता मात्रा गणना माधुरी गुप्ता मानव -कृत्य मानव के विस्तार मानव जातीय छंद मानो या न मानो माहिया किसान माहिया गीत माहिया दिवाली माहेश्वरी-प्रजा मिट गये मिथिलेश मिथिलेश दुबे मिथिलेश दुब मिथिलेश दुबे लेख महिंला मिलन मिस्र में विद्रोह मीरा मुकतक मुक्तक कार्यशाला मुक्तक छंद सलिला मुक्तक बसंत मुक्तक भूगोलीय मुक्तक में गणित मुक्तक हाइकु मुक्तिका मन से डरिए मुक्तिका हे माधव ! मुक्तिका किस्सा नहीं हूँ मुक्तिका बसंत मुक्तिका मन मुक्तिका यमक मुक्तिका राजस्थानी मुक्तिका रात मुक्तिका व्यंग्य मुक्तिका: न होता मुजाहिद मुन्ना भाई मुरारीलाल खरे मुलाक़ात मुस्कराहट मुहब्बत ए इलाही मुहब्बतनामा मूल मूलभूत सुविधाएं मूल्यांकन मेघ मेरा देश मेरे भैया मेरे मन मेले मैं -तू मैं करता तब मैथुनी-भाव मॉल संस्कृति मोक्ष मोमिन मोर मुकुट मोहन शशि मौसम मौसम अंगार है यकीं यक्ष प्रश्न यक्ष प्रश्न २ यक्ष प्रश्न ३ - जात और जाति यक्ष-प्रश्न यम-यमी यमकमयी मुक्तिका यश मालवीय यशवंत याद में तेरी जाग-जाग के युवा दिवस युवा प्रतिभा सम्मान युवावर्ग यूपीखबर 'DR. 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आप सभी को हर्ष और बधाई के साथ यह सूचना देना चाहता हूँ कि LBA अपनी सफलता के उस मुक़ाम तक आ चुका है कि इसकी सदस्यता संख्या अपने चरण तक पहुँच चुकी है और जो ब्लॉगर्स बन्धु इससे जुड़ने की इच्छा रख रहे हैं और जिनके मेल मुझे मिल रहे हैं उसको मद्देनज़र रखते हुए नयी सदस्यता के इच्छुक ब्लॉगर्स को एक और भी शक्तिशाली और नया मंच का गठन आज किया जा रहा है जिसका नाम है 'ऑल इंडिया ब्लॉगर्स असोसिएशन' अर्थात AIBA ! इस मंच का हिस्सा सभी भारतीय बन सकते है, फ़िर चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में रह रहें हों !!!
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